भारत और ऑस्ट्रिया के मध्य महत्वपूर्ण सहयोग: खाद्य सुरक्षा और रक्षा क्षेत्रों में नई डील्स
सारांश
Key Takeaways
- भारत और ऑस्ट्रिया के बीच नई डील्स पर हस्ताक्षर।
- खाद्य सुरक्षा और रक्षा सहयोग में बढ़ावा।
- ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन पर समझौता।
- सैन्य मामलों में सहयोग का संस्थागत ढांचा।
- काउंटर टेररिज्म के लिए संयुक्त कार्य समूह का गठन।
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ऑस्ट्रिया के फेडरल चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक द्विपक्षीय बैठक का आयोजन किया। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण डील्स पर हस्ताक्षर किए गए। चांसलर स्टॉकर ने भारत में उनकी शानदार मेहमाननवाजी के लिए पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस वार्ता के निष्कर्षों की जानकारी साझा की है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और ऑस्ट्रिया के बीच ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन पर एक समझौता हुआ है। इसका मतलब यह है कि यह दोनों देशों की फिल्म इंडस्ट्रीज के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा, संयुक्त फिल्म प्रोडक्शन को आसान बनाएगा, क्रिएटिव और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा, भारतीय कलाकारों को वैश्विक अवसर प्रदान करेगा, और भारतीय सिनेमा तथा भारतीय सॉफ्ट पावर की पहुंच को बढ़ाएगा।
इसके अलावा, भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए फास्ट ट्रैक मैकेनिज्म पर सहमति बनी है। इसका अर्थ है कि कंपनियों और निवेशकों को आने वाली समस्याओं की पहचान और समाधान में सहायता प्रदान करना, ऑस्ट्रियाई बाजार तक भारतीय कंपनियों की पहुंच को सुधारना और व्यापार को सरल बनाना।
दोनों देशों के बीच सैन्य मामलों में सहयोग पर भी चर्चा की गई, जिसके तहत सैन्य सहयोग के लिए एक संस्थानिक ढांचा तैयार किया जाएगा। इससे डिफेंस इंडस्ट्रियल और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलेगा, डिफेंस नीति पर बातचीत को सुगम बनाएगा, और भारतीय रक्षा क्षेत्र को सशक्त करेगा।
काउंटर टेररिज्म के लिए एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया जाएगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने, काउंटर-टेररिज्म सहयोग, सूचना साझा करने और क्षमता निर्माण में योगदान देगा।
इसके अलावा, एजीईएस, ऑस्ट्रिया और एफएसएसएआई, भारत के बीच खाद्य सुरक्षा पर एक समझौता हुआ है, जो खाद्य सुरक्षा मानकों और वैज्ञानिक आदान-प्रदान में सहयोग को बढ़ावा देगा। यह खाद्य विनियमन और जोखिम मूल्यांकन में क्षमता निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, यह कृषि और खाद्य उत्पादों के व्यापार को भी बढ़ावा देगा।