अफगानिस्तान में 1.92 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट की चपेट में, FAO-WFP की कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने 19 अक्टूबर 2026 को आगाह किया है कि इस सर्दी में अफगानिस्तान की लगभग 40 प्रतिशत आबादी — यानी करीब 1.92 करोड़ लोग — गंभीर खाद्य असुरक्षा के उच्च स्तर का सामना करेंगे। दोनों संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने नवीनतम एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) विश्लेषण का हवाला देते हुए यह चेतावनी जारी की है। यह आँकड़ा एक वर्ष पूर्व की इसी अवधि के अनुमानित 1.74 करोड़ से कहीं अधिक है।
संकट की गहराई और प्रभावित क्षेत्र
नवंबर 2026 से अप्रैल 2027 के सर्दी के मौसम में लगभग 50 लाख लोगों के भुखमरी के आपातकालीन स्तर (IPC चरण 4) में पहुँचने की आशंका है, जो अप्रैल-सितंबर 2026 के लिए अनुमानित संख्या से दोगुना है। सबसे विकट स्थिति बदख्शां, बादगीस, दायकुंडी, गोर, समांगन, सर-ए-पोल और ग्रामीण गजनी में रहने की संभावना जताई गई है।
एजेंसियों के अनुसार कुपोषण के मामले 2026 की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 40 लाख तक पहुँच सकते हैं। इनमें से एक चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा श्रेणी के होंगे। रोकथाम एवं उपचार सेवाएँ पहले से ही पिछड़ रही हैं, जिससे महिलाएँ और बच्चे सर्वाधिक असुरक्षित हैं।
संकट के पीछे बहुआयामी कारण
यह स्थिति कई परस्पर जुड़े कारणों से उत्पन्न हो रही है। इस वर्ष ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगानों की जबरन वापसी ने देश की पहले से कमज़ोर खाद्य आपूर्ति प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव डाला है। इसके अलावा सीमाओं का बंद होना और होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते शिपिंग में बाधा के कारण बुनियादी वस्तुओं की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।
गौरतलब है कि मानवीय सहायता के लिए आवश्यक वित्त पोषण में भारी कमी भी इस संकट को और गहरा कर रही है। एजेंसियों ने बताया कि अच्छी बारिश के चलते 2026 में फसल उत्पादन बढ़ा है, किंतु लगातार बेरोज़गारी के कारण ऐसे परिवार जो स्वयं खेती नहीं करते, वे पौष्टिक आहार खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
अफगानिस्तान में FAO के प्रतिनिधि रिचर्ड ट्रेंचर्ड ने कहा, 'इस साल की अच्छी फसल दिखाती है कि अफगान किसान क्या हासिल कर सकते हैं। लेकिन जिस माता-पिता के पास स्थायी आय स्रोत नहीं है, उसके लिए बाजार में पौष्टिक भोजन अब भी उसके परिवार की पहुँच से बाहर हो सकता है। संकट और झटकों का सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन हम जानते हैं कि प्रगति संभव है।'
अफगानिस्तान में WFP के कंट्री डायरेक्टर जॉन आयलिफ ने कहा कि यह संकट अब जरूरतों और फंडिंग के बीच बढ़ते अंतर से परिभाषित हो रहा है। उन्होंने कहा, 'भूख और कुपोषण अफगानिस्तान के परिवारों पर अपनी पकड़ मज़बूत कर रहे हैं और ज़्यादा लोगों को ऐसे मोड़ पर धकेल रहे हैं, जहाँ मदद के लिए संसाधन कम पड़ रहे हैं। हमारे पास अभी भी एक्शन लेने का समय है, लेकिन वक़्त तेज़ी से बीत रहा है।'
आम जनता पर असर
आयलिफ ने स्पष्ट किया कि यदि तत्काल मदद मिले तो परिवार सम्मान के साथ सर्दी का मौसम पार कर सकते हैं। किंतु यदि ऐसा न हुआ तो कई लोगों को ऐसे असंभव निर्णय लेने पड़ेंगे जो किसी भी माता-पिता के लिए अकल्पनीय हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता फंडिंग वैश्विक स्तर पर दबाव में है।
क्या होगा आगे
दोनों एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक्स समर्थन की अपील की है ताकि सर्दी की शुरुआत से पहले खाद्य वितरण सुनिश्चित किया जा सके। 2027 में कुपोषण के मामले और बढ़ने की आशंका को देखते हुए दीर्घकालिक कृषि आजीविका कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने की भी सिफारिश की गई है।