क्या योगी सरकार फरवरी से 100 दिवसीय सघन टीबी रोगी खोज अभियान शुरू कर रही है?
सारांश
Key Takeaways
- टीबी उन्मूलन के लिए 100 दिवसीय सघन अभियान।
- जनप्रतिनिधियों और विभागों का सहयोग।
- टीबी मरीजों की पहचान और उपचार की योजना।
- सामाजिक जन जागरूकता का महत्व।
- स्क्रीनिंग और जांच की रणनीतियाँ।
लखनऊ, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। योगी सरकार प्रदेश में तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के लिए एक बार फिर 100 दिवसीय विशेष सघन रोगी खोज अभियान प्रारंभ करने जा रही है। यह अभियान फरवरी में आरंभ होगा, जिसमें जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न विभागों के सहयोग से अधिकतम मरीजों की पहचान कर उनका उपचार आरंभ करने की योजना है।
स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी अपर निदेशकों एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य विभाग ने टीबी रोगियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार हेतु प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास विभाग को पत्र लिखा है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने कहा कि यह सघन टीबी खोज अभियान 7 दिसंबर 2024 से चलाया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि वर्ष 2015 के मुकाबले प्रति एक लाख व्यक्तियों में टीबी मरीजों की संख्या में 17 प्रतिशत और टीबी से होने वाली मृत्युओं में भी 17 प्रतिशत की कमी आई है। इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर विभाग ने फरवरी में टीबी रोगी खोज अभियान पुनः आरंभ करने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य महानिदेशक (डीजी) डॉ. आरपी सिंह सुमन ने जनभागीदारी के महत्व पर बल देते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
सभी सीएमओ को निर्देशित किया गया है कि वे दो माह में सांसदों के साथ जनपद स्तरीय समीक्षा करें और उन्हें निःक्षय शिविर एवं अन्य जनभागीदारी गतिविधियों में शामिल करें। ये समीक्षा बैठकें आगे भी जारी रहेंगी। इसके अलावा, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, प्रधानों एवं पार्षदों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा। अभियान में सामाजिक जन जागरूकता बढ़ाने के लिए 'माई भारत' वालंटियर्स एवं अन्य पंजीकृत निःक्षय मित्रों का उपयोग किया जाएगा।
डीजी ने सभी कारागारों एवं मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, प्राथमिक स्कूलों से लेकर विश्वविद्यालयों तक में निबंध, पोस्टर प्रतियोगिताओं समेत विभिन्न माध्यमों से छात्रों में जागरूकता फैलाने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा, समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वे टीबी के लक्षण वाले लोगों को स्क्रीनिंग के लिए भेज सकें। परिवहन विभाग से जुड़े चालकों एवं कंडक्टरों की स्क्रीनिंग कराने एवं कारखानों में काम करने वालों की भी शिविर लगाकर जांच करने को कहा गया है।
यह है अभियान की रणनीति:
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं उनसे नीचे की स्वास्थ्य इकाइयों से 5 प्रतिशत और जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेजों से 10 प्रतिशत लोगों को सामान्य ओपीडी से टीबी जांच के लिए रेफर करना।
- आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से टीबी जांच के लिए सैम्पल ट्रांसपोर्टरों की व्यवस्था करना।
- बुजुर्गों एवं गंभीर मरीजों की यथासंभव जांच कराना।
- स्थानीय गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट्स, विभागों, संस्थानों को निःक्षय मित्र के रूप में प्रेरित करना।