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ट्रंप के '51वें राज्य' बयान के बाद कार्नी ने अमेरिकी हमले के जोखिम पर विचार किया: रिपोर्ट

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ट्रंप के '51वें राज्य' बयान के बाद कार्नी ने अमेरिकी हमले के जोखिम पर विचार किया: रिपोर्ट

सारांश

कनाडा के PM कार्नी का खुलासा — ट्रंप के '51वें राज्य' वाले बयानों के बाद उनकी सरकार ने अमेरिकी सैन्य हमले जैसे 'चरम जोखिम' पर भी मंथन किया। टैरिफ युद्ध अब कनाडा की संप्रभुता और उसकी भविष्य की वैश्विक रणनीति की बड़ी लड़ाई में तब्दील हो चुका है।

मुख्य बातें

कनाडा के PM मार्क कार्नी ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि सरकार ने अमेरिकी हमले जैसे 'चरम जोखिम' पर भी विचार किया था।
कार्नी ने स्पष्ट किया कि यह एक अपेक्षित परिदृश्य नहीं, बल्कि जिम्मेदार जोखिम प्रबंधन का हिस्सा था।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के '51वें राज्य' वाले बयानों ने कनाडा की संप्रभुता पर बड़ी राजनीतिक बहस छेड़ी है।
कनाडा अमेरिकी आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए यूरोपीय संघ (EU) के साथ नज़दीकी बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
ट्रंप ने EU-कनाडा साझेदारी को 'हास्यास्पद' बताया और कड़े टैरिफ की चेतावनी दी।
कार्नी ने कहा कि अमेरिका पर अत्यधिक आर्थिक निर्भरता का 40 साल पुराना दौर अब खत्म हो चुका है।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्वीकार किया है कि उनकी सरकार ने अमेरिका द्वारा कनाडा पर संभावित हमले जैसे 'चरम जोखिम' पर भी विचार किया था — यह तब हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार यह कहा कि कनाडा को अमेरिका का 51वाँ राज्य बन जाना चाहिए। द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कार्नी ने कहा कि भले ही ऐसी सैन्य स्थिति की संभावना अत्यंत कम हो, एक जिम्मेदार सरकार का यह दायित्व है कि वह हर संभावित परिदृश्य के लिए तैयार रहे।

कार्नी का बयान: जोखिम की तैयारी, न खतरे की पुष्टि

कार्नी ने कहा, 'मेरा मानना है कि ऐसी जिम्मेदारी वाले पद पर रहते हुए आपको बेहद कम संभावना वाले, लेकिन गंभीर जोखिमों पर भी विचार करना पड़ता है। यह सिर्फ जोखिम से निपटने की तैयारी है। हम इसे सामान्य या सबसे संभावित स्थिति नहीं मानते। ऐसा न करना गैर-जिम्मेदाराना होता।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अमेरिकी हमले को किसी भी रूप में अपेक्षित परिणाम नहीं मानती, फिर भी जोखिम प्रबंधन के तहत इस परिदृश्य पर भी मंथन हुआ।

यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब टैरिफ विवाद और अमेरिकी आर्थिक निर्भरता कम करने की कनाडा की कोशिशों को लेकर वॉशिंगटन और ओटावा के बीच तनाव नए स्तर पर पहुँच चुका है।

अमेरिका-कनाडा संबंधों में बढ़ता तनाव

पिछले एक वर्ष के दौरान दोनों पड़ोसी देशों के व्यापारिक रिश्ते तेज़ी से बिगड़े हैं। ट्रंप ने कनाडाई उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए, जिसके जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी सामान पर पलटवार किया। अमेरिका, कनाडा का सबसे करीबी आर्थिक और सुरक्षा साझेदार रहा है — दोनों देशों के बीच हर वर्ष अरबों डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है।

गौरतलब है कि यह महज़ व्यापारिक झगड़ा नहीं रह गया — ट्रंप के '51वें राज्य' वाले बयानों ने कनाडा की संप्रभुता को लेकर एक बड़ी राजनीतिक बहस छेड़ दी है। कार्नी ने इस सुझाव को सिरे से खारिज किया है।

कनाडा की विविधीकरण रणनीति

इस महीने की शुरुआत में एक वीडियो संदेश में कार्नी ने कहा था, 'पिछले 40 साल अमेरिका के साथ हमारे आर्थिक रिश्तों को और गहरा करने का दौर रहा है। सच तो यह है कि इससे कारोबार करना आसान था, लेकिन इसका मतलब यह भी था कि हम एक ही आर्थिक साझेदार पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गए। अब साफ है कि वह दौर खत्म हो चुका है।'

