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क्या बांग्लादेश में बिजली संयंत्रों ने किसान-मछुआरों की आजीविका छिनी?

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क्या बांग्लादेश में बिजली संयंत्रों ने किसान-मछुआरों की आजीविका छिनी?

सारांश

बांग्लादेश में कोयला और गैस आधारित बिजली संयंत्रों के कारण स्थानीय किसान और मछुआरा समुदाय संकट में हैं। क्या यह स्थिति सुधार सकती है? जानिए इस विषय पर विस्तार से।

मुख्य बातें

बिजली संयंत्रों के कारण किसानों को अपनी जमीन खोनी पड़ी है।
स्थानीय मछुआरे समुदाय भी संकट में हैं।
महंगी बिजली दरें उपभोक्ताओं पर बोझ डाल रही हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश से 62 गीगावाट ऊर्जा क्षमता का विकास संभव है।
स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा आवश्यक है।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी मतरबारी क्षेत्र में कोयला और गैस आधारित बिजली संयंत्रों के कारण स्थानीय किसान और मछुआरा समुदाय गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। टोक्यो की एक गैलरी में बांग्लादेशी फोटोग्राफर नूर आलम की हालिया फोटो प्रदर्शनी ने इन समुदायों के दर्द और संघर्ष को दुनिया के सामने उजागर किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, बड़े बिजली संयंत्रों की स्थापना के चलते कई किसानों को अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल होना पड़ा है। जहां पहले खेती और मछली पकड़ना उनकी आजीविका का मुख्य साधन था, वहीं अब वे भीड़भाड़ वाली बस्तियों में रहने को मजबूर हैं। इन इलाकों में बच्चों के लिए खेलने तक की पर्याप्त जगह और बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

रिपोर्ट में पान के पत्ते और नमक की खेती करने वाले हजारों किसानों तथा मछुआरों की हृदयविदारक कहानियां सामने आई हैं, जिन्हें बिजली प्राधिकरणों द्वारा कथित तौर पर बिना समुचित मुआवजा दिए जबरन उनकी जमीन और आजीविका से वंचित कर दिया गया। आज उनकी स्थिति यह है कि उनके पास न तो जमीन बची है और न ही रोजगार के ठोस विकल्प।

इस बीच, बांग्लादेश के उपभोक्ता पहले से ही महंगी बिजली दरों का बोझ झेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि देश आयातित महंगे एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) पर निर्भरता बढ़ाता है, तो बिजली और भी महंगी हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चटगांव (चट्टोग्राम) डिवीजन में एक बड़े कोयला आधारित बिजली संयंत्र को रोकने में सफलता के बावजूद, अब विदेशी हितों के दबाव में स्थानीय लोगों को प्रदूषण फैलाने वाले विशाल एलएनजी बिजली संयंत्रों और उनसे जुड़ी अवसंरचना को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह जानकारी ‘द डिप्लोमैट’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के हवाले से दी गई है।

मार्केट फोर्सेस की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, नए एलएनजी बिजली परियोजनाओं और आयात टर्मिनलों पर लगभग 50 अरब डॉलर का निवेश प्रस्तावित है। इससे न केवल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ेगा, बल्कि जहरीले प्रदूषण और बाढ़ व चक्रवात जैसी जलवायु आपदाओं के बढ़ते खतरे के कारण लाखों लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जब बांग्लादेश भीषण गर्मी की लहरों का सामना कर रहा है और बिजली की मांग बढ़ रही है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि यदि गैस आधारित बिजली संयंत्रों पर प्रस्तावित 36 अरब डॉलर की राशि को नवीकरणीय ऊर्जा में लगाया जाए, तो बांग्लादेश 62 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता विकसित कर सकता है, जो देश की मौजूदा कुल बिजली उत्पादन क्षमता से दोगुनी से भी अधिक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्थिति न केवल बांग्लादेश के किसानों और मछुआरों के लिए चिंताजनक है, बल्कि यह पूरे देश की ऊर्जा नीति और विकास पर भी सवाल उठाती है। हमें स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में बिजली संयंत्रों से किसानों को क्या नुकसान हुआ है?
बिजली संयंत्रों के कारण कई किसान अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल हो गए हैं और उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है।
क्या इन किसानों को उचित मुआवजा मिला है?
रिपोर्ट के अनुसार, बिजली प्राधिकरणों ने कई किसानों को बिना समुचित मुआवजा दिए उनकी जमीन से वंचित कर दिया।
बांग्लादेश में बिजली की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
आयातित महंगे एलएनजी पर निर्भरता बढ़ने से बिजली की कीमतें और भी महंगी हो सकती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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