उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन 10 अक्टूबर को एम्स देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह को करेंगे संबोधित
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 10 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को झारखंड के देवघर का दौरा करेंगे, जहाँ वे ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) देवघर के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब उपराष्ट्रपति इसी सप्ताह नई दिल्ली में एक अन्य महत्त्वपूर्ण दीक्षांत समारोह में भी शामिल हो चुके हैं।
देवघर दौरे का कार्यक्रम
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन एम्स देवघर के दीक्षांत समारोह के अलावा देवघर स्थित बीबीएमटी अस्पताल में आयोजित 'सैन्य संपर्क मेले' का भी दौरा करेंगे। यह मेला सशस्त्र बलों और आम जनता के बीच संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल मानी जाती है।
श्री लाल बहादुर शास्त्री विश्वविद्यालय में भाषण की मुख्य बातें
इससे पहले इसी सप्ताह उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने 'नशे को न' की शपथ दिलाई और उत्कृष्ट अंकों से उत्तीर्ण छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए।
संस्कृत विद्यापीठ से केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने की यात्रा का उल्लेख करते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि अब समय आ गया है कि यह संस्थान संस्कृत अध्ययन के लिए एक विश्वस्तरीय केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करे और अपने संस्थापक स्वर्गीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के विज़न को साकार करे।
संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर
उपराष्ट्रपति ने संस्कृत को भारत की विभिन्न भाषाओं को जोड़ने वाला 'सुनहरा धागा' बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय को NAAC का सर्वोच्च ग्रेड 'A++' प्राप्त करने, कैंपस में 'सुभाषिता' के माध्यम से संस्कृत को जीवित रखने, 44 वर्ष पुरानी 'विद्यापीठ पंचांग' की परंपरा और प्राकृत एवं वास्तु शास्त्र जैसे पारंपरिक विषयों की पढ़ाई के लिए सराहा।
राधाकृष्णन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और 'अष्टादशी' योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृत के दुर्लभ ग्रंथों को विलुप्त होने से बचाना होगा — उन्हें संरक्षित करना, उन पर शोध करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपलब्ध कराना अनिवार्य है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षकों और छात्रों से अप्रकाशित संस्कृत पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण, आलोचनात्मक संपादन और प्रकाशन का कार्य करने का विशेष आग्रह किया।
शास्त्री को श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक विरासत
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को श्रद्धांजलि देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका प्रसिद्ध नारा 'जय जवान, जय किसान' महज़ एक नारा नहीं था, बल्कि यह राष्ट्र की सीमा-सुरक्षा और खाद्य-सुरक्षा के प्रति अटूट संकल्प का प्रतीक था। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाई गई विभिन्न पहलों ने संस्कृत के पुनरुत्थान और भारतीय ज्ञान प्रणाली को प्रोत्साहित करने का अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
आगे की राह
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की देवघर यात्रा चिकित्सा शिक्षा और सैन्य-नागरिक सम्पर्क दोनों क्षेत्रों को एक साथ रेखांकित करती है। एम्स देवघर का दूसरा दीक्षांत समारोह झारखंड में स्वास्थ्य शिक्षा के विस्तार का महत्त्वपूर्ण पड़ाव है और इस अवसर पर उपराष्ट्रपति की उपस्थिति इस संस्थान के राष्ट्रीय महत्त्व को और बल देगी।