इसी रणनीतिक बदलाव के तहत कनाडा ने अमेरिका से इतर अन्य देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंध विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा यूरोपीय संघ (EU) का एसोसिएट सदस्य बनने की संभावना पर भी विचार कर रहा है।

ट्रंप की कड़ी चेतावनी

कनाडा के EU के साथ नज़दीकी बढ़ाने की संभावना पर ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह हास्यास्पद है।' ट्रंप ने आगे कहा कि अगर उन्हें लगा कि यह अमेरिका के खिलाफ किसी विरोधी इरादे से उठाया गया कदम है, तो वे बहुत कड़े टैरिफ लगाएंगे या यूरोप के साथ कई क्षेत्रों में व्यापार रोक देंगे। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि इरादा अच्छा है तो कोई समस्या नहीं होगी।

यह ऐसे समय में आया है जब नाटो (NATO) के भीतर भी अमेरिका-कनाडा संबंधों को लेकर चिंता जताई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि ट्रंप की भाषा परंपरागत सहयोगी कूटनीति की सीमाएँ लाँघ रही है।

आगे क्या होगा

कार्नी की सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि वह न तो पुरानी निर्भरता पर लौटेगी और न ही अमेरिकी दबाव में झुकेगी। विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद अब केवल टैरिफ तक सीमित नहीं — यह कनाडा की दीर्घकालिक भू-राजनीतिक पहचान की परीक्षा बन चुका है। आने वाले महीनों में EU-कनाडा साझेदारी पर होने वाली वार्ता और ट्रंप की प्रतिक्रिया दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह दर्शाता है कि ट्रंप की भाषा केवल बयानबाज़ी नहीं रही। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी गठबंधन की एकजुटता पहले से दबाव में है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि टैरिफ युद्ध और संप्रभुता की बयानबाज़ी मिलकर कनाडा को एक ऐतिहासिक रणनीतिक पुनर्गठन की ओर धकेल रही है — EU के साथ संभावित एसोसिएट सदस्यता इसी का संकेत है। सवाल यह है कि क्या यह वास्तविक विविधीकरण है या ट्रंप को वार्ता की मेज पर वापस लाने की दबाव-रणनीति।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्क कार्नी ने अमेरिकी हमले के जोखिम पर विचार क्यों किया?
कार्नी ने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार के रूप में उन्हें हर 'चरम जोखिम' पर विचार करना होता है, भले ही उसकी संभावना बेहद कम हो। यह निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप के बार-बार कनाडा को अमेरिका का 51वाँ राज्य बनाने वाले बयानों के बाद लिया गया था।
ट्रंप ने कनाडा को 51वाँ राज्य क्यों कहा?
राष्ट्रपति ट्रंप ने कई मौकों पर यह बयान दिया कि कनाडा अमेरिका का 51वाँ राज्य बन जाए। यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते टैरिफ विवाद और आर्थिक तनाव की पृष्ठभूमि में आए, जिसने अमेरिका-कनाडा संबंधों को नया निचला स्तर दिया।
कनाडा अमेरिकी आर्थिक निर्भरता कैसे कम करना चाहता है?
कनाडा ने यूरोपीय संघ (EU) सहित अन्य देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। रिपोर्टों के अनुसार, EU का एसोसिएट सदस्य बनने की संभावना पर भी विचार हो रहा है, जिस पर ट्रंप ने कड़ी आपत्ति जताई है।
ट्रंप ने कनाडा-EU साझेदारी पर क्या कहा?
ट्रंप ने कनाडा के EU के साथ नज़दीकी बढ़ाने की संभावना को 'हास्यास्पद' बताया और चेतावनी दी कि अगर यह अमेरिका के खिलाफ विरोधी इरादे से किया गया, तो वे बहुत कड़े टैरिफ लगाएंगे या यूरोप के साथ व्यापार रोक देंगे।
क्या अमेरिका-कनाडा के बीच वास्तव में युद्ध का खतरा है?
कार्नी ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार अमेरिकी हमले को किसी भी रूप में अपेक्षित परिणाम नहीं मानती। यह विचार केवल जोखिम प्रबंधन प्रक्रिया का हिस्सा था — न कि इस बात का संकेत कि ऐसी स्थिति संभावित है।
राष्ट्र प्रेस
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