जम्मू-कश्मीर अब अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं: अमेरिकी राजदूत गोर के बयान पर श्रृंगला का विश्लेषण
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद और पूर्व विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने 21 अगस्त 2026 को स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के हालिया श्रीनगर दौरे और उनके बयान — कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है — ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक निर्णायक संदेश दे दिया है। श्रृंगला के अनुसार, यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि जम्मू-कश्मीर अब कोई अंतरराष्ट्रीय विवादित मुद्दा नहीं रह गया है।
बयान क्यों है असाधारण
श्रृंगला ने इस टिप्पणी को दो कारणों से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'पहला कारण यह है कि अतीत में अमेरिका की ओर से इस तरह का कोई बयान नहीं आया है। अमेरिका के बयान अधिक संतुलित और सावधानीपूर्वक होते रहे हैं।' उनके मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा और भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच अमेरिका का परंपरागत रुख हमेशा सधा हुआ रहा है — इसलिए इतनी 'स्पष्ट और निर्णायक' टिप्पणी अपने आप में ऐतिहासिक है।
दूसरा कारण राजदूत गोर की विशिष्ट हैसियत है। श्रृंगला ने रेखांकित किया कि सर्जियो गोर केवल भारत में अमेरिका के राजदूत नहीं हैं, बल्कि वह दक्षिण और मध्य एशिया के लिए भी जिम्मेदार हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति के अत्यंत करीबी सहयोगी माने जाते हैं। इसलिए उनका बयान पूरे क्षेत्र के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
श्रीनगर दौरे का कूटनीतिक महत्व
श्रृंगला ने कहा कि राजदूत गोर का श्रीनगर जाना, मुख्यमंत्री से मुलाकात करना और उसके बाद यह बयान देना — यह पूरा घटनाक्रम मिलकर एक सुविचारित कूटनीतिक संकेत है। उन्होंने गोर को ऐसा व्यक्ति बताया जो 'बिना सोचे-समझे बयान नहीं देते' और जो 'चीजों को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखते हैं।' उनके अनुसार, पहले के कई करियर डिप्लोमैट्स की तुलना में गोर का नजरिया अधिक व्यापक और रणनीतिक है।
अनुच्छेद 370 के बाद से अमेरिकी रुख में बदलाव
श्रृंगला ने याद दिलाया कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के तुरंत बाद अमेरिकी राजदूत केन जस्टर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया था। उस समय श्रृंगला स्वयं अमेरिका में भारत के राजदूत थे। उन्होंने कहा कि उस दौरे ने अमेरिकी प्रशासन के रुख को स्पष्ट किया था, जबकि अमेरिकी कांग्रेस में इस मुद्दे पर कई सवाल उठ रहे थे। इससे पहले अमेरिकी राजदूत ब्लैकवेल की भारत यात्रा भी इस संदर्भ में उल्लेखनीय रही थी।
गौरतलब है कि 22 से 24 मई 2023 के बीच श्रीनगर में तीसरी जी20 पर्यटन कार्य समूह की बैठक आयोजित हुई थी, जिसे श्रृंगला ने 'गेम-चेंजर' करार दिया। उस समय वह जी20 के मुख्य समन्वयक थे। उनके अनुसार, इस बैठक ने जम्मू-कश्मीर में पर्यटन को जबरदस्त गति दी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र की छवि को बदला।
पीओके और क्षेत्रीय तुलना
श्रृंगला ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका सीमा के दोनों तरफ की स्थिति देख रहा है। उनके अनुसार, पीओके में 'आजादी और अधिकारों की कमी, आर्थिक विकास की लचर गति तथा वहां के लोगों की कठिनाइयाँ' स्पष्ट हैं। उन्होंने कहा कि पीओके में भी ऐसे लोग हैं जो भारत का हिस्सा बनने की इच्छा रखते हैं।
भारत की उपलब्धि और आगे की राह
श्रृंगला ने इसे भारत की कूटनीतिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि आज जम्मू-कश्मीर की स्थिति को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं रह गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक विकास और पर्यटन में वृद्धि के साथ, जम्मू-कश्मीर के लोग देश की मुख्यधारा में पूरी तरह एकीकृत हो चुके हैं। उनके अनुसार, राजदूत गोर का बयान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्वीकार करने का आह्वान है कि 'पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।' यह बयान भविष्य में भारत की कश्मीर नीति को और अधिक वैश्विक समर्थन दिला सकता है।