20 अक्टूबर 2026
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अफगानिस्तान में 1.92 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट की चपेट में, FAO-WFP की कड़ी चेतावनी

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अफगानिस्तान में 1.92 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट की चपेट में, FAO-WFP की कड़ी चेतावनी

सारांश

अफगानिस्तान में इस सर्दी से पहले FAO और WFP की चेतावनी बेहद गंभीर है — 1.92 करोड़ लोग खाद्य संकट में, 50 लाख भुखमरी की कगार पर। जबरन वापसी, बंद सीमाएँ और फंडिंग की कमी मिलकर एक मानवीय तूफान खड़ा कर रहे हैं जिसके लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई ज़रूरी है।

मुख्य बातें

FAO और WFP ने 19 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि 1.92 करोड़ अफगान — आबादी का 38 प्रतिशत — इस सर्दी में गंभीर खाद्य असुरक्षा में होंगे।
लगभग 50 लाख लोग भुखमरी के आपातकालीन स्तर ( IPC चरण 4 ) में पहुँच सकते हैं — अप्रैल-सितंबर 2026 की तुलना में दोगुना।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र: बदख्शां, बादगीस, दायकुंडी, गोर, समांगन, सर-ए-पोल और ग्रामीण गजनी ।
कुपोषण के मामले 2026 से 10 प्रतिशत बढ़कर 40 लाख होने की आशंका, जिनमें एक चौथाई गंभीर और जानलेवा।
इस वर्ष ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी और फंडिंग की कमी संकट को बढ़ा रही है।
महिलाएँ और बच्चे सर्वाधिक असुरक्षित; रोकथाम एवं उपचार सेवाएँ पहले से पिछड़ रही हैं।

खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने 19 अक्टूबर 2026 को आगाह किया है कि इस सर्दी में अफगानिस्तान की लगभग 40 प्रतिशत आबादी — यानी करीब 1.92 करोड़ लोग — गंभीर खाद्य असुरक्षा के उच्च स्तर का सामना करेंगे। दोनों संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने नवीनतम एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) विश्लेषण का हवाला देते हुए यह चेतावनी जारी की है। यह आँकड़ा एक वर्ष पूर्व की इसी अवधि के अनुमानित 1.74 करोड़ से कहीं अधिक है।

संकट की गहराई और प्रभावित क्षेत्र

नवंबर 2026 से अप्रैल 2027 के सर्दी के मौसम में लगभग 50 लाख लोगों के भुखमरी के आपातकालीन स्तर (IPC चरण 4) में पहुँचने की आशंका है, जो अप्रैल-सितंबर 2026 के लिए अनुमानित संख्या से दोगुना है। सबसे विकट स्थिति बदख्शां, बादगीस, दायकुंडी, गोर, समांगन, सर-ए-पोल और ग्रामीण गजनी में रहने की संभावना जताई गई है।

एजेंसियों के अनुसार कुपोषण के मामले 2026 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 40 लाख तक पहुँच सकते हैं। इनमें से एक चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा श्रेणी के होंगे। रोकथाम एवं उपचार सेवाएँ पहले से ही पिछड़ रही हैं, जिससे महिलाएँ और बच्चे सर्वाधिक असुरक्षित हैं।

संकट के पीछे बहुआयामी कारण

यह स्थिति कई परस्पर जुड़े कारणों से उत्पन्न हो रही है। इस वर्ष ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी ने देश की पहले से कमज़ोर खाद्य आपूर्ति प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव डाला है। इसके अलावा सीमाओं का बंद होना और होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते शिपिंग में बाधा के कारण बुनियादी वस्तुओं की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।

गौरतलब है कि मानवीय सहायता के लिए आवश्यक वित्त पोषण में भारी कमी भी इस संकट को और गहरा कर रही है। एजेंसियों ने बताया कि अच्छी बारिश के चलते 2026 में फसल उत्पादन बढ़ा है, किंतु लगातार बेरोज़गारी के कारण ऐसे परिवार जो स्वयं खेती नहीं करते, वे पौष्टिक आहार खरीदने में सक्षम नहीं हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

अफगानिस्तान में FAO के प्रतिनिधि रिचर्ड ट्रेंचर्ड ने कहा, 'इस साल की अच्छी फसल दिखाती है कि अफगान किसान क्या हासिल कर सकते हैं। लेकिन जिस माता-पिता के पास स्थायी आय स्रोत नहीं है, उसके लिए बाजार में पौष्टिक भोजन अब भी उसके परिवार की पहुँच से बाहर हो सकता है। संकट और झटकों का सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन हम जानते हैं कि प्रगति संभव है।'

