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आईएमएफ रिपोर्ट: एआई से वैश्विक उत्पादकता 3.8% तक बढ़ सकती है, स्किल्ड वर्कर्स को सबसे ज़्यादा फायदा

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आईएमएफ रिपोर्ट: एआई से वैश्विक उत्पादकता 3.8% तक बढ़ सकती है, स्किल्ड वर्कर्स को सबसे ज़्यादा फायदा

सारांश

आईएमएफ की नई वर्किंग रिपोर्ट बताती है कि एआई दीर्घकाल में वैश्विक उत्पादकता 3.8% तक बढ़ा सकती है — लेकिन यह लाभ स्किल्ड कर्मचारियों वाले देशों को ज़्यादा मिलेगा। 2000-2017 के ओईसीडी पेटेंट डेटा पर आधारित यह शोध भारत जैसे बड़े आईटी सेक्टर वाले देशों के लिए खास अहमियत रखता है।

मुख्य बातें

आईएमएफ की वर्किंग रिपोर्ट के अनुसार एआई दीर्घकालिक रूप से वैश्विक श्रम उत्पादकता में 3.8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती है।
2000 से 2017 के बीच एआई पेटेंट गतिविधि से प्रति कर्मचारी उत्पादन में 0.8% से 1.2% की वृद्धि पहले ही दर्ज हो चुकी है।
2017 तक एआई-संबंधित पेटेंट की रफ़्तार तीन गुना से अधिक बढ़ी; कुल वैश्विक एआई पेटेंट का 89% ओईसीडी देशों के पास।
जिन देशों में प्रोफेशनल और मैनेजेरियल कर्मचारी अधिक हैं, वहाँ उत्पादकता लाभ भी अधिक — एआई 'रिप्लेसमेंट' से ज़्यादा 'सपोर्ट' के रूप में असरदार।
श्रम-बाज़ार का लचीलापन और एआई अपनाने की रफ़्तार यह तय करेगी कि उत्पादकता लाभ कब और कितना मिलेगा।
भारत का विशाल आईटी सेक्टर और स्किल्ड वर्कफोर्स इसे इस लाभ का बड़ा लाभार्थी बना सकते हैं, बशर्ते कौशल विकास और श्रम-गतिशीलता पर ध्यान दिया जाए।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक नई वर्किंग रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) दीर्घकालिक रूप से वैश्विक श्रम उत्पादकता में 3.8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती है। 26 सितंबर 2026 को वाशिंगटन से प्रकाशित इस रिपोर्ट में विकसित देशों के पेटेंट और रोज़गार डेटा का व्यापक विश्लेषण किया गया है। यह रिपोर्ट उस समय आई है जब दुनिया भर की सरकारें और उद्योग एआई के आर्थिक प्रभावों को समझने में जुटे हैं।

रिपोर्ट का आधार और कार्यप्रणाली

आईएमएफ ने इस वर्किंग पेपर को 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड एग्रीगेट लेबर प्रोडक्टिविटी: एविडेंस फ्रॉम पेटेंट डेटा' शीर्षक से प्रकाशित किया। शोधकर्ताओं ने ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) से जुड़े देशों के पेटेंट डेटा का उपयोग करते हुए 2000 से 2017 के बीच एआई के प्रभाव का अध्ययन किया। प्रोडक्शन-फंक्शन अप्रोच के ज़रिये यह जाँचा गया कि बढ़ती एआई पेटेंट गतिविधि का प्रति कर्मचारी उत्पादन पर क्या असर पड़ा।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2000 के बाद एआई तकनीक से जुड़े पेटेंट जारी होने की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी और 2017 तक यह तीन गुना से अधिक हो गई। उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में जारी कुल एआई-संबंधित पेटेंट में से लगभग 89 प्रतिशत अकेले ओईसीडी देशों के हिस्से में थे।

मुख्य निष्कर्ष: अभी और भविष्य में

अध्ययन में पाया गया कि एआई-आधारित नवाचार का असर पहले से दिखने लगा है। 2000 से 2017 के बीच एआई पेटेंट गतिविधि के कारण प्रति कर्मचारी उत्पादन में 0.8 प्रतिशत से 1.2 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का अनुमान है कि भविष्य में यह लाभ और बड़ा हो सकता है — दीर्घकालिक रूप से उत्पादकता में 3.8 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है, बशर्ते तकनीक का विकास और विभिन्न उद्योगों में इसका प्रसार तेज़ रहे।

गौरतलब है कि यह अनुमान लॉन्ग टर्म परिप्रेक्ष्य में है और इस बात पर निर्भर करेगा कि विभिन्न सेक्टर्स में एआई को कितनी तेज़ी से अपनाया जाता है।

किसे मिलेगा सबसे ज़्यादा फायदा

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि एआई का लाभ सभी देशों या सभी तरह की नौकरियों में एकसमान नहीं होगा। जिन देशों में प्रोफेशनल और मैनेजेरियल पदों पर काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या अधिक है, वहाँ उत्पादकता में ज़्यादा बढ़ोतरी देखी गई। इससे यह संकेत मिलता है कि एआई तब अधिक आर्थिक लाभ देता है जब वह कुशल कर्मचारियों के काम को सपोर्ट करता है, न कि केवल उनकी जगह लेता है।

