जलवायु परिवर्तन से 2035 तक ऑस्ट्रेलिया में बेघरों की संख्या चार गुना बढ़ने का खतरा: सिडनी विश्वविद्यालय अध्ययन
सारांश
मुख्य बातें
यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के एक नए शोध के अनुसार, यदि उच्च-उत्सर्जन (हाई-एमिशन) की स्थिति बनी रही, तो 2035 तक ऑस्ट्रेलिया में बेघर लोगों की संख्या चार गुना तक बढ़ सकती है। 17 मई को जारी इस अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन और आवास की बढ़ती महंगाई के बीच गहरे और जटिल संबंध को रेखांकित किया है, जो नीति-निर्माताओं के लिए एक गंभीर चेतावनी है।
मुख्य निष्कर्ष
शोध में पाया गया कि उच्च-उत्सर्जन परिदृश्य में घर खरीदना दोगुना महंगा हो सकता है, जबकि किराए में 45 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। यह आँकड़े उन लाखों परिवारों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक हैं जो पहले से ही आवास के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अपेक्षाकृत बेहतर, यानी कम-उत्सर्जन वाले परिदृश्य में भी, 2020 के स्तर की तुलना में बेघरों की संख्या दोगुनी हो सकती है और किराया चुकाने की क्षमता में 23 प्रतिशत तक गिरावट आने की आशंका है।
जलवायु दबाव और आवास संकट का संबंध
शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न दबाव — जैसे बीमा लागत में वृद्धि, निर्माण सामग्री की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएँ, और निवेश व्यवहार में बदलाव — मिलकर पूरे देश में आवास संकट को और गहरा करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया पहले से ही एक गंभीर आवास-अफोर्डेबिलिटी संकट का सामना कर रहा है।
अध्ययन में यह भी चेताया गया कि यदि नीतियाँ केवल बीमा प्रीमियम या मॉर्गेज दरों पर केंद्रित रहीं, तो आर्थिक बोझ किराएदारों पर स्थानांतरित हो जाएगा और असमानता और बढ़ेगी।
शोध की पद्धति
शोधकर्ताओं ने लगभग दो दशकों के राष्ट्रीय आवास, आय और जनसांख्यिकीय आँकड़ों का उपयोग करते हुए एक विस्तृत मॉडल तैयार किया। इस मॉडल के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया कि जलवायु झटके और नीतियाँ मिलकर किस प्रकार आवास की वहन-क्षमता, बेघरपन और किराए के दबाव को आकार देते हैं। यह अध्ययन सिटीज नामक अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
विशेषज्ञ की राय
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता पेमान हबीबी-मोशफेघ ने कहा, 'नई आवास नीतियों को लागू करने से पहले उन पर जलवायु परिवर्तन आधारित सिमुलेशन किए जाने चाहिए ताकि वे असमानता को और न बढ़ाएँ।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'नई आवास नीतियाँ और योजनाएँ बनाते समय भविष्य के जलवायु झटकों को ध्यान में रखना बेहद ज़रूरी है।'
आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन को आवास संकट से जोड़ा हो, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के संदर्भ में इतने विस्तृत मॉडलिंग के साथ यह निष्कर्ष नीति-निर्माताओं पर दबाव बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु-अनुकूल आवास नीतियाँ बनाने में देरी भविष्य में सामाजिक और आर्थिक लागत को कई गुना बढ़ा सकती है।