ताइवान के 'हान कुआंग' युद्धाभ्यास में राष्ट्रपति लाई चिंग-ते बख्तरबंद वाहन से पहुंचे गुप्त कमांड सेंटर
सारांश
मुख्य बातें
ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को 7 अगस्त 2025 की तड़के वार्षिक 'हान कुआंग' सैन्य अभ्यास के तहत एक बख्तरबंद सैन्य वाहन में बैठाकर एक गुप्त कमांड सेंटर तक पहुंचाया गया, जहाँ उन्होंने वरिष्ठ सैन्य और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आपातकालीन संचालन की समीक्षा की। यह अभ्यास ऐसे समय में किया गया जब चीन की ओर से ताइवान पर सैन्य दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
अभ्यास का स्वरूप और उद्देश्य
इस वर्ष का हान कुआंग अभ्यास 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें 20,000 से अधिक रिज़र्व सैनिक भाग ले रहे हैं। अभ्यास में युद्धकालीन संचार व्यवस्था, नागरिक प्रशासन की निरंतरता, हथियारों के भंडार को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करना, साइबर व्यवधान से निपटना और संभावित आक्रमण जैसी परिस्थितियों का सिमुलेशन शामिल है। राष्ट्रपति कार्यालय की प्रवक्ता के अनुसार, इस अभ्यास का मुख्य लक्ष्य कमांड संरचना, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की क्षमता को परखना है।
राष्ट्रपति लाई की भूमिका और बयान
राष्ट्रपति लाई चिंग-ते अभ्यास के दौरान बुलेटप्रूफ जैकेट और सैन्य हेलमेट पहने नज़र आए। राष्ट्रपति कार्यालय ने इससे संबंधित तस्वीरें जारी कीं। लाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने कमांड सेंटर पहुँचकर हान कुआंग अभ्यास की विभिन्न ड्रिल्स का बारीकी से जायज़ा लिया। उन्होंने लिखा, 'हम शांति स्थापित करने के अपने इरादे पर अडिग हैं।'
'डिकैपिटेशन स्ट्राइक' के खतरे पर विशेष ध्यान
ताइवान लंबे समय से इस आशंका को लेकर सतर्क है कि किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में चीन शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को निष्क्रिय करने के लिए तथाकथित 'डिकैपिटेशन स्ट्राइक' की कोशिश कर सकता है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष के अभ्यास में नेतृत्व की सुरक्षित आवाजाही और वैकल्पिक कमांड व्यवस्था की स्थापना पर विशेष जोर दिया गया है। यह पहली बार नहीं है जब ताइवान ने इस तरह के परिदृश्य का अभ्यास किया हो, लेकिन इस बार इसकी व्यापकता और सार्वजनिक प्रदर्शन उल्लेखनीय है।
चीन-ताइवान तनाव की पृष्ठभूमि
चीन ताइवान को अपना अभिन्न अंग मानता है और आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग से उसे अपने नियंत्रण में लेने की बात बार-बार दोहराता रहा है। दूसरी ओर, ताइवान की सरकार इन दावों को सिरे से खारिज करती है और कहती है कि द्वीप का भविष्य केवल वहाँ की जनता ही तय कर सकती है। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में चीनी सेना की ताइवान जलडमरूमध्य में गतिविधियाँ उल्लेखनीय रूप से बढ़ी हैं।
आगे की दिशा
यह अभ्यास ताइवान की रक्षा तैयारियों को न केवल सैन्य, बल्कि प्रशासनिक और नागरिक स्तर पर भी मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के सार्वजनिक अभ्यास चीन को एक स्पष्ट संदेश देने का भी काम करते हैं कि ताइवान किसी भी परिस्थिति में अपनी कमान व्यवस्था को बनाए रखने में सक्षम है।