14 सितंबर 2026
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कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट 2026: PM मार्क कार्नी बोले — 'हम अपने भविष्य की कमान खुद संभाल रहे हैं'

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कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट 2026: PM मार्क कार्नी बोले — 'हम अपने भविष्य की कमान खुद संभाल रहे हैं'

सारांश

अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच कनाडा के PM मार्क कार्नी ने टोरंटो में इन्वेस्टमेंट समिट से पहले उद्योग जगत को एकजुट करने की कोशिश की। अगले पाँच वर्षों में एक ट्रिलियन कनाडाई डॉलर का निवेश लक्ष्य और 'डील बुक' — यह कनाडा की अमेरिकी निर्भरता से मुक्ति की सबसे बड़ी रणनीतिक कोशिश है।

मुख्य बातें

PM मार्क कार्नी ने 14 सितंबर 2026 को टोरंटो में कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट से पहले उद्योग नेताओं को संबोधित किया।
समिट का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में एक ट्रिलियन कनाडाई डॉलर (लगभग 720 अरब अमेरिकी डॉलर ) का निवेश आकर्षित करना है।
समिट में ऊर्जा , महत्वपूर्ण खनिज , उन्नत तकनीक और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी 'डील बुक' पेश की जाएगी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई उत्पादों पर आयात प्रतिबंध का आदेश दिया; प्रतिबंध 29 सितंबर से लागू होंगे।
पहले से आयातित कनाडाई सामान पर 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहेगा; करीब 20 अरब डॉलर का व्यापार पहले से प्रभावित।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 14 सितंबर 2026 को टोरंटो में आयोजित कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट की पूर्वसंध्या पर देश के उद्योग जगत के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कनाडा अब अपनी अर्थव्यवस्था और भविष्य की दिशा की कमान स्वयं संभाल रहा है। यह संबोधन ऐसे समय आया जब अमेरिका-कनाडा व्यापारिक तनाव चरम पर है और कनाडा अपनी आर्थिक निर्भरता को विविधता देने की कोशिश में जुटा है।

मुख्य संबोधन: कार्नी का संदेश

रविवार शाम उद्योग प्रतिनिधियों से मुखातिब होते हुए कार्नी ने कहा, 'हम और ज़्यादा निर्माण करेंगे, आपस में ज़्यादा व्यापार करेंगे, दुनिया के साथ भी ज़्यादा व्यापार करेंगे और अपने देश में टिकाऊ समृद्धि पैदा करेंगे।' उन्होंने एकता को ताकत बताते हुए विविधता को कनाडा की पहचान करार दिया।

कार्नी ने आगे कहा, 'हम कनाडा के लिए एक नए दौर को आकार दे रहे हैं। कनाडा की सबसे बड़ी सोच यह है कि एकता ज़रूरी है, लेकिन सबका एक जैसा होना ज़रूरी नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया को जिन संसाधनों की ज़रूरत है — ऊर्जा, खनिज, प्रतिभा, तकनीक और पूंजी — वे सब कनाडा के पास मौजूद हैं, लेकिन सबसे बड़ी ताकत 'भरोसा' है, जो किसी बैलेंस शीट में नहीं दिखती।

समिट का लक्ष्य और 'डील बुक'

कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट 14 और 15 सितंबर 2026 को टोरंटो में आयोजित हो रही है। यह सम्मेलन बड़े वैश्विक निवेश आकर्षित करने की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल है।

रिपोर्टों के अनुसार, इस समिट का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में लगभग एक ट्रिलियन कनाडाई डॉलर (करीब 720 अरब अमेरिकी डॉलर) का निवेश आकर्षित करना है। इस मंच पर कनाडा की 'डील बुक' पेश की जाएगी, जिसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उन्नत तकनीक और बड़े बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं से जुड़े प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल होंगे।

इसका उद्देश्य दुनिया भर के निवेशकों को कनाडा की बड़ी परियोजनाओं से जोड़ना है ताकि देश की सप्लाई चेन मज़बूत हो, उत्पादकता बढ़े और अमेरिका पर आर्थिक निर्भरता कम की जा सके।

अमेरिकी व्यापार तनाव की पृष्ठभूमि

इस समिट का आयोजन ऐसे नाज़ुक दौर में हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में कनाडा से आने वाले कई उत्पादों — जैसे शराब, डेयरी उत्पाद और मोटरसाइकिलें — के आयात पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया। व्हाइट हाउस की घोषणाओं के अनुसार, ये आयात प्रतिबंध 29 सितंबर को पूर्वी समयानुसार रात 12:01 बजे से लागू होंगे।

