विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026: टेली-मानस हेल्पलाइन पर अब तक 47.75 लाख कॉल, 53 सेल सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय 10 अक्टूबर 2026 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मना रहा है, और इस अवसर पर सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन (टोल-फ्री नंबर 14416) ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है — लॉन्च के बाद से अब तक 47,75,644 कॉल दर्ज की जा चुकी हैं। इस वर्ष का वैश्विक विषय 'लिव्ड एक्सपीरिएन्स हर्ड: रीयल वॉइसेज, रीयल चेंज' है, जो मानसिक स्वास्थ्य से जूझ रहे लोगों की आवाज़ को केंद्र में रखता है।
टेली-मानस: चार साल में कितना सफर
10 अक्टूबर 2022 को लॉन्च हुई टेली-मानस सेवा अब देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 53 टेली-मानस सेल के माध्यम से चौबीसों घंटे, सातों दिन निःशुल्क और गोपनीय मानसिक स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराती है। यह बहुभाषी सेवा है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों के लोग बिना किसी स्वास्थ्य केंद्र गए घर बैठे प्रशिक्षित काउंसलर से बात कर सकते हैं।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भारी कमी है और ग्रामीण क्षेत्रों में मनोचिकित्सक तक पहुँचना अक्सर असंभव-सा है। टेलीफोन-आधारित परामर्श ने इस खाई को पाटने में अहम भूमिका निभाई है।
कौन कर रहा है सबसे ज़्यादा कॉल
आँकड़ों के अनुसार, कुल रिकॉर्ड किए गए 13,35,275 कॉलर्स में 43.78 प्रतिशत यानी 5,84,587 महिलाएँ हैं, जबकि 54.18 प्रतिशत पुरुष हैं। यह आँकड़ा बताता है कि टेलीफोन परामर्श ने महिलाओं के लिए मदद माँगने की सामाजिक बाधाओं को काफी हद तक कम किया है।
आयु वर्ग के लिहाज़ से 18 से 45 वर्ष के युवा और कामकाजी उम्र के लोग सबसे अधिक, यानी कुल कॉलर्स का 73.2 प्रतिशत, इस सेवा का उपयोग कर रहे हैं। लोग मुख्यतः भावनात्मक परेशानी, चिंता, तनाव, परीक्षा का दबाव, कार्यस्थल और रिश्तों से जुड़ी समस्याओं तथा नींद न आने की शिकायतें लेकर संपर्क कर रहे हैं। ज़रूरत पड़ने पर कॉलर्स को विशेषज्ञ और रेफरल सेवाओं से भी जोड़ा जाता है।
ज़मीनी स्तर पर सेवा विस्तार
मंत्रालय के अनुसार, 767 जिलों के लिए जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत बाह्य-रोगी सेवा, परामर्श, दवाएँ, फॉलो-अप और रेफरल की सुविधाएँ दी जा रही हैं। इसके साथ-साथ देशभर में 1.83 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एकीकृत किया गया है, जहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य टीमें शुरुआती जाँच और सहायता दे रही हैं।
मानस जागृति पहल और कलंक उन्मूलन
इस दिवस के अवसर पर मंत्रालय 'एमएएनएन' (MANN) जागृति पहल को भी आगे बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य सामुदायिक जागरूकता बढ़ाना, शीघ्र सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करना और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करना है। स्कूलों, कॉलेजों, कार्यस्थलों और स्वास्थ्य केंद्रों में खुली बातचीत को प्रोत्साहित किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपील करते हुए कहा है कि मदद माँगने में झिझक नहीं होनी चाहिए। मंत्रालय के अनुसार, 'हर बातचीत मायने रखती है, हर आवाज़ सुनी जानी चाहिए।' जो भी परेशान हो, वह 14416 पर कॉल कर निःशुल्क सहायता प्राप्त कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेली-मानस की पहुँच और जागरूकता वर्तमान दर से बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में यह भारत की मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ बन सकती है।