होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंग से दो टैंकर और टगबोट में आग, ईरान का अमेरिकी ड्रोन पर भी दावा
सारांश
मुख्य बातें
इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने 5 नवंबर 2026 को दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में दो तेल टैंकरों और एक टगबोट में आग लग गई, जो कथित तौर पर अनधिकृत जलमार्ग से गुजरने के दौरान बारूदी सुरंगों से टकरा गए। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स न्यूज ने IRGC के हवाले से यह जानकारी प्रकाशित की।
मुख्य घटनाक्रम
IRGC के बयान के अनुसार, बुधवार रात होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी जलमार्ग से गुजरते समय एक बड़ा तेल टैंकर बारूदी सुरंग (माइन) से टकराया, जिससे उसमें आग भड़क उठी। इसके बाद जलमार्ग के पूर्वी हिस्से से निकलते समय एक सुपरटैंकर भी आग की चपेट में आ गया। आग बुझाने के लिए तैनात की गई एक टगबोट भी बाद में जलने लगी।
IRGC ने अपने बयान में अमेरिका पर आरोप लगाते हुए कहा कि जहाजों को बारूदी सुरंगों वाले खतरनाक रास्तों से जबरन ले जाने की जिद के कारण अमेरिकी करदाताओं और क्षेत्रीय सहयोगियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है, साथ ही बीमा लागत भी बढ़ रही है।
ड्रोन पर ईरान के दावे
IRGC की नौसैनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर यूनिट्स ने कथित तौर पर दावा किया कि उन्होंने ईरानी वायुक्षेत्र में प्रवेश करने वाले अमेरिका के दो 'लुकास' ड्रोन को अपने नियंत्रण में ले लिया। यह दावा ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले बुधवार को भी IRGC ने एक अमेरिकी ड्रोन को नष्ट करने की बात कही थी।
IRGC के जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार, केशम द्वीप के ऊपर एक अमेरिकी MQ-1 ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट किया गया। बयान में इसे ईरानी वायु रक्षा प्रणाली द्वारा मार गिराया गया 15वाँ विमान बताया गया। हालाँकि, बयान में घटना का सटीक समय और इस्तेमाल की गई मिसाइल के प्रकार का उल्लेख नहीं किया गया।
भू-राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अत्यंत संवेदनशील गलियारा है, जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल गुजरता है। यह ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका-ईरान तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है और समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएँ बढ़ी हुई हैं।
उल्लेखनीय है कि ईरान के इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है। अमेरिकी सेना या संबंधित शिपिंग कंपनियों की तरफ से इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आम जनता और बाजार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य में इस तरह की घटनाएँ वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और शिपिंग बीमा दरों पर सीधा असर डालती हैं। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है, इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर सतर्क रहेगा।
क्या होगा आगे
इस घटना की स्वतंत्र जाँच और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। समुद्री विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये दावे सत्य हैं तो होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक नौवहन के लिए जोखिम का स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।