चीन ने अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पर श्वेतपत्र जारी किया, पश्चिमी आरोपों को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने 28 जुलाई 2026 को 'तथाकथित अतिरिक्त उत्पादन क्षमता मुद्दे पर चीन के पक्ष' शीर्षक से एक आधिकारिक दस्तावेज जारी किया, जिसमें बीजिंग ने पश्चिमी देशों और आर्थिक समूहों द्वारा लगाए जा रहे 'ओवरकैपेसिटी' के आरोपों को सिरे से नकार दिया। यह दस्तावेज ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, यूरोपीय संघ और अन्य देश चीनी निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क और व्यापार प्रतिबंधों को उचित ठहराने के लिए इस तर्क का सहारा ले रहे हैं।
दस्तावेज में क्या कहा गया
मंत्रालय के अनुसार, कुछ देश और आर्थिक समुदाय अपनी घटती प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति और बाज़ार हिस्सेदारी को लेकर चिंतित हैं और इसी कारण वे आर्थिक एवं व्यापारिक प्रश्नों का राजनीतिकरण कर रहे हैं। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया कि औद्योगिक सब्सिडी और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के बीच कोई अनिवार्य संबंध नहीं है, और बड़े देशों को नियम-आधारित सब्सिडी में नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए।
दस्तावेज में यह भी रेखांकित किया गया कि अधिक निर्यात और व्यापार अधिशेष को अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का पर्याय नहीं माना जा सकता। चीनी निर्यात की वृद्धि को देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता और नवाचार शक्ति के साथ-साथ विभिन्न देशों की हरित ऊर्जा परिवर्तन और औद्योगीकरण की माँग से जोड़ा गया।
घरेलू माँग पर चीन का पक्ष
दस्तावेज में इस धारणा को भी खारिज किया गया कि चीन में घरेलू माँग की कमी के कारण उत्पादन क्षमता अधिशेष हो रही है। चीन को न केवल विश्व का सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र, बल्कि एक प्रमुख उपभोक्ता बाज़ार के रूप में भी प्रस्तुत किया गया। मंत्रालय के अनुसार, चीनी आधुनिक उद्यमों का विकास निरंतर तकनीकी नवाचार और सुधार पर टिका है।
वैश्विक व्यवस्था पर चीन का आह्वान
दस्तावेज में सभी पक्षों से पारस्परिक लाभ और साझा विकास के सिद्धांत पर कायम रहने का आग्रह किया गया। बीजिंग ने एक अधिक निष्पक्ष और समावेशी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था तथा खुली वैश्विक उत्पादन एवं आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण की वकालत की। दस्तावेज में यह भी कहा गया कि चीनी आधुनिक उद्यमों का वैश्विक विस्तार 'चाइना शॉक 2.0' नहीं, बल्कि 'चाइना ऑपर्च्युनिटी 2.0' है।
वैश्विक व्यापार तनाव का संदर्भ
गौरतलब है कि यह दस्तावेज ऐसे समय में जारी हुआ है जब अमेरिका ने चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनलों और स्टील पर भारी आयात शुल्क लगाए हैं, और यूरोपीय संघ ने भी इसी दिशा में कदम उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि चीन की राज्य-सहायता प्राप्त उद्योग नीति वैश्विक बाज़ारों में कृत्रिम रूप से कम कीमतों को बढ़ावा देती है। चीन इन आरोपों को संरक्षणवाद का आवरण बताता है।
यह दस्तावेज चीन की उस व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने व्यापारिक साझेदारों को यह समझाने का प्रयास कर रहा है कि उसकी औद्योगिक नीति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा नहीं, बल्कि अवसर है। आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं में इस दस्तावेज का संदर्भ लिए जाने की संभावना है।