क्या पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी लॉबिंग और जनसंपर्क गतिविधियां तेज की हैं?

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क्या पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी लॉबिंग और जनसंपर्क गतिविधियां तेज की हैं?

सारांश

पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी लॉबिंग और जनसंपर्क गतिविधियों को तीव्रता से बढ़ाया है। दस्तावेज़ों से स्पष्ट होता है कि इसके लिए करोड़ों डॉलर खर्च किए गए हैं, और यह प्रयास अमेरिकी नीति निर्माताओं और थिंक टैंकों तक पहुँचने के लिए है। यह मामला भारत में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान ने अमेरिका में लॉबिंग बढ़ाई है।
  • लाखों डॉलर खर्च किए गए हैं।
  • इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट सक्रिय है।
  • अमेरिकी कांग्रेस और थिंक टैंकों तक पहुँचने का प्रयास।
  • भारत-पाकिस्तान संबंधों पर प्रभाव संभव।

वाशिंगटन, २ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत प्रस्तुत दस्तावेज़ों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी लॉबिंग और जनसंपर्क गतिविधियों को बढ़ा दिया है।

इन दस्तावेजों में उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान सरकार और उससे जुड़े संस्थाओं ने अमेरिका में अपनी आवाज़ पहुँचाने के लिए कई मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य अमेरिकी कांग्रेस, एग्जीक्यूटिव ब्रांच, थिंक टैंक और मीडिया तक पहुँच बनाना है।

एक दस्तावेज़ के अनुसार, इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अमेरिका में लॉबिंग और जननीति से जुड़े कार्यों के लिए लगभग नौ लाख डॉलर का भुगतान किया। यह संस्थान पाकिस्तान स्थित एक थिंक टैंक है जो पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी डिवीजन से जुड़ा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, अक्टूबर २०२४ में हाइपरफोकल कम्युनिकेशंस एलएलसी को इस कार्य के लिए पंजीकृत किया गया था। यह कंपनी टीम ईगल कंसल्टिंग एलएलसी के अंतर्गत सबकॉन्ट्रैक्टर के रूप में कार्य कर रही थी। दस्तावेज़ों में उल्लेख है कि इसका उद्देश्य अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों को सुधारना था।

एक अन्य दस्तावेज़ से खुलासा हुआ है कि वाशिंगटन स्थित पाकिस्तान दूतावास ने अक्टूबर २०२५ से एर्विन ग्रेव्स स्ट्रैटेजी ग्रुप एलएलसी के साथ एक समझौता किया। इसके तहत आरंभिक तीन महीनों के लिए हर महीने २५ हजार डॉलर का भुगतान तय किया गया।

इस समझौते में अमेरिकी संसद के सदस्यों और सरकारी अधिकारियों से संपर्क स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा, नीति समूहों और थिंक टैंकों के साथ बातचीत भी इसमें शामिल है, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और लोकतांत्रिक सुधार जैसे मुद्दों का उल्लेख है।

इसके अतिरिक्त, व्यापार को बढ़ावा देने, पर्यटन और पाकिस्तान में दुर्लभ खनिजों की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है। सूचीबद्ध मुद्दों में जम्मू और कश्मीर विवाद और भारत-पाकिस्तान संबंध भी शामिल हैं।

इन खुलासों पर भारत में विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि इनमें जम्मू और कश्मीर तथा भारत-पाकिस्तान संबंधों के संदर्भ में अमेरिका में लॉबिंग की चर्चा की गई है।

एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान दूतावास ने मई में जनसंपर्क सेवाओं के लिए क़ॉर्विस होल्डिंग इंक को भी नियुक्त किया। इसमें मीडिया आउटरीच और नैरेटिव डेवलपमेंट शामिल हैं।

अमेरिकी कानून के अनुसार, विदेशी सरकारों और उनसे जुड़े संगठनों को अपनी लॉबिंग और जनसंपर्क गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। इन्हीं दस्तावेज़ों के माध्यम से उनके समझौतों, गतिविधियों और किए गए भुगतानों का पूरा विवरण मिलता है।

Point of View

क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
NationPress
02/01/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान ने अमेरिका में कितने पैसे खर्च किए?
पाकिस्तान ने अमेरिका में अपनी लॉबिंग गतिविधियों के लिए कई मिलियन डॉलर खर्च किए हैं।
इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट क्या है?
यह एक थिंक टैंक है जो पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी डिवीजन से संबंधित है।
भारत में इस रिपोर्ट पर क्या प्रतिक्रिया है?
भारत में इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि अमेरिका में लॉबिंग का संबंध भारत-पाकिस्तान संबंधों से है।
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