चीन ने पैराग्वे और बेलीज के 2 मंत्रियों पर लगाए प्रतिबंध, ताइवान समर्थन को बताया वजह
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्रालय ने 12 अक्टूबर 2026 को पैराग्वे के संचार एवं प्रौद्योगिकी मंत्री गुस्तावो एमिग्डियो विलाटे समानीगो और बेलीज के विदेश मामलों, विदेश व्यापार, शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फ्रांसिस फोन्सेका के विरुद्ध औपचारिक जवाबी कार्रवाई की घोषणा की। बीजिंग के अनुसार, इन दोनों मंत्रियों ने ताइवान के साथ अपने-अपने देशों के 'राजनयिक संबंधों' का समर्थन करके चीन के 'मूल हितों' को क्षति पहुँचाई है।
प्रतिबंधों का विवरण
चीन लोक गणराज्य के विदेशी प्रतिबंध विरोधी कानून के अनुच्छेद 3, 4, 6, 9 और 15 के अंतर्गत घोषित यह कार्रवाई तीन हिस्सों में विभाजित है। पहला — चीन में इन मंत्रियों की चल, अचल और अन्य सभी संपत्तियों को जब्त किया जाएगा। दूसरा — चीन में स्थित संगठनों और व्यक्तियों को उनके साथ किसी भी प्रकार का लेन-देन, सहयोग या गतिविधि करने से रोका जाएगा। तीसरा — उन्हें वीजा देने से इनकार किया जाएगा और उनके चीन, हांगकांग तथा मकाओ में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।
बीजिंग का पक्ष
चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि पैराग्वे और बेलीज के इन 'चीन-विरोधी राजनेताओं' ने 'स्वार्थी हितों' से प्रेरित होकर ताइवान के साथ राजनयिक संबंधों का 'हठपूर्वक' समर्थन किया। बीजिंग ने इसे राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा एवं विकास हितों के विरुद्ध 'अलगाववादी गतिविधि' करार दिया है।
भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पैराग्वे उन गिने-चुने देशों में शामिल है जो अभी भी ताइवान को आधिकारिक रूप से मान्यता देते हैं। बेलीज भी ताइवान के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध बनाए रखता है। चीन की 'एक चीन नीति' के तहत वह ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और किसी भी देश को ताइवान के साथ आधिकारिक संबंध रखने के विरुद्ध लगातार दबाव बनाता रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब ताइवान जलडमरूमध्य में तनाव पहले से ही ऊँचे स्तर पर है।
विशेषज्ञों का नज़रिया
विश्लेषकों के अनुसार, चीन का यह कदम उसकी उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह ताइवान समर्थक देशों और नेताओं पर व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाकर कूटनीतिक दबाव बढ़ाता है। आलोचकों का कहना है कि छोटे देशों के मंत्रियों को निशाना बनाना बीजिंग की उस नीति का संकेत है जिसमें वह ताइवान के घटते राजनयिक दायरे को और सीमित करना चाहता है। यह निर्णय 12 अक्टूबर 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, और आने वाले समय में इन दोनों देशों के साथ चीन के संबंध और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं।