20 अगस्त 2026
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चीन ने चूछ्य्व-3 रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर उतारा, पुन: प्रयोज्य तकनीक में बड़ी उपलब्धि

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चीन ने चूछ्य्व-3 रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर उतारा, पुन: प्रयोज्य तकनीक में बड़ी उपलब्धि

सारांश

चीन ने 19 अगस्त को चूछ्य्व-3 रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर नियंत्रित तरीके से उतारकर इतिहास रचा — यह लैंडिंग लेग्स से जमीनी लैंडिंग का देश का पहला सफल प्रयास है और SpaceX-शैली की पुन: प्रयोज्य तकनीक में चीन की बढ़ती क्षमता का प्रमाण।

मुख्य बातें

चीन ने 19 अगस्त 2026 को चूछ्य्व-3 रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर सफलतापूर्वक उतारा।
रॉकेट ने बुधवार सुबह 7:35 बजे (बीजिंग समय) तोंगफंग वाणिज्यिक अंतरिक्ष नवाचार पायलट क्षेत्र से उड़ान भरी।
तैनाती योग्य लैंडिंग लेग्स की सहायता से जमीन पर नियंत्रित लैंडिंग का यह चीन का पहला सफल प्रयास है।
इससे पहले 10 जुलाई को लॉन्ग मार्च 10बी के पहले चरण की समुद्री लैंडिंग सफल रही थी।
यह उपलब्धि चीन के पुन: प्रयोज्य वाणिज्यिक अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक निर्णायक मील का पत्थर मानी जा रही है।

चीन ने 19 अगस्त 2026 को पुन: प्रयोज्य रॉकेट चूछ्य्व-3 का सफल परीक्षण कर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया — तैनाती योग्य लैंडिंग लेग्स की सहायता से रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर नियंत्रित तरीके से उतारने का यह चीन का पहला सफल प्रयास है। यह उपलब्धि चीन की पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक के विकास में एक निर्णायक पड़ाव मानी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

चूछ्य्वे-3 वाई2 वाहक रॉकेट ने बुधवार सुबह 7 बजकर 35 मिनट (बीजिंग समय) पर उत्तर-पश्चिमी चीन के तोंगफंग वाणिज्यिक अंतरिक्ष नवाचार पायलट क्षेत्र से उड़ान भरी। प्रक्षेपण के बाद रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर उतारने की पूरी प्रक्रिया योजना के अनुसार संपन्न हुई और मिशन पूरी तरह सफल रहा।

गौरतलब है कि यह मिशन 10 जुलाई को समुद्र में लॉन्ग मार्च 10बी के पहले चरण को सफलतापूर्वक उतारने के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम था। उस उपलब्धि के ठीक एक महीने बाद जमीन पर सफल लैंडिंग ने चीन के पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण कार्यक्रम को नई गति दी है।

तकनीकी महत्व

तैनाती योग्य लैंडिंग लेग्स की मदद से जमीन पर नियंत्रित लैंडिंग वह तकनीक है जिसे अमेरिकी कंपनी SpaceX ने अपने Falcon 9 रॉकेट के जरिए लोकप्रिय बनाया। चीन ने अब इस क्षमता को स्वतंत्र रूप से विकसित कर वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत की है।

पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि रॉकेट के महंगे पहले चरण को बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे प्रक्षेपण लागत में भारी कमी आती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक अंतरिक्ष तक पहुँच को अधिक किफायती और नियमित बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।

वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान तकनीक को लेकर तीव्र प्रतिस्पर्धा चल रही है। चीन का वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और तोंगफंग वाणिज्यिक अंतरिक्ष नवाचार पायलट क्षेत्र इस महत्वाकांक्षा का केंद्र बनता जा रहा है।

यह चीन की दूसरी बड़ी पुन: प्रयोज्य रॉकेट सफलता है — पहले समुद्री लैंडिंग, अब जमीनी लैंडिंग। इस क्रम से स्पष्ट है कि चीन व्यवस्थित रूप से इस तकनीक को परिपक्व कर रहा है।

आगे क्या

इस सफलता के बाद चीन के वाणिज्यिक अंतरिक्ष कार्यक्रम में पुन: प्रयोज्य रॉकेटों की नियमित उड़ानों की संभावना और बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में चीन इस तकनीक का उपयोग उपग्रह प्रक्षेपण लागत घटाने और अंतरिक्ष में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन के चूछ्य्व-3 रॉकेट की जमीनी लैंडिंग क्यों खास है?
यह तैनाती योग्य लैंडिंग लेग्स की सहायता से रॉकेट के पहले चरण को जमीन पर नियंत्रित तरीके से उतारने का चीन का पहला सफल प्रयास है। इस तकनीक से रॉकेट के महंगे पहले चरण को बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे प्रक्षेपण लागत में भारी कमी आती है।
चूछ्य्व-3 रॉकेट ने कहाँ से और कब उड़ान भरी?
चूछ्य्वे-3 वाई2 वाहक रॉकेट ने 19 अगस्त 2026 को सुबह 7 बजकर 35 मिनट (बीजिंग समय) पर उत्तर-पश्चिमी चीन के तोंगफंग वाणिज्यिक अंतरिक्ष नवाचार पायलट क्षेत्र से उड़ान भरी।
इससे पहले चीन ने पुन: प्रयोज्य रॉकेट में कौन-सी उपलब्धि हासिल की थी?
10 जुलाई 2026 को चीन ने लॉन्ग मार्च 10बी रॉकेट के पहले चरण को समुद्र में सफलतापूर्वक उतारा था। चूछ्य्व-3 की जमीनी लैंडिंग उस उपलब्धि के ठीक एक महीने बाद हुई है।
पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक का क्या फायदा है?
पुन: प्रयोज्य रॉकेट तकनीक से रॉकेट के पहले चरण को बार-बार उपयोग किया जा सकता है, जिससे प्रक्षेपण लागत में उल्लेखनीय कमी आती है और अंतरिक्ष तक पहुँच अधिक किफायती व नियमित होती है।
चीन की इस उपलब्धि का वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ पर क्या असर पड़ेगा?
चीन ने SpaceX की Falcon 9 जैसी जमीनी लैंडिंग तकनीक को स्वतंत्र रूप से विकसित कर लिया है, जिससे वाणिज्यिक अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा तेज होगी। विश्लेषकों के अनुसार यह उपलब्धि चीन को उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में बड़ी हिस्सेदारी दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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