नेपाल के एकमात्र अरबपति बिनोद चौधरी नेपाली कांग्रेस के उपाध्यक्ष निर्वाचित, 1,745 वोट से जीत
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के एकमात्र अरबपति बिनोद चौधरी ने 12 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन में वे पार्टी के उपाध्यक्षों में से एक चुने गए, जिससे देश के सबसे धनी व्यक्ति का राजनीतिक कद और ऊँचा हो गया है। नेपाली कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, चौधरी को समावेशी कोटे के अंतर्गत 1,745 वोट प्राप्त हुए।
चुनाव परिणाम और प्रतिस्पर्धा
इस पद के लिए हुए चुनाव में चौधरी के निकटतम प्रतिद्वंद्वी जीवन परियार को 1,658 वोट मिले। 87 मतों के अंतर से हासिल यह जीत दर्शाती है कि पार्टी प्रतिनिधियों के बीच मतदान तीखा रहा। उपाध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद चौधरी ने महाधिवेशन के उन सभी प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उन पर भरोसा जताया।
बिनोद चौधरी: व्यापार से राजनीति तक का सफर
फोर्ब्स पत्रिका की अरबपतियों की सूची में शामिल एकमात्र नेपाली नागरिक बिनोद चौधरी की 2026 में कुल संपत्ति 2.1 अरब डॉलर आँकी गई है। 2017 में यह आँकड़ा 1.3 अरब डॉलर था। हालाँकि 2020 और 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी सम्पत्ति में कुछ गिरावट आई थी, परंतु उसके बाद उनके कारोबार ने उल्लेखनीय वापसी की।
फोर्ब्स के अनुसार, चौधरी के व्यावसायिक साम्राज्य में एक लोकप्रिय नूडल्स ब्रांड कंपनी, दुनियाभर में हॉस्पिटैलिटी कारोबार, नेपाल में एक बैंक और भारत की ताज होटल शृंखला से जुड़े कई लक्जरी होटल शामिल हैं। 70 वर्षीय चौधरी इससे पहले नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री फेडरेशन और नेपाल उद्योग परिसंघ जैसी दो प्रमुख निजी क्षेत्र की संस्थाओं का नेतृत्व भी कर चुके हैं।
राजनीतिक करियर का घटनाक्रम
चौधरी का राजनीतिक सफर 2008 में शुरू हुआ था, जब वे नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी सीपीएन-यूएमएल की आनुपातिक-प्रतिनिधित्व सूची के माध्यम से संविधान सभा के सदस्य बने। 2017 में वे औपचारिक रूप से नेपाली कांग्रेस में शामिल हो गए और आनुपातिक कोटे के अंतर्गत सांसद बने।
2021 में नेपाली कांग्रेस के 14वें महाधिवेशन में वे मधेशी कोटे के तहत 2,206 वोट प्राप्त कर केंद्रीय समिति के सदस्य चुने गए। 2022 के संसदीय चुनाव में वे नवलपरासी पश्चिम जिले के निर्वाचन क्षेत्र नंबर 1 से नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए।
हार के बाद भी पार्टी में मजबूत स्थिति
गौरतलब है कि इस वर्ष 5 मार्च को हुए संसदीय चुनाव में चौधरी उसी निर्वाचन क्षेत्र से राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के उम्मीदवार बिक्रम खनाल से हार गए। आरएसपी ने इस चुनाव में संसद के निचले सदन में लगभग दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। यह जेन-जी आंदोलन के बाद आई राजनीतिक लहर का हिस्सा रही, जिसने नेपाल की पारंपरिक पार्टियों को कड़ी चुनौती दी।
संसदीय चुनाव में हार के बावजूद चौधरी ने पार्टी संगठन में सक्रिय भागीदारी जारी रखी और 15वें महाधिवेशन में उपाध्यक्ष पद जीतकर यह संदेश दिया कि कारोबारी जगत की हस्तियाँ पार्टी की आंतरिक राजनीति में भी प्रभावी भूमिका निभा सकती हैं। चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि वे नेपाली कांग्रेस को देश के आर्थिक परिवर्तन का नेतृत्व करने में सक्षम पार्टी के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से यह पद ग्रहण करना चाहते हैं।
आगे की राह
नेपाली कांग्रेस, जिसे नेपाल के लोकतांत्रिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का व्यापक श्रेय दिया जाता है, अब एक प्रमुख कारोबारी व्यक्तित्व के उपाध्यक्ष बनने के साथ पार्टी की आर्थिक नीति-निर्माण में नई दिशा की ओर बढ़ सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों की नज़र इस बात पर होगी कि चौधरी पार्टी की आर्थिक नीतियों को किस रूप में प्रभावित करते हैं और क्या वे भविष्य के किसी चुनाव में पुनः मैदान में उतरते हैं।