चीन का रूस और भारत के साथ सहयोग बढ़ाने का संकल्प, EU की 'निर्भरता' नीति को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन च्येन ने 8 जून 2026 को बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि चीन, रूस और भारत तीनों उभरती आर्थिक शक्तियाँ हैं और इन देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाना न केवल तीनों राष्ट्रों के हितों के अनुकूल है, बल्कि क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति, सुरक्षा तथा समृद्धि के लिए भी अनिवार्य है। प्रवक्ता ने कहा कि चीन इन दोनों देशों के साथ संपर्क बनाए रखते हुए सहयोग को और गहरा करने का इच्छुक है।
भारत और रूस के साथ संबंधों पर चीन का रुख
प्रवक्ता लिन च्येन ने कहा कि चीन, रूस और भारत के साथ बेहतर द्विपक्षीय संबंध बनाए रखना तीनों देशों की साझा प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन तीनों देशों के बीच सहयोग वैश्विक स्थिरता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भू-राजनीतिक तनावों के बीच बहुपक्षीय सहयोग के नए समीकरण बन रहे हैं।
EU की 'चीन-निर्भरता' घटाने की नीति पर पलटवार
यूरोपीय संघ (EU) द्वारा हाल ही में सदस्य देशों को चीन पर तथाकथित 'निर्भरता' कम करने के लिए प्रोत्साहित किए जाने पर प्रवक्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक और आपूर्ति श्रृंखला में चीन और यूरोप के बीच जो गहन एकीकरण है, वह आर्थिक वैश्वीकरण और बाज़ार की स्वाभाविक प्रक्रिया का परिणाम है — न कि किसी एकतरफा रणनीति का। यह एकीकरण दोनों पक्षों के उद्यमों के व्यावसायिक हितों के अनुरूप है।
चीन-यूरोप संबंध: 'शून्य-जमा खेल नहीं'
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि चीन-यूरोप आर्थिक और व्यापारिक संबंध किसी एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष पारस्परिक लाभ की स्थिति तक पहुँच सकते हैं। आर्थिक मतभेदों के समाधान में चीन का रवैया खुला और सक्रिय बताया गया। चीन ने यूरोप से अपील की कि वह वार्ता और परामर्श के माध्यम से समस्याओं का हल निकाले, ताकि द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग आगे बढ़ सके।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
आलोचकों का कहना है कि चीन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और यूरोप दोनों ही चीन की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता को रणनीतिक जोखिम मान रहे हैं। गौरतलब है कि EU ने हाल के महीनों में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और सोलर पैनल जैसे क्षेत्रों में चीन पर अत्यधिक निर्भरता को लेकर चिंता जताई है। चीन का यह कूटनीतिक संदेश उन चिंताओं को काउंटर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
चीन की इस सक्रिय कूटनीतिक मुद्रा से संकेत मिलता है कि बीजिंग भारत, रूस और यूरोप — तीनों मोर्चों पर एक साथ संवाद बनाए रखने की रणनीति अपना रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले महीनों में इन द्विपक्षीय संबंधों की दिशा वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है।