अमेरिका में मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ते खर्च के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं; विशेषज्ञों की चेतावनी
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं: बढ़ती मांग और खर्च के बावजूद प्रभावी परिणाम नहीं मिल रहे।
- ओवरडायग्नोसिस: अधिक संख्या में लोग उपचार प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो रहा।
- बिहेवियरल थेरेपी: दवा के बजाय व्यवहारिक उपचार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
- आत्महत्या की दर: युवाओं में आत्महत्या की दर उच्चतम स्तर पर है।
- नीतिगत सुधार की आवश्यकता: मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।
वाशिंगटन, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में मानसिक तनाव या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का इलाज कराने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी मात्रा में धन और समय लगाने के बावजूद, लोगों की स्थिति में सुधार की बजाय और अधिक बिगड़ती जा रही है।
असल में, मानसिक स्वास्थ्य पर आयोजित कांग्रेसनल राउंडटेबल में विधायकों और विशेषज्ञों ने बताया कि सिस्टम की पहुंच और लागत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस सुधार लाने में कठिनाई हो रही है, जिसे प्रभावी रूप से मापा जा सके।
कांग्रेसी ग्लेन ग्रोथमैन ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने वाले युवाओं की संख्या पिछले दो दशकों में दोगुनी से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा 2002 में 27 मिलियन था, जो अब बढ़कर 2024 में लगभग 60 मिलियन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा, "तनाव की दर अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर है और आत्महत्या की दर दशकों में अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।"
ग्रोथमैन ने कहा, "यह एक बुनियादी सवाल उठाता है। अगर हम पहले से कहीं ज्यादा लोगों का इलाज कर रहे हैं, तो हमें बेहतर परिणाम क्यों नहीं मिल रहे हैं?"
स्वास्थ्य कानून के प्रोफेसर डेविड हाइमन ने कहा कि समस्या इस बात में निहित है कि सिस्टम कैसे तैयार किया गया है। मानसिक स्वास्थ्य और नशीली दवाओं के उपचार पर खर्च, कुल स्वास्थ्य सेवा पर खर्च की तुलना में तेजी से बढ़ा है, जो अब कुल खर्च का लगभग 5 प्रतिशत है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अधिक खर्च का मतलब यह नहीं है कि परिणाम बेहतर होंगे।
हाइमन ने कहा, "जब हम सेवाओं के लिए पैसे देते हैं, तो हमें सेवाएं मिलती हैं; जरूरी नहीं कि हमें बेहतर मानसिक स्वास्थ्य मिले।" उन्होंने गलत प्रेरणाओं और प्रभाव के भरोसेमंद तरीकों की कमी की ओर इशारा किया।
उन्होंने धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए मानसिक स्वास्थ्य क्षेत्र को "जालसाजी से भरा उद्योग" कहा। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सेवाएं न देने और फर्जी रिकॉर्ड के आधार पर बिलिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, कड़े प्रवर्तन के बावजूद इसका प्रभाव सीमित रहा है और अब तक सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने में कोई सफलता नहीं मिली है।
मनोचिकित्सक सैली सैटेल ने नीति-निर्धारकों को बताया कि इस समस्या का एक मुख्य कारण 'ओवरडायग्नोसिस' और सामान्य जीवन की परेशानियों का 'मेडिकलाइजेशन' करना है। उन्होंने स्पष्ट किया, "अक्सर डॉक्टर ऐसे लोगों का भी उपचार कर रहे हैं, जिन्हें वास्तव में कोई मानसिक विकार नहीं है। हालांकि, कुछ गंभीर स्थितियां वास्तव में चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं।"
उन्होंने बच्चों में निदान के मामलों में तेजी से वृद्धि की ओर ध्यान दिलाया। 2023 में हर 36 में से एक बच्चे में ऑटिज्म पाया गया, जबकि यह आंकड़ा 2006 में 110 में से एक था। बता दें, ऑटिज्म मस्तिष्क के विकास से संबंधित एक न्यूरो-डेवलपमेंटल अवस्था है। वहीं, लगभग हर 10 में से एक युवा में एडीएचडी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) की पहचान हो रही है, जहां अक्सर पर्याप्त जांच के बिना ही शुरुआती दौर में दवाओं पर निर्भरता बढ़ जाती है।
सैटेल ने कहा कि बिहेवियरल थेरेपी को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने कहा, "बिहेवियरल ट्रीटमेंट आजमाने से पहले दवा लेने की जल्दबाजी आम हो गई है, भले ही ऐसी थेरेपी समय के साथ प्रभावी हो सकती है।"
उन्होंने दिव्यांगता कार्यक्रम को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं इसमें बड़ी हिस्सेदारी रखती हैं और कई मामलों में इनकी पुनरावलोकन नहीं होती। उन्होंने कहा, "सबसे हानिकारक परिणामों में से एक यह है कि मरीज को कार्यबल से बाहर कर दिया जाता है।" मनोचिकित्सक सैटेल ने काम को सबसे बेहतर थेरेपी में से एक बताया।
इनर कंपास इनिशिएटिव की फाउंडर और पूर्व मरीज लॉरा डेलानो ने लंबे समय तक चलने वाले इलाज और उसके परिणामों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लाखों अमेरिकियों को लंबे समय के खतरों या उन्हें सुरक्षित तरीके से कैसे बंद किया जाए, इस बारे में स्पष्ट जानकारी के बिना मनोचिकित्सक दवाएं दी जाती हैं।
उन्होंने कहा, "लगभग दस लाख लोगों ने हमारी जानकारी और संसाधनों तक अपनी पहुंच बनाई है। दवा बंद करने की कोशिश करते समय कई लोगों को विड्रॉल सिम्पटम्स का सामना करना पड़ता है।"
उन्होंने कहा, "जिसे हम मानसिक स्वास्थ्य संकट कह रहे हैं, वह बड़े पैमाने पर ओवरमेडिकलाइजेशन का संकट है।" उन्होंने एक ऐसे सिस्टम के बारे में बताया जो इंसानी कठिनाइयों को ऐसी मेडिकल स्थिति तक सीमित कर देता है, जिसके लिए दवा की आवश्यकता होती है।
इसके साथ ही, आत्महत्या की दर और बताई गई मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियां बढ़ गई हैं। खासकर युवाओं में ये मामले अधिक देखे जा रहे हैं, जिससे देखभाल के तरीकों की नई जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या मौजूदा तरीके सामाजिक, व्यवहारिक और आर्थिक कारणों को हल कर रहे हैं।