ट्रंप के 'पाइरेसी' बयान पर ईरान का पलटवार, UN से हस्तक्षेप की मांग
सारांश
Key Takeaways
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने 3 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की ईरानी जहाज जब्ती कार्रवाई को "पाइरेट्स जैसा" बताया था। बकाई ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन की "सीधी और गंभीर स्वीकारोक्ति" करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र और उसके सदस्य देशों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
ट्रंप का विवादित बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने एक ईरानी जहाज पर कब्जा कर उसका तेल और कार्गो अपने नियंत्रण में ले लिया। ट्रंप ने इस कार्रवाई को "बहुत लाभदायक कारोबार" बताया और स्वीकार किया कि अमेरिका "पाइरेट्स की तरह काम करता है।" यह बयान तेजी से अंतरराष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन गया।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
बकाई ने एक्स (X) प्लेटफॉर्म के जरिए कहा कि ट्रंप ने "खुले तौर पर ईरानी जहाजों की अवैध जब्ती को 'पाइरेसी' बताया और गर्व से इसे स्वीकार किया।" उन्होंने इसे कोई जुबानी चूक नहीं, बल्कि "अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सीधी स्वीकारोक्ति" बताया। ईरान पहले भी अमेरिकी कार्रवाइयों को "समुद्र में सशस्त्र लूट" और "पाइरेसी का वैधीकरण" करार दे चुका है।
UN और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
बकाई ने संयुक्त राष्ट्र, उसके सदस्य देशों और महासचिव से अपील की कि वे इस तरह के "खुलेआम अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को सामान्य बनाने" के किसी भी प्रयास को सख्ती से खारिज करें। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून, मुक्त व्यापार और समुद्री सुरक्षा के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान के बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया, जबकि अमेरिका ने जवाब में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी लागू कराने के लिए कई जहाजों को पुनर्निर्देशित किया गया है।
आगे क्या होगा
अमेरिकी रक्षा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है। ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी समाप्त नहीं करता, वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा। गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है, जिससे यह गतिरोध वैश्विक ऊर्जा बाजारों को सीधे प्रभावित कर सकता है।