हालाँकि, उस तारीख से पहले कनाडा से आयातित लेकिन अभी तक उपभोग के लिए मंज़ूरी न पाने वाले सामानों पर पहले से लागू 50 प्रतिशत शुल्क (टैरिफ) जारी रहेगा।

अमेरिकी प्रशासन का रुख़

अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि इन कदमों का उद्देश्य कनाडा के जवाबी उपायों का मुकाबला करना, अमेरिकी उत्पादन की रक्षा करना और व्यापार में 'समान अवसर' सुनिश्चित करना है।

अधिकारी के अनुसार, इन प्रतिबंधों का असर कनाडा के अरबों डॉलर के व्यापारिक सामान पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा टैरिफ सूची में बदलाव से उन लगभग 20 अरब डॉलर के व्यापार पर विशेष अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो पहले से इन शुल्कों के दायरे में आते हैं।

आगे की दिशा

गौरतलब है कि कार्नी का यह संबोधन महज़ एक आर्थिक घोषणा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है — कि कनाडा अमेरिकी दबाव के सामने झुकने के बजाय वैकल्पिक वैश्विक साझेदारियाँ तलाशने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। समिट के नतीजे और 'डील बुक' में शामिल परियोजनाओं पर निवेशकों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि कार्नी का यह दृष्टिकोण ज़मीन पर कितना कारगर साबित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा 'डील बुक' के अमल में है। एक ट्रिलियन कनाडाई डॉलर का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, मगर अमेरिकी बाज़ार की पहुँच के बिना वैकल्पिक निवेशकों को आकर्षित करना आसान नहीं होगा। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन के टैरिफ से कनाडाई उद्योग पहले से दबाव में है और नए भागीदारों की तलाश में समय और पूंजी दोनों लगते हैं। बिना ठोस द्विपक्षीय समझौतों के, यह समिट एक राजनीतिक संकेत तो दे सकती है, लेकिन व्यापारिक संतुलन पलटने में वक्त लगेगा।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट 2026 क्या है?
कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट 14 और 15 सितंबर 2026 को टोरंटो में आयोजित एक रणनीतिक आर्थिक सम्मेलन है, जिसका लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में एक ट्रिलियन कनाडाई डॉलर का निवेश आकर्षित करना है। इसमें ऊर्जा, खनिज, तकनीक और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी परियोजनाओं की 'डील बुक' पेश की जाएगी।
PM मार्क कार्नी ने समिट से पहले क्या कहा?
कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने भविष्य की कमान खुद संभाल रहा है और देश में ऊर्जा, प्राकृतिक संसाधन, प्रतिभा, तकनीक और पूंजी जैसे सभी ज़रूरी संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने एकता को ताकत बताते हुए कहा कि मिलकर काम करने से वे उससे कहीं ज़्यादा हासिल कर सकते हैं जितना कोई उनसे छीन सकता है।
अमेरिका ने कनाडा पर कौन से व्यापारिक प्रतिबंध लगाए हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले शराब, डेयरी उत्पादों और मोटरसाइकिलों के आयात पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जो 29 सितंबर से लागू होंगे। इसके अलावा, पहले से आयातित लेकिन अभी तक मंज़ूरी न पाने वाले सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ जारी रहेगा।
कनाडा इस समिट से अमेरिकी निर्भरता कैसे कम करेगा?
समिट के ज़रिये कनाडा दुनिया भर के निवेशकों को अपनी बड़ी परियोजनाओं से जोड़ना चाहता है ताकि सप्लाई चेन मज़बूत हो और अमेरिकी बाज़ार पर निर्भरता घटे। 'डील बुक' में ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और उन्नत तकनीक से जुड़े प्रमुख प्रोजेक्ट शामिल होंगे जो वैकल्पिक वैश्विक साझेदारियाँ बनाने में मदद करेंगे।
अमेरिका ने कनाडा पर व्यापारिक प्रतिबंध क्यों लगाए?
अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य कनाडा के जवाबी उपायों का मुकाबला करना, अमेरिकी उत्पादन की रक्षा करना और व्यापार में 'समान अवसर' सुनिश्चित करना है। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव की कड़ी में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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