10 अक्टूबर 2026
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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026: WHO का खुलासा — हर 7 में से 1 व्यक्ति मानसिक बीमारी से पीड़ित

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विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026: WHO का खुलासा — हर 7 में से 1 व्यक्ति मानसिक बीमारी से पीड़ित

सारांश

दुनिया में हर 7 में से 1 व्यक्ति मानसिक बीमारी से जूझ रहा है — और WHO का कहना है कि इलाज का तरीका भी बदलना होगा। संस्थागत कैद से समुदाय-आधारित देखभाल तक का यह सफर अधिकारों और सम्मान की लड़ाई भी है।

मुख्य बातें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार दुनिया में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित है।
WHO के मेंटल हेल्थ एटलस के अनुसार केवल 9% देश पूरी तरह समुदाय-आधारित देखभाल की ओर बढ़ चुके हैं, जबकि 53% अभी शुरुआती चरण में हैं।
मनोरोग अस्पतालों में भर्ती 28% मरीज़ 6 महीने से अधिक समय तक वहाँ रहते हैं, अक्सर बिना सहमति के।
WHO ने 10 अक्टूबर 2026 को 'डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन' पर नई मार्गदर्शिका जारी की, जो संस्थागत देखभाल से बाहर निकलने में मदद करेगी।
टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने देशों से अपील की — मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश संस्थानों से हटाकर समुदाय की ओर किया जाए।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 10 अक्टूबर 2026 को एक गंभीर तथ्य सामने रखा है — दुनिया भर में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। संगठन ने इस दिन एक नई मार्गदर्शिका भी जारी की, जो देशों को मनोरोग अस्पतालों पर निर्भरता छोड़कर समुदाय-आधारित देखभाल प्रणाली की ओर बढ़ने में सहायता करेगी।

मुख्य आँकड़े और वैश्विक स्थिति

WHO के 'मेंटल हेल्थ एटलस' के अनुसार, रिपोर्ट करने वाले देशों में से केवल 9 प्रतिशत देश ही पूरी तरह से समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली अपना चुके हैं। वहीं, 53 प्रतिशत से अधिक देश अभी सुधार के प्रारंभिक चरण में ही हैं। इससे भी चिंताजनक तथ्य यह है कि मनोरोग अस्पतालों में भर्ती होने वाले 28 प्रतिशत — यानी चार में से एक से अधिक — मरीज़ वहाँ छह महीने से अधिक समय तक रहते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है और कोविड-19 महामारी के बाद मानसिक विकारों के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

WHO की नई मार्गदर्शिका: 'डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन' पर ज़ोर

WHO ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस से पहले एक नई गाइड जारी की है। इस प्रक्रिया को 'डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन' (डीआई) कहा जाता है, जिसका उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो मनोरोग अस्पतालों में छह महीने या उससे अधिक समय बिता चुके हैं, ताकि वे अपने समुदाय में सम्मान के साथ वापस लौट सकें।

गौरतलब है कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बहुत से लोग बड़े मनोरोग अस्पतालों और सामाजिक देखभाल संस्थानों में निवास कर रहे हैं। इनमें से लगभग आधे लोगों को महीनों, वर्षों या दशकों तक बिना उनकी सहमति के इन संस्थानों में रखा जाता है, जिससे वे समाज की मुख्यधारा से कट जाते हैं।

WHO महानिदेशक की अपील

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा, 'लगातार मानसिक स्वास्थ्य सहायता पाने के लिए लोगों को अपनी आज़ादी, सम्मान या समुदाय में अपनी जगह नहीं छोड़नी चाहिए। देशों को लंबे समय तक चलने वाली संस्थागत देखभाल पर निर्भरता कम करनी चाहिए और संस्थानों से निवेश हटाकर समुदाय में अधिकारों पर आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की ओर तेज़ी से बढ़ना चाहिए।'

WHO ने अपने एक्स पोस्ट में यह भी रेखांकित किया कि जिन लोगों को स्वयं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का अनुभव रहा है, वे सेवाओं को डिज़ाइन करने, उन्हें लोगों तक पहुँचाने और उनमें सुधार लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

