चीन की पारिस्थितिक पर्यावरण संहिता: सभ्यता निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
सारांश
Key Takeaways
- पारिस्थितिक पर्यावरण संहिता का मसौदा प्रस्तुत किया गया है।
- यह पर्यावरण संरक्षण के नियमों को एकीकृत करेगी।
- पक्षियों की 527 प्रजातियां पेइचिंग में पाई जाती हैं।
- संहिता का उद्देश्य पारिस्थितिक सभ्यता का निर्माण करना है।
- चीनी राष्ट्रपति की विचारधारा से प्रेरित है।
बीजिंग, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। १५वीं पंचवर्षीय योजना के पहले वर्ष में, चीन की दूसरी संहिता – पारिस्थितिक पर्यावरण संहिता – का मसौदा औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा के समक्ष चर्चा के लिए पेश किया गया। एनपीसी के प्रतिनिधियों और सीपीपीसीसी के सदस्यों ने इस पर संशोधनों की बात की। यह संहिता चीन में पारिस्थितिक सभ्यता की दिशा में कानून के शासन की स्थापना के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
पारिस्थितिकी और पर्यावरण के संरक्षण के संदर्भ में, मुझे एक पुरानी याद आती है। लगभग बीस साल पहले, मैं भारत की राजधानी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रही थी। हर सुबह, मेरी खिड़की के बाहर पक्षियों की मधुर तान से मेरी नींद खुल जाती थी। जबकि उस समय चीन की राजधानी पेइचिंग में जंगली पक्षियों की संख्या कम थी। भारतीय समाज में मनुष्य और प्रकृति के बीच इस सामंजस्य की छवि मुझे प्रेरित करती थी: पेइचिंग में अपने घर से खिड़की खोलकर पक्षियों की मधुर धुन सुनना कितना सुखद होगा! दो दशकों के प्रयासों के बाद, चीन ने पारिस्थितिक सभ्यता का निर्माण करते हुए महत्वपूर्ण प्रगति की है, और आज, यह सपना सच में बदल गया है।
पक्षी पारिस्थितिकीय पर्यावरण के सबसे प्रत्यक्ष “मूल्यांकनकर्ता” होते हैं। एक समय था जब चीनी लोग समुद्री पक्षियों को देखने के लिए युन्नान के खुनमिंग जाते थे। लेकिन अब, छिंगदाओ और श्यामन से लेकर हबेई, थ्येनचिन और पेइचिंग के थोंगचो जिले तक फैले नीले पानी पर नाचते समुद्री पक्षियों के झुंड की सुंदरता सोशल मीडिया पर छाई हुई है। आज पेइचिंग में पक्षियों की ५२७ प्रजातियां पाई जाती हैं, जो जी20 की राजधानियों में दूसरे स्थान पर है। शहरी पार्कों से लेकर उपनगरीय आर्द्रभूमियों तक, पक्षियों के झुंड बखूबी उड़ते और गाते हैं, जो चीन के पारिस्थितिक शासन की सच्चाई का प्रमाण है।
यह अद्भुत परिवर्तन चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस गहन विचार से प्रेरित है कि “पारिस्थितिक समृद्धि सभ्यतागत समृद्धि की ओर ले जाती है।” चीन ने “पहले प्रदूषण फैलाओ, बाद में सफाई करो” की पुरानी नीति को छोड़ दिया है और अब एक नई दिशा में बढ़ रहा है, जिसमें पारिस्थितिकीय सभ्यता के निर्माण को उच्च प्राथमिकता दी गई है।
चीन की एनपीसी और सीपीपीसीसी ने पारिस्थितिक पर्यावरण संहिता के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यह संहिता पर्यावरण संरक्षण के बिखरे नियमों को एकीकृत करती है और एक सुनियोजित कानूनी ढांचा तैयार करती है, जिससे हरे-भरे पहाड़ों और स्वच्छ जल की रक्षा की जा सके। यह मानव जाति के लिए एक साझा भविष्य की अवधारणा पर आधारित है और सुनिश्चित करती है कि पारिस्थितिक संरक्षण नियमों और कानूनों द्वारा शासित हो, जिससे सुंदर चीन का निर्माण किया जा सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)