दक्षिणी अफगानिस्तान में कुपोषण संकट गहराया, 1.92 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा की चपेट में
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिणी अफगानिस्तान के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर गंभीर कुपोषण का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय (OCHA) ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को बताया कि वार्डों में अत्यधिक भीड़ हो गई है और बड़ी संख्या में गंभीर कुपोषित मरीज़ों को भर्ती किया जा रहा है। यह संकट ऐसे समय और गहरा हुआ है जब देश की 38 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 1.92 करोड़ लोग, नवंबर 2026 से अप्रैल 2027 के बीच गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने की आशंका है।
अस्पतालों में बढ़ती भीड़ और खाद्य संकट की तस्वीर
OCHA के अनुसार, दक्षिणी अफगानिस्तान के लोग एक साथ कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि मानवीय सहायता संगठनों के संसाधनों में लगातार कटौती हो रही है। इससे पहले अगस्त 2026 में संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने खुलासा किया था कि अफगानिस्तान में 37 लाख बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित हैं, जिनमें से करीब 10 लाख बच्चे गंभीर और जानलेवा कुपोषण की स्थिति में हैं। UNICEF के मुताबिक, दक्षिणी अफगानिस्तान के कई अस्पतालों में उपलब्ध प्रत्येक बिस्तर पर तीन से चार गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को रखा जा रहा था।
IPC विश्लेषण: भुखमरी के आपातकालीन स्तर की चेतावनी
खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) द्वारा अक्टूबर 2026 में जारी एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) के ताज़ा विश्लेषण के अनुसार, नवंबर 2026 से अप्रैल 2027 के बीच करीब 1.92 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में आ सकते हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि के लिए यह आँकड़ा 1.74 करोड़ था — यानी वर्ष-दर-वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि।
इनमें से करीब 50 लाख लोगों के भुखमरी के आपातकालीन स्तर (IPC फेज-4) तक पहुँचने की आशंका है, जो अप्रैल से सितंबर 2026 की अनुमानित संख्या से दोगुना है। सर्वाधिक संकट-ग्रस्त प्रांतों में बदख्शाँ, बदगीस, दायकुंडी, घोर, समांगन, सर-ए-पोल और ग्रामीण गज़नी के नाम शामिल हैं।
2027 में कुपोषण के मामलों में 10% वृद्धि की आशंका
FAO और WFP ने चेतावनी दी है कि 2026 की तुलना में 2027 में कुपोषण के मामलों में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है और इनकी कुल संख्या 40 लाख तक पहुँच सकती है। इनमें लगभग एक-चौथाई मामले गंभीर और जानलेवा कुपोषण के होंगे। रोकथाम और उपचार सेवाओं की कमी के कारण महिलाएँ और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका है।
संकट की जड़ें: विस्थापन, सीमाबंदी और फंडिंग की कमी
इस संकट के पीछे कई परस्पर जुड़े कारण बताए गए हैं। इस वर्ष ईरान और पाकिस्तान से 12 लाख से अधिक अफगान नागरिकों की जबरन वापसी ने सामाजिक बुनियादी ढाँचे पर भारी बोझ डाला है। इसके अलावा, सीमाएँ बंद होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जहाज़ों की आवाजाही बाधित होने से आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं। मानवीय सहायता के लिए धन की गंभीर कमी भी स्थिति को और विकट बना रही है।
गौरतलब है कि 2026 में अनुकूल वर्षा के कारण फसल उत्पादन में कुछ सुधार हुआ, परंतु लगातार बेरोज़गारी के चलते वे परिवार पौष्टिक भोजन खरीद पाने में असमर्थ हैं जो खुद खाद्यान्न का उत्पादन नहीं करते।
आगे की राह: तत्काल हस्तक्षेप की ज़रूरत
विशेषज्ञ संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने समय रहते मानवीय सहायता की आपूर्ति नहीं बढ़ाई, तो सर्दियों के महीनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। OCHA ने संसाधनों की कमी की बात दोहराते हुए तत्काल वित्तीय योगदान की अपील की है। आने वाले महीने अफगानिस्तान के सबसे संवेदनशील नागरिकों — बच्चों और महिलाओं — के लिए निर्णायक साबित होंगे।