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क्या ताइवान के आसपास चीन का बड़ा सैन्य अभ्यास अमेरिका के लिए चिंता का विषय है?

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क्या ताइवान के आसपास चीन का बड़ा सैन्य अभ्यास अमेरिका के लिए चिंता का विषय है?

सारांश

अमेरिका ने ताइवान के आसपास चीन के बड़े सैन्य अभ्यासों पर चिंता जताई है। इस अभ्यास के चलते क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है। अमेरिका ने चीन से संयम बरतने की अपील की है। क्या ये घटनाएँ ताइवान और चीन के बीच संबंधों को और बिगाड़ देंगी?

मुख्य बातें

चीन के सैन्य अभ्यास ने क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।
अमेरिका ने संयम बरतने की अपील की है।
ताइवान ने अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं।

वाशिंगटन, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ताइवान के चारों ओर चीन के अब तक के सबसे बड़े सैन्य अभ्यासों के प्रति चिंता व्यक्त की है। अमेरिका का मानना है कि बीजिंग की कार्रवाइयाँ और बयानबाजी से क्षेत्र में तनाव अनावश्यक रूप से बढ़ सकता है।

इन अभ्यासों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि चीन को सैन्य दबाव से पीछे हटना चाहिए और बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने 1 जनवरी को जारी बयान में कहा कि चीन की सैन्य गतिविधियाँ ताइवान और आसपास के देशों के लिए अनावश्यक तनाव पैदा कर रही हैं। अमेरिका ने बीजिंग से संयम बरतने, ताइवान पर सैन्य दबाव समाप्त करने और सार्थक बातचीत शुरू करने की अपील की है।

यह बयान ऐसे समय में आया है, जब चीन ने “जस्टिस मिशन 2025” नाम के बड़े सैन्य अभ्यास पूरे किए। ये अभ्यास 29 से 31 दिसंबर के बीच हुए, जिनमें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की सेना, नौसेना, वायु सेना और रॉकेट बलों द्वारा समन्वित अभियान शामिल थे। इन अभ्यासों में ताइवान के चारों ओर घेराबंदी जैसे हालात का अभ्यास किया गया। इसमें प्रमुख बंदरगाहों को बंद करना, सटीक हमले करना और आपूर्ति मार्गों को बाधित करने जैसे दृश्य शामिल थे।

ताइवान प्रशासन के अनुसार, इस दौरान उसने 77 चीनी सैन्य विमानों और 17 नौसैनिक जहाजों की गतिविधियाँ दर्ज कीं। इसके जवाब में ताइवान ने लड़ाकू विमान उड़ाए और सुरक्षा कदम उठाए। तैयारी के तहत नदियों के मुहानों पर विस्फोटक बैरल जैसे अवरोध भी लगाए गए।

इन अभ्यासों के पैमाने और समय को लेकर अमेरिका के कई सहयोगी देशों ने भी चिंता जताई। यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने ताइवान जलडमरूमध्य में बढ़ते सैन्य दबाव पर असहजता जताते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियों से गलत आकलन का खतरा बढ़ जाता है।

चीन ने इन अभ्यासों को अलगाववादी ताकतों के लिए चेतावनी बताया है। बीजिंग ने इसे अमेरिका और ताइवान के बीच रक्षा सहयोग से भी जोड़ा, जिसमें हाल ही में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बड़ी बिक्री शामिल है। चीन का कहना है कि ताइवान के आसपास उसकी सैन्य गतिविधियाँ बाहरी हस्तक्षेप के जवाब में हैं।

अमेरिका ने दोहराया कि वह ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है और किसी भी तरह से बल या दबाव के जरिए मौजूदा स्थिति बदलने का विरोध करता है। क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपूर्ति व्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने नए साल के अपने संदेश में ताइवान के साथ एकीकरण के लक्ष्य को दोहराया। वहीं ताइवान की सरकार ने बीजिंग के संप्रभुता के दावों को खारिज कर दिया है और कहा है कि द्वीप का भविष्य केवल वहां के लोग ही तय कर सकते हैं।

ताइवान वर्ष 1949 से मुख्य भूमि चीन से अलग तरीके से शासित है और उसने अपनी लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था, सेना और अर्थव्यवस्था विकसित की है। चीन ताइवान को अपना अलग हुआ प्रांत मानता है और उसे मुख्य भूमि में शामिल करने का लक्ष्य लगातार दोहराता रहा है।

हाल की एक स्वतंत्र रिपोर्ट में कहा गया है कि ये चीन की समुद्री इलाकों में दबाव बनाने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत और बिना दबाव के किया जाना चाहिए, ताकि समुद्री और हवाई आवाजाही की स्वतंत्रता बनी रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

हमें यह मानना होगा कि ताइवान और चीन के बीच तनाव हमारे लिए चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और स्थिरता बनाए रखना आवश्यक है। हमें सभी पक्षों से संवाद और संयम की आवश्यकता है ताकि स्थिति और न बिगड़े।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चीन के सैन्य अभ्यास का उद्देश्य क्या है?
चीन के सैन्य अभ्यास का उद्देश्य अलगाववादी ताकतों को चेतावनी देना और ताइवान के आसपास की स्थिति को नियंत्रित करना है।
अमेरिका का इस पर क्या रुख है?
अमेरिका ने चीन के सैन्य अभ्यासों पर चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है।
ताइवान ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
ताइवान ने चीनी सैन्य गतिविधियों का जवाब देते हुए लड़ाकू विमान उड़ाए और सुरक्षा कदम उठाए।
राष्ट्र प्रेस
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