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ट्रंप के 'पाइरेसी' बयान पर ईरान का पलटवार, UN से हस्तक्षेप की मांग

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ट्रंप के 'पाइरेसी' बयान पर ईरान का पलटवार, UN से हस्तक्षेप की मांग

सारांश

ट्रंप ने फ्लोरिडा रैली में खुद स्वीकार किया कि अमेरिका 'पाइरेट्स की तरह काम करता है' — और इसी बयान ने नया कूटनीतिक तूफान खड़ा कर दिया। ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन की सीधी स्वीकारोक्ति बताते हुए UN से हस्तक्षेप माँगा है, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर गतिरोध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा बन रहा है।

मुख्य बातें

डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा रैली में अमेरिकी नौसेना की ईरानी जहाज जब्ती को "पाइरेट्स जैसा काम" बताया और इसे "बहुत लाभदायक कारोबार" कहा।
ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून उल्लंघन की "सीधी और गंभीर स्वीकारोक्ति" करार दिया।
बकाई ने संयुक्त राष्ट्र और महासचिव से इस "खुलेआम कानून उल्लंघन" को सामान्य बनाने के प्रयासों को खारिज करने की अपील की।
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा किया; अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया।
ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी है, वह होर्मुज पर अपनी पकड़ नहीं छोड़ेगा।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने 3 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की ईरानी जहाज जब्ती कार्रवाई को "पाइरेट्स जैसा" बताया था। बकाई ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के उल्लंघन की "सीधी और गंभीर स्वीकारोक्ति" करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र और उसके सदस्य देशों से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

ट्रंप का विवादित बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका ने एक ईरानी जहाज पर कब्जा कर उसका तेल और कार्गो अपने नियंत्रण में ले लिया। ट्रंप ने इस कार्रवाई को "बहुत लाभदायक कारोबार" बताया और स्वीकार किया कि अमेरिका "पाइरेट्स की तरह काम करता है।" यह बयान तेजी से अंतरराष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन गया।

ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

बकाई ने एक्स (X) प्लेटफॉर्म के जरिए कहा कि ट्रंप ने "खुले तौर पर ईरानी जहाजों की अवैध जब्ती को 'पाइरेसी' बताया और गर्व से इसे स्वीकार किया।" उन्होंने इसे कोई जुबानी चूक नहीं, बल्कि "अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की सीधी स्वीकारोक्ति" बताया। ईरान पहले भी अमेरिकी कार्रवाइयों को "समुद्र में सशस्त्र लूट" और "पाइरेसी का वैधीकरण" करार दे चुका है।

UN और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील

बकाई ने संयुक्त राष्ट्र, उसके सदस्य देशों और महासचिव से अपील की कि वे इस तरह के "खुलेआम अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन को सामान्य बनाने" के किसी भी प्रयास को सख्ती से खारिज करें। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून, मुक्त व्यापार और समुद्री सुरक्षा के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता तनाव

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव चरम पर है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान के बाद ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया, जबकि अमेरिका ने जवाब में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, नाकेबंदी लागू कराने के लिए कई जहाजों को पुनर्निर्देशित किया गया है।

आगे क्या होगा

अमेरिकी रक्षा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर लागू होगी, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है। ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकेबंदी समाप्त नहीं करता, वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा। गौरतलब है कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से गुजरता है, जिससे यह गतिरोध वैश्विक ऊर्जा बाजारों को सीधे प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे वह व्यंग्य में हो या गर्व में, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर निहितार्थ रखता है। ईरान ने इस बयान को रणनीतिक रूप से भुनाया है — UN में अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए। असली सवाल यह है कि होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, पर यह गतिरोध कितने समय तक टिकेगा और इसकी कीमत कौन चुकाएगा — अमेरिका, ईरान, या वे देश जो इस जलमार्ग पर निर्भर हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने ईरानी जहाजों की जब्ती को 'पाइरेसी' क्यों कहा?
ट्रंप ने फ्लोरिडा की एक रैली में अमेरिकी नौसेना की ईरानी जहाज जब्ती का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका 'पाइरेट्स की तरह काम करता है' और इसे 'बहुत लाभदायक कारोबार' बताया। यह बयान कूटनीतिक विवाद का केंद्र बन गया क्योंकि ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून उल्लंघन की खुली स्वीकारोक्ति माना।
ईरान ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
ईरान के विदेश मंत्रालय प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने ट्रंप के बयान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ 'आपराधिक कार्रवाई की सीधी और गंभीर स्वीकारोक्ति' बताया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और उसके सदस्य देशों से इस 'खुलेआम कानून उल्लंघन' को सामान्य बनाने के किसी भी प्रयास को खारिज करने की अपील की।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव कैसे बढ़ा?
28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के सैन्य अभियान के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया। जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का ऐलान किया और अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कई जहाजों को पुनर्निर्देशित किया।
इस गतिरोध का वैश्विक तेल बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने कहा है कि जब तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी है, वह इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र इस मामले में क्या भूमिका निभा सकता है?
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र और उसके महासचिव से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के इस कथित उल्लंघन पर हस्तक्षेप करें। हालांकि, अमेरिका के सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार को देखते हुए UN की व्यावहारिक भूमिका सीमित मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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