5 नवंबर 2026
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एआई अगले 10 वर्षों में भारत की GDP में जोड़ सकता है $79 अरब: आयर थिंक टैंक रिपोर्ट

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एआई अगले 10 वर्षों में भारत की GDP में जोड़ सकता है $79 अरब: आयर थिंक टैंक रिपोर्ट

सारांश

एक नई रिपोर्ट के अनुसार भारत के 38.2 करोड़ युवा और सस्ती डिजिटल कनेक्टिविटी उसे एआई से $79 अरब कमाने की स्थिति में लाती है — लेकिन 86% असंगठित कार्यबल और दो-तिहाई युवाओं के पास ही मोबाइल फोन होना बताता है कि यह क्षमता स्वत: नहीं मिलेगी।

मुख्य बातें

आयर थिंक टैंक की रिपोर्ट के अनुसार एआई अगले 10 वर्षों में भारत की GDP में मध्यम परिदृश्य में $79.1 अरब जोड़ सकता है।
सतर्क अनुमान $39.6 अरब , आशावादी परिदृश्य में $118.7 अरब तक का योगदान संभव।
भारत 56 कॉमनवेल्थ देशों में एआई क्षमता के मामले में 11वें स्थान पर; आर्थिक लाभ में दूसरा सबसे बड़ा अवसर ।
भारत में 15–29 वर्ष आयु के 38.2 करोड़ युवा — कॉमनवेल्थ की कुल युवा आबादी का आधे से अधिक।
86% युवा कार्यबल असंगठित क्षेत्र में; 30% युवा रोज़गार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर।
PM मोदी ने अगस्त 2026 में 1 करोड़ युवाओं को एक वर्ष में एआई कौशल देने की घोषणा की थी; इंटेल इंडिया साझेदारी में प्रशिक्षण शुरू।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अगले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था में $79.1 अरब (मध्यम परिदृश्य) का अतिरिक्त योगदान दे सकता है — यह निष्कर्ष आयर थिंक टैंक की उस रिपोर्ट में सामने आया है जो 5 नवंबर 2026 को जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार, एआई क्षमता के मामले में भारत 56 कॉमनवेल्थ देशों में 11वें स्थान पर है और अपनी विशाल युवा आबादी के बल पर वैश्विक एआई परिदृश्य में एक निर्णायक भूमिका निभाने की स्थिति में है।

रिपोर्ट के प्रमुख आर्थिक अनुमान

आयर थिंक टैंक के विश्लेषण के तीन परिदृश्य हैं: सतर्क अनुमान के अनुसार $39.6 अरब, मध्यम परिदृश्य में $79.1 अरब और आशावादी स्थिति में $118.7 अरब का GDP योगदान संभव है। इन आँकड़ों के आधार पर भारत कॉमनवेल्थ देशों में एआई से मिलने वाले आर्थिक लाभ के मामले में दूसरा सबसे बड़ा अवसर बनकर उभरता है। यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर की सरकारें एआई को अपनी आर्थिक नीतियों के केंद्र में रख रही हैं।

युवा जनसांख्यिकी — भारत की सबसे बड़ी ताकत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के करीब 38.2 करोड़ युवा हैं, जो सभी 56 कॉमनवेल्थ देशों की कुल 73.2 करोड़ युवा आबादी के आधे से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह जनसांख्यिकीय बढ़त भारत को एआई-आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए एक असाधारण आधार प्रदान करती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि करीब 89 प्रतिशत भारतीय युवा अगले एक वर्ष के भीतर शिक्षा या रोज़गार से जुड़े कार्यों में एआई का उपयोग करना चाहते हैं। 60 प्रतिशत से अधिक युवाओं ने कहा कि उन्हें एआई-आधारित उपकरणों के साथ काम करने का आत्मविश्वास है।

डिजिटल बुनियादी ढाँचा और चुनौतियाँ

भारत के व्यापक 4जी नेटवर्क और दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल डेटा में से एक होने की स्थिति ने एआई अपनाने की संभावनाओं को और मज़बूत किया है। हालाँकि रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि अभी केवल करीब दो-तिहाई युवाओं के पास ही व्यक्तिगत मोबाइल फोन हैं — यह डिजिटल पहुँच की एक महत्वपूर्ण सीमा है।

श्रम बाज़ार की चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं। रिपोर्ट के आँकड़ों के अनुसार, करीब 30 प्रतिशत युवा रोज़गार, शिक्षा या प्रशिक्षण से पूरी तरह बाहर हैं, जबकि लगभग 86 प्रतिशत युवा कार्यबल असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। रिपोर्ट का मत है कि एआई-आधारित कौशल विकास कार्यक्रम इस खाई को पाटने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

