48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता: चीन ने 71 प्रतियोगियों का दल उतारा, शांगहाई में 22 सितंबर से मुकाबला
सारांश
मुख्य बातें
चीन ने 48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता के लिए अपने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल का गठन कर लिया है, जिसमें 71 प्रतियोगी सहित कुल 220 सदस्य शामिल हैं। चीनी मानव संसाधन और सामाजिक सुरक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद यह दल औपचारिक रूप से गठित किया गया है, जो 22 से 27 सितंबर 2026 के बीच शांगहाई में होने वाली इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के सभी 64 स्पर्धाओं में भाग लेगा।
दल की संरचना और विविधता
चीनी प्रतिनिधिमंडल के 71 प्रतियोगी देश के 21 प्रांतों से चुने गए हैं। इनमें 49 छात्र और 22 कार्यरत कर्मचारी शामिल हैं। दल की औसत आयु 21 वर्ष है — सबसे कम उम्र के प्रतियोगी की आयु 18 वर्ष और सबसे अधिक उम्र के प्रतियोगी की आयु 25 वर्ष है। यह युवा संरचना दर्शाती है कि चीन व्यावसायिक कौशल विकास में नई पीढ़ी पर दाँव लगा रहा है।
चीन का शानदार पदक इतिहास
2010 में विश्व कौशल संगठन की सदस्यता लेने के बाद से चीन अब तक 7 विश्व कौशल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुका है। इस दौरान उसने कुल 93 स्वर्ण पदक, 41 रजत पदक, 28 कांस्य पदक और 71 सांत्वना पुरस्कार जीते हैं। उल्लेखनीय है कि चीन लगातार 4 बार पदक तालिका और टीम अंक तालिका दोनों में शीर्ष स्थान पर रहा है — यह प्रदर्शन उसे इस प्रतियोगिता का सबसे दबदबे वाला देश बनाता है।
शांगहाई में वैश्विक मंच
इस वर्ष की 48वीं विश्व कौशल प्रतियोगिता शांगहाई में आयोजित होगी — और यह चीन के लिए दोहरे महत्व की है। यह चीन की इस प्रतियोगिता में 8वीं भागीदारी होगी और तीसरी बार वह सभी स्पर्धाओं में उतरेगा। प्रतियोगिता में 70 देशों और क्षेत्रों के लगभग 1,400 प्रतियोगी हिस्सा लेंगे। गौरतलब है कि यह आयोजन स्वयं चीन की धरती पर हो रहा है, जिससे मेज़बान देश पर प्रदर्शन का अतिरिक्त दबाव भी रहेगा।
प्रतिनिधिमंडल का संकल्प
चीनी प्रतिनिधिमंडल के संबंधित अधिकारी ने कहा कि पूरा दल प्रतियोगिता के नियमों का कड़ाई से पालन करेगा और निष्पक्ष एवं सभ्य तरीके से मुकाबला करेगा। अधिकारी ने यह भी कहा कि दल अपने कौशल और प्रदर्शन को पूरी तरह सामने रखेगा तथा 'नए युग के चीनी कुशल युवाओं की उत्कृष्ट क्षमता और अच्छी छवि' को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा।
आगे क्या
22 सितंबर 2026 से शांगहाई में शुरू होने वाली इस प्रतियोगिता में चीन के घरेलू मैदान पर उतरने से वैश्विक ध्यान और भी बढ़ गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या चीन पाँचवीं बार लगातार पदक तालिका में शीर्ष स्थान बरकरार रख पाता है।