अनुभवी आवाज़ों की भूमिका

स्वतंत्र 'लिव्ड एक्सपीरियंस कंसल्टेंट' और अधिवक्ता ग्रेस गटेरा ने कहा, 'समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की ओर बढ़ने का कार्य उन लोगों के साथ मिलकर किया जाना चाहिए जो जानते हैं कि संस्थागत देखभाल से गुज़रने का क्या अर्थ होता है — न कि केवल उनके लिए।' उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की विशेषज्ञता, पेशेवर विशेषज्ञों की विशेषज्ञता के साथ मिलकर ऐसी सेवाएँ बना सकती है जो पसंद, पुनर्वास और सामुदायिक जीवन में भागीदारी को प्राथमिकता दे।

आगे की राह

WHO ने सरकारों और सेवा प्रदाताओं से आग्रह किया है कि वे संस्थागत देखभाल से समुदाय-आधारित देखभाल की ओर परिवर्तन की प्रक्रिया को गति दें और मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली को उन लोगों के साथ मिलकर विकसित करें जिन्हें इसका प्रत्यक्ष अनुभव है। यह पहल संकेत देती है कि वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य ढाँचे में एक बड़े बदलाव की ज़रूरत है — जो केवल उपचार तक सीमित न रहे, बल्कि सम्मान और स्वायत्तता को भी केंद्र में रखे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस वास्तविकता की स्वीकृति है जिसे दशकों तक वैश्विक स्वास्थ्य एजेंडे में हाशिये पर रखा गया। असली सवाल यह है कि जब केवल 9% देश ही समुदाय-आधारित देखभाल की ओर बढ़ पाए हैं, तो नई मार्गदर्शिका महज दस्तावेज़ न बनकर ज़मीनी बदलाव कैसे लाएगी। भारत जैसे देशों में जहाँ मानसिक स्वास्थ्य अभी भी सामाजिक कलंक से घिरा है और सार्वजनिक स्वास्थ्य बजट में मानसिक स्वास्थ्य की हिस्सेदारी नगण्य है, वहाँ 'डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन' का विचार तब तक अधूरा रहेगा जब तक सामुदायिक ढाँचा तैयार नहीं होता। बिना संसाधन और प्रशिक्षित जनशक्ति के, यह परिवर्तन मरीज़ों को अस्पताल से सड़क पर धकेलने का ज़ोखिम भी उठाता है।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हर वर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और वैश्विक स्तर पर बेहतर देखभाल के लिए नीति-निर्माताओं को प्रेरित करना है।
WHO के अनुसार दुनिया में कितने लोग मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं?
WHO के अनुसार दुनिया में हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। यह आँकड़ा वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट की गहराई को दर्शाता है।
'डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन' क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
'डी-इंस्टीट्यूशनलाइज़ेशन' वह प्रक्रिया है जिसमें लंबे समय से मनोरोग अस्पतालों में रह रहे लोगों को — विशेष रूप से जो 6 महीने या उससे अधिक से वहाँ हैं — उनके समुदाय में वापस लाया जाता है और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर दिए जाते हैं। WHO के अनुसार संस्थागत देखभाल अक्सर लोगों की स्वतंत्रता और सम्मान को प्रभावित करती है।
कितने देश समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल की ओर बढ़ चुके हैं?
WHO के 'मेंटल हेल्थ एटलस' के अनुसार रिपोर्ट करने वाले देशों में से केवल 9% देश ही पूरी तरह समुदाय-आधारित देखभाल की ओर बढ़ चुके हैं। 53% से अधिक देश अभी सुधार के प्रारंभिक चरण में हैं।
WHO ने 2026 में मानसिक स्वास्थ्य पर क्या नई पहल की?
WHO ने 10 अक्टूबर 2026 को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर एक नई मार्गदर्शिका जारी की, जो देशों को संस्थागत देखभाल से समुदाय-आधारित देखभाल की ओर संक्रमण में मदद करेगी। साथ ही, संगठन ने सरकारों और सेवा प्रदाताओं से आग्रह किया कि वे मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली को अनुभव-संपन्न व्यक्तियों के साथ मिलकर बनाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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