अफगानिस्तान में 1.92 करोड़ लोग भुखमरी के कगार पर, संयुक्त राष्ट्र ने सर्दियों से पहले दी गंभीर चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अफगानिस्तान में 1.92 करोड़ लोग — यानी देश की कुल आबादी का 38 प्रतिशत — नवंबर 2026 से अप्रैल 2027 के बीच गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने 21 अक्टूबर 2026 को यह चेतावनी जारी की, और सर्दियों के मौसम से पहले अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की अपील की। अभी भी करीब 1.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा झेल रहे हैं, जिनमें से 34 लाख आपातकालीन भुखमरी स्तर (आईपीसी चरण 4) पर हैं।
मौजूदा स्थिति और सर्दियों की आशंका
OCHA की प्रवक्ता ओल्गा चेरेव्को ने दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान का दौरा करने के बाद यह बयान दिया। उन्होंने बताया कि बेरोज़गारी, कम आय और ज़रूरी सेवाओं तक सीमित पहुँच के कारण लाखों परिवार अब भी पर्याप्त भोजन खरीदने में असमर्थ हैं।
पिछले साल इसी अवधि (नवंबर-अप्रैल) के लिए यह आँकड़ा 1.74 करोड़ था — इस साल यह संख्या और बढ़ गई है। इनमें से 50 लाख लोगों को आपातकालीन स्तर की भुखमरी (आईपीसी चरण 4) का सामना करना पड़ सकता है, जो अप्रैल-सितंबर 2026 के अनुमानित आँकड़ों से दोगुनी संख्या है।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
आँकड़ों के अनुसार, बदख्शां, बदगीस, दायकुंडी, घोर, समंगन, सर-ए-पोल और गजनी के ग्रामीण इलाकों में हालात सबसे विकट होने की आशंका है। ये वे इलाके हैं जहाँ पहुँच-मार्ग, स्वास्थ्य सेवाएँ और आजीविका के साधन पहले से ही बेहद सीमित हैं।
महिलाएँ और बच्चे इस संकट में सबसे कमज़ोर स्थिति में हैं। खाद्य और कृषि संगठन (FAO) तथा विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) के अनुसार, कुपोषण के मामलों में 2026 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि होकर यह संख्या 40 लाख तक पहुँचने का अनुमान है, जिनमें से एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा श्रेणी के हैं।
संकट के प्रमुख कारण
यह संकट एकल कारण से नहीं, बल्कि एक-के-बाद-एक लगे झटकों का परिणाम है। इस वर्ष ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी ने पहले से दबाव में चल रही खाद्य व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ डाला है। इसके अलावा, सीमाओं पर पाबंदियों और होर्मुज़ स्ट्रेट से होने वाली शिपिंग में रुकावटों ने ज़रूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ा दी हैं।
गौरतलब है कि 2026 में अच्छी बारिश के कारण फसल उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन लगातार बेरोज़गारी के चलते वे परिवार जो खुद अनाज नहीं उगाते, अब भी पौष्टिक आहार खरीदने में असमर्थ हैं। चेरेव्को ने कहा कि वर्षों के संघर्ष, आर्थिक संकट, सूखे और बार-बार आए झटकों ने लोगों की नए संकट से उबरने की क्षमता को गंभीर रूप से कमज़ोर कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र की अपील और सुझाव
OCHA की प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि मानवीय सहायता जीवन बचाने के लिए अनिवार्य है, लेकिन यह सार्वजनिक सेवाओं, रोज़गार और आय के स्थायी स्रोतों का विकल्प नहीं हो सकती। उन्होंने कृषि, ग्रामीण आजीविका, स्थानीय बाज़ारों, जल प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवाओं और महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों में अधिक निवेश की माँग की।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सर्दियाँ आने से पहले कदम उठाने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि सहायता तब पहुँचनी चाहिए जब ज़रूरतमंद परिवारों के पास अभी भी कुछ संसाधन बचे हों — न कि तब जब वे पूरी तरह खाली हाथ हो जाएँ। यह ऐसे समय में आया है जब मानवीय सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में भारी कमी दर्ज की जा रही है।
आगे की राह
FAO और WFP ने 'इंटीग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन' (IPC) के ताज़ा विश्लेषण के आधार पर यह भी चेतावनी दी है कि 2027 में गंभीर कुपोषण के मामलों में भारी वृद्धि हो सकती है। बचाव और इलाज की सुविधाएँ पहले से अपर्याप्त हैं, और यदि सर्दियों से पहले ठोस हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो मानवीय संकट और गहरा होने की आशंका है।