अफगानिस्तान में WFP के कंट्री डायरेक्टर जॉन आयलिफ ने कहा कि यह संकट अब जरूरतों और फंडिंग के बीच बढ़ते अंतर से परिभाषित हो रहा है। उन्होंने कहा, 'भूख और कुपोषण अफगानिस्तान के परिवारों पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रहे हैं और ज़्यादा लोगों को ऐसे मोड़ पर धकेल रहे हैं, जहाँ मदद के लिए संसाधन कम पड़ रहे हैं। हमारे पास अभी भी एक्शन लेने का समय है, लेकिन वक़्त तेज़ी से बीत रहा है।'

आम जनता पर असर

आयलिफ ने स्पष्ट किया कि यदि तत्काल मदद मिले तो परिवार सम्मान के साथ सर्दी का मौसम पार कर सकते हैं। किंतु यदि ऐसा न हुआ तो कई लोगों को ऐसे असंभव निर्णय लेने पड़ेंगे जो किसी भी माता-पिता के लिए अकल्पनीय हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता फंडिंग वैश्विक स्तर पर दबाव में है।

क्या होगा आगे

दोनों एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक्स समर्थन की अपील की है ताकि सर्दी की शुरुआत से पहले खाद्य वितरण सुनिश्चित किया जा सके। 2027 में कुपोषण के मामले और बढ़ने की आशंका को देखते हुए दीर्घकालिक कृषि आजीविका कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की भी सिफारिश की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तालिबान शासन में अंतरराष्ट्रीय सहायता में उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय निर्वासन नीतियों का यह संचित परिणाम है। FAO और WFP की यह चेतावनी उस विफलता को भी रेखांकित करती है जिसमें वैश्विक मानवीय फंडिंग ने उन देशों को प्राथमिकता देना बंद कर दिया जो सुर्खियों से गायब हो गए। ईरान और पाकिस्तान द्वारा 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी एक ऐसी नीतिगत पसंद थी जिसके मानवीय परिणामों की जवाबदेही कोई नहीं ले रहा। अच्छी फसल के बावजूद खाद्य असुरक्षा का बढ़ना यह भी बताता है कि भूख सिर्फ उत्पादन की समस्या नहीं, बल्कि आय और पहुँच की समस्या है — और इसका समाधान केवल राहत पैकेज से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आजीविका निवेश से निकलेगा।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफगानिस्तान में खाद्य संकट कितना गंभीर है?
FAO और WFP के नवीनतम IPC विश्लेषण के अनुसार इस सर्दी में 1.92 करोड़ अफगान — कुल आबादी का 38 प्रतिशत — गंभीर खाद्य असुरक्षा में होंगे। इनमें से लगभग 50 लाख लोग IPC चरण 4 यानी भुखमरी के आपातकालीन स्तर पर पहुँच सकते हैं।
अफगानिस्तान के खाद्य संकट के मुख्य कारण क्या हैं?
इस संकट के पीछे कई कारण हैं — ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी, सीमाओं का बंद होना, होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते शिपिंग में बाधा से बढ़ती कीमतें, लगातार बेरोज़गारी और मानवीय सहायता के लिए पर्याप्त फंड की कमी प्रमुख हैं।
सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र कौन-से हैं?
एजेंसियों के अनुसार सबसे खराब स्थिति बदख्शां, बादगीस, दायकुंडी, गोर, समांगन, सर-ए-पोल और ग्रामीण गजनी में रहने की संभावना है। इन क्षेत्रों में ढाँचागत कमज़ोरी और दूरदराज की स्थिति के कारण सहायता पहुँचाना भी कठिन है।
अफगानिस्तान में कुपोषण की स्थिति 2027 में कैसी रहेगी?
एजेंसियों का अनुमान है कि 2026 की तुलना में कुपोषण के मामले लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 40 लाख तक पहुँच सकते हैं। इनमें से एक चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा होंगे, और महिलाएँ व बच्चे सर्वाधिक प्रभावित रहेंगे।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से क्या अपील की गई है?
FAO और WFP ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक्स समर्थन की अपील की है ताकि सर्दी शुरू होने से पहले खाद्य वितरण सुनिश्चित हो सके। साथ ही दीर्घकालिक कृषि आजीविका कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की सिफारिश भी की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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