बांग्लादेश में डेंगू से 2026 में 9 मौतें, 24 घंटे में 220 नए मरीज़ भर्ती
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में डेंगू बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा। 21 जून 2026 को रविवार सुबह तक के आँकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में दो और मरीज़ों की डेंगू से मौत हो गई, जिससे इस वर्ष कुल मृतक संख्या 9 हो गई है। बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) ने पुष्टि की है कि ये नई मौतें बरिशाल डिवीजन और ढाका साउथ सिटी कॉरपोरेशन (डीएससीसी) क्षेत्र में दर्ज की गई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसी अवधि में 220 नए मरीज़ों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इसके साथ ही वर्ष 2026 में अब तक डेंगू संक्रमण के कुल मामलों की संख्या 4,900 तक पहुँच गई है। डीजीएचएस के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दर्ज मरीज़ों में लगभग 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिलाएँ हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वर्ष 2025 में बांग्लादेश में डेंगू के 1,02,861 मामले सामने आए थे और 413 लोगों की इस बीमारी से जान गई थी — जो देश के हालिया इतिहास में सबसे गंभीर प्रकोपों में से एक था।
टीकाकरण पर सरकार का रुख
बढ़ते मामलों के बीच बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्री सरदार सखावत हुसैन ने 2 जून 2026 को स्पष्ट किया था कि फिलहाल देश में डेंगू टीकाकरण कार्यक्रम शुरू नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन अभी केवल ब्राज़ील, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड जैसे सीमित देशों में ही उपयोग की जा रही है और इसे वैश्विक स्तर पर व्यापक स्वीकृति नहीं मिली है।
मंत्री ने बताया कि सरकार इस विषय पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ से परामर्श करेगी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सकारात्मक राय और वैक्सीन की सुरक्षा व प्रभावशीलता की पुष्टि के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
डेंगू: बीमारी की प्रकृति और लक्षण
डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके सामान्य लक्षणों में तेज़ बुखार, तीव्र सिरदर्द, शरीर में दर्द, मतली और त्वचा पर चकत्ते शामिल हैं। अधिकांश मरीज़ एक से दो सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती आवश्यक हो सकती है। समय पर उपचार न मिलने पर यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि बांग्लादेश में मानसून के मौसम में डेंगू के मामले तेज़ी से बढ़ते हैं, क्योंकि जलजमाव एडीज मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है। ढाका जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करना और जागरूकता अभियान ही फिलहाल सबसे प्रभावी निवारक उपाय हैं।
क्या होगा आगे
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, टीकाकरण पर कोई भी निर्णय WHO और यूनिसेफ की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा। तब तक सरकार मच्छर नियंत्रण और अस्पताल क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। यदि मामले इसी दर से बढ़ते रहे, तो वर्ष 2026 में डेंगू का प्रकोप 2025 से भी गंभीर रूप ले सकता है।