रिपोर्ट के अनुसार, श्रम-बाज़ार में लचीलापन भी उत्पादकता वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगा। यदि कर्मचारी आसानी से उन नौकरियों और उद्योगों में स्थानांतरित हो सकें जहाँ एआई का सर्वश्रेष्ठ उपयोग हो, तो लाभ अधिक होगा।

बदलाव में लगेगा समय

रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि उत्पादकता का फायदा तत्काल नहीं दिखेगा। कर्मचारियों को नए सिस्टम सीखने और उन्हें अपने दैनिक कार्य में प्रभावी रूप से शामिल करने में समय लगेगा। इसलिए एआई को अपनाने की रफ़्तार ही यह तय करेगी कि उत्पादन में बढ़ोतरी कब और कितनी तेज़ी से होगी।

शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि देशों के बीच तकनीक के आदान-प्रदान को ध्यान में रखने के बाद भी उनके निष्कर्ष मज़बूत बने रहे — यानी जब एक देश में विकसित एआई तकनीक को दूसरे देश में अपनाया या परिवर्तित किया गया, तब भी उत्पादकता लाभ दिखा।

भारत के लिए क्या मायने रखता है यह शोध

भारत भी एआई, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक-आधारित आर्थिक विकास पर तेज़ी से ज़ोर दे रहा है। देश के विशाल आईटी सेक्टर और बड़ी संख्या में स्किल्ड वर्कर्स को देखते हुए, उत्पादकता, प्रशिक्षण और कार्यबल की गतिशीलता जैसे मुद्दे और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। यदि भारत एआई अपनाने की प्रक्रिया में श्रम-बाज़ार के लचीलेपन और कौशल विकास को प्राथमिकता दे, तो आईएमएफ के अनुमानित लाभ का एक बड़ा हिस्सा हासिल करना संभव हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी बारीक शर्त अक्सर सुर्खियों में दब जाती है — यह लाभ मुख्यतः उन देशों को मिलेगा जहाँ स्किल्ड और मैनेजेरियल कार्यबल पहले से मज़बूत है। भारत के लिए यह एक अवसर भी है और चेतावनी भी: आईटी क्षेत्र में ताकत होने के बावजूद, यदि कौशल विकास और श्रम-बाज़ार सुधार की रफ़्तार एआई प्रसार से पीछे रही, तो यह तकनीकी लाभांश मुट्ठी भर उद्योगों तक सिमट सकता है। रिपोर्ट यह भी याद दिलाती है कि 2000-2017 के दौर में हुए वास्तविक लाभ (0.8-1.2%) और भविष्य के अनुमान (3.8%) के बीच बड़ा फ़ासला है — जिसे पाटने के लिए केवल तकनीक नहीं, नीतिगत इच्छाशक्ति भी चाहिए।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएमएफ की एआई उत्पादकता रिपोर्ट क्या कहती है?
आईएमएफ की वर्किंग रिपोर्ट के अनुसार, एआई दीर्घकालिक रूप से वैश्विक श्रम उत्पादकता में 3.8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर सकती है। यह अनुमान ओईसीडी देशों के 2000 से 2017 के बीच के पेटेंट और रोज़गार डेटा के विश्लेषण पर आधारित है।
एआई से उत्पादकता में 3.8% की बढ़ोतरी कब तक होगी?
आईएमएफ रिपोर्ट के अनुसार यह 3.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) अनुमान है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि विभिन्न सेक्टर्स में एआई तकनीक का विकास और अपनाने की रफ़्तार कितनी तेज़ रहती है।
किन देशों या कर्मचारियों को एआई से सबसे ज़्यादा फायदा होगा?
रिपोर्ट के मुताबिक, जिन देशों में प्रोफेशनल और मैनेजेरियल पदों पर काम करने वाले कर्मचारी अधिक हैं, वहाँ उत्पादकता में ज़्यादा बढ़ोतरी देखी गई। एआई तब अधिक लाभदायक साबित होती है जब वह स्किल्ड कर्मचारियों के काम को सपोर्ट करती है, न कि केवल उनकी जगह लेती है।
भारत के लिए इस रिपोर्ट के क्या मायने हैं?
भारत के पास बड़ा आईटी सेक्टर और बड़ी संख्या में स्किल्ड वर्कर्स हैं, जो इसे एआई-आधारित उत्पादकता लाभ का संभावित बड़ा लाभार्थी बनाते हैं। हालाँकि, इसके लिए कौशल विकास, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और श्रम-बाज़ार के लचीलेपन पर ध्यान देना ज़रूरी होगा।
एआई से उत्पादकता लाभ तुरंत क्यों नहीं मिलेगा?
रिपोर्ट में कहा गया है कि कर्मचारियों को नए सिस्टम सीखने और उन्हें दैनिक कार्य में शामिल करने में समय लगता है। इसलिए एआई अपनाने की रफ़्तार और कंपनियों की तैयारी यह तय करेगी कि उत्पादकता में बढ़ोतरी कब दिखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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