चीन-ब्रिटेन 11वीं रणनीतिक वार्ता: वांग यी और यवेट कूपर ने व्यापार, AI, जलवायु पर सहयोग पर जोर दिया
सारांश
मुख्य बातें
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी ने 2 जून को पेइचिंग में ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर के साथ 11वीं चीन-ब्रिटेन रणनीतिक वार्ता की। दोनों नेताओं ने व्यापार, वित्त, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जलवायु परिवर्तन सहित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, साथ ही वैश्विक अस्थिरता के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के तौर पर अपनी साझा ज़िम्मेदारियों को रेखांकित किया।
वार्ता का प्रमुख एजेंडा
वांग यी ने वार्ता में याद दिलाया कि इस वर्ष की शुरुआत में ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के चीन दौरे के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने ‘दीर्घकालिक और स्थिर व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ विकसित करने पर महत्वपूर्ण सहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच आदान-प्रदान और सहयोग पूरी तरह बहाल हो चुका है और धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहा है।
खुलेपन और 15वीं पंचवर्षीय योजना पर ज़ोर
वांग यी ने कहा कि चीन के 40 वर्षों से अधिक के सुधार और खुलेपन ने सिद्ध किया है कि ‘खुलापन प्रगति लाता है, जबकि अलगाव केवल प्रतिगमन की ओर ले जाता है।’ उन्होंने 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) को विश्व के लिए अवसरों की सूची बताते हुए कहा कि यह ब्रिटेन की आधुनिक औद्योगिक रणनीति के साथ पूर्णतः संरेखित है।
चीनी विदेश मंत्री ने ब्रिटेन से चीनी उद्यमों के लिए ‘निष्पक्ष, न्यायसंगत और गैर-भेदभावपूर्ण’ व्यापारिक वातावरण उपलब्ध कराने तथा सुरक्षा सीमाओं को उचित रूप से परिभाषित करने का आग्रह किया — एक ऐसी टिप्पणी जो हाल के वर्षों में पश्चिमी देशों द्वारा चीनी तकनीकी कंपनियों पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में अहम मानी जा रही है।
वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद
वांग यी ने कहा कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति जटिल और अस्थिर है, जिसमें ‘जंगल कानून के अवशेष फिर से उभर रहे हैं’ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शीत युद्ध की समाप्ति के बाद से सबसे गहन उथल-पुथल का सामना कर रहा है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन, द्वितीय विश्व युद्ध की उपलब्धियों की रक्षा और ‘वास्तविक बहुपक्षवाद’ को आगे बढ़ाने पर बल दिया।
ब्रिटेन का रुख और थाईवान पर स्पष्टता
कूपर ने स्वीकार किया कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति अशांत है और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के नाते दोनों देशों को ‘पहले से कहीं अधिक संवाद और सहयोग’ की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से थाईवान मुद्दे पर ब्रिटेन की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और न ही आएगा।
ब्रिटिश विदेश मंत्री ने व्यापार, वित्त, ऊर्जा, AI और जलवायु परिवर्तन में सहयोग गहरा करने तथा संस्थागत संवाद आगे बढ़ाने की तत्परता जताई। गौरतलब है कि स्टार्मर सरकार के सत्ता में आने के बाद यह उच्च-स्तरीय कूटनीतिक जुड़ाव लंदन की चीन-नीति में संतुलन साधने की कोशिशों को दर्शाता है।
आगामी महीनों में दोनों देशों के बीच आर्थिक और वित्तीय संवाद के अगले दौर पर निगाहें टिकी रहेंगी।
(फोटो: राष्ट्र प्रेस)