सरकारी पहल और उद्योग साझेदारी

आयर थिंक टैंक के संस्थापक कैल्विन आयर ने कहा कि भारत पहले ही अपनी तकनीकी क्षमताओं को रोज़गार सृजन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि अगस्त 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वर्ष के भीतर एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल प्रदान करने की योजना की घोषणा की थी।

इसके बाद सरकार ने इंटेल इंडिया के सहयोग से नए एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए, जिनका उद्देश्य युवाओं को उभरते प्रौद्योगिकी-आधारित रोज़गार बाज़ार के लिए व्यावहारिक कौशल से लैस करना है। कैल्विन आयर के अनुसार, 'ये पहलें भारत में एआई के प्रति मौजूद उत्साह को रोज़गार, उद्यमिता और आर्थिक विकास में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।'

सरकारों के लिए पाँच प्रमुख सिफारिशें

रिपोर्ट ने एआई से अधिकतम लाभ के लिए पाँच प्राथमिकताएँ गिनाई हैं: तकनीक तक सस्ती पहुँच बढ़ाना, कौशल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना, प्रशिक्षण और रोज़गार के बीच बेहतर सेतु बनाना, स्थानीय भाषाओं और ज़रूरतों के अनुरूप एआई समाधान विकसित करना, तथा ऐसे सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना जिनसे नागरिक स्वचालित निर्णयों को चुनौती दे सकें। गौरतलब है कि ये सिफारिशें केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि समूचे कॉमनवेल्थ ब्लॉक के लिए हैं — फिर भी भारत के संदर्भ में इनकी प्रासंगिकता सर्वाधिक है।

आने वाले वर्षों में एआई प्रशिक्षण कार्यक्रमों के परिणाम और उनकी पहुँच यह तय करेगी कि भारत $79 अरब के मध्यम अनुमान तक पहुँच पाता है या $118.7 अरब के आशावादी लक्ष्य को भी पार कर जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे संदर्भ में देखना ज़रूरी है — भारत का 86% युवा कार्यबल असंगठित क्षेत्र में है, जहाँ एआई-कौशल की माँग और आपूर्ति दोनों अभी नगण्य हैं। मोदी सरकार की एक करोड़ युवाओं को एआई प्रशिक्षण देने की घोषणा महत्वाकांक्षी है, लेकिन बिना सत्यापन-योग्य रोज़गार परिणामों के यह भी पिछले कौशल विकास कार्यक्रमों की राह पर जा सकती है जो संख्या में बड़े थे, असर में सीमित। असली कसौटी यह होगी कि क्या ये कार्यक्रम केवल 'सर्टिफिकेट' देते हैं या वास्तव में युवाओं को बाज़ार में टिकाऊ रोज़गार दिलाते हैं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयर थिंक टैंक की रिपोर्ट में भारत की एआई क्षमता के बारे में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट के अनुसार एआई अगले 10 वर्षों में भारत की GDP में मध्यम परिदृश्य में $79.1 अरब जोड़ सकता है। भारत 56 कॉमनवेल्थ देशों में एआई क्षमता के मामले में 11वें और आर्थिक लाभ के मामले में दूसरे स्थान पर है।
भारत एआई क्षेत्र में इतने बड़े अवसर के लिए कैसे तैयार है?
भारत में 15–29 वर्ष आयु के 38.2 करोड़ युवा हैं — कॉमनवेल्थ की कुल युवा आबादी का आधे से अधिक। इसके अलावा देश में सस्ती 4जी कनेक्टिविटी और दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल डेटा में से एक है, जो एआई अपनाने की ज़मीन तैयार करता है।
भारत में एआई अपनाने की राह में कौन-सी बाधाएँ हैं?
रिपोर्ट के अनुसार अभी केवल दो-तिहाई युवाओं के पास ही व्यक्तिगत मोबाइल फोन है। इसके अलावा करीब 30% युवा रोज़गार, शिक्षा या प्रशिक्षण से पूरी तरह बाहर हैं और 86% युवा कार्यबल असंगठित क्षेत्र में काम करता है।
सरकार ने एआई कौशल विकास के लिए क्या कदम उठाए हैं?
PM मोदी ने अगस्त 2026 में एक वर्ष के भीतर 1 करोड़ युवाओं को एआई कौशल देने की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार ने इंटेल इंडिया के सहयोग से व्यावहारिक एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
एआई से अधिकतम लाभ के लिए रिपोर्ट ने सरकारों को क्या सुझाव दिए हैं?
रिपोर्ट ने पाँच प्राथमिकताएँ सुझाई हैं: तकनीक तक सस्ती पहुँच, कौशल-आधारित शिक्षा, प्रशिक्षण और रोज़गार के बीच बेहतर जुड़ाव, स्थानीय भाषाओं में एआई समाधान और स्वचालित निर्णयों को चुनौती देने के लिए सुरक्षा उपाय।
राष्ट्र प्रेस
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