कौन से देश हैं संघर्ष के घेरे में? जानें इनके प्रभाव और सप्लाई पर असर
सारांश
Key Takeaways
- संघर्ष: रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास के बीच जारी हैं।
- कच्चा तेल: मिडिल ईस्ट में तनाव से सप्लाई प्रभावित हो रही है।
- उर्वरक: रूस और बेलारूस नाइट्रोजन और पोटाश के प्रमुख सप्लायर हैं।
- शिक्षा: संघर्ष का असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
- इजरायल: तकनीक और चिकित्सा उपकरणों में अग्रणी है।
नई दिल्ली, ७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान में विश्व के अनेक क्षेत्रों में संघर्ष जारी हैं। एक ओर, रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास के बीच टकराव हो रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव के कारण मिडिल ईस्ट में भी स्थिति नाजुक बनी हुई है। इस गंभीर स्थिति का सबसे बड़ा प्रभाव कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ रहा है, जिसके चलते कई देशों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। भविष्य में इसके और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
रूस और यूक्रेन, जो कि विश्व के लगभग २५ प्रतिशत गेहूं की सप्लाई करते हैं, को 'दुनिया की रोटी का टुकड़ा' कहा जाता है। इसके अतिरिक्त, ये दोनों देश मक्का, जौ और सूरजमुखी के तेल के बड़े निर्यातक भी हैं।
रूस विश्व का प्रमुख खनिज तेल और प्राकृतिक गैस का निर्यातक है। इसी प्रकार, ईरान भी प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरक की सप्लाई पर इस संघर्ष का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
रूस और बेलारूस, जो कि नाइट्रोजन और पोटाश के उर्वरकों के सबसे बड़े सप्लायर हैं, उर्वरक सप्लाई के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इसके अलावा, रूस पैलेडियम और निकिल का एक बड़ा स्रोत है, जिनका उपयोग ऑटोमोबाइल और स्टील निर्माण में होता है।
इजरायल की स्थिति पर नजर डालें तो यह देश माइक्रोचिप्स, रक्षा उपकरण, चिकित्सा उपकरण और हीरे सप्लाई करता है। तकनीक के क्षेत्र में इजरायल की महत्वपूर्ण भूमिका है, और अनेक प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों का जन्म इसी देश में हुआ है।
ईरान और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर, आई2यू2, सऊदी-इजरायल सामान्यीकरण, ऊर्जा और तेल आपूर्ति डील्स व वैश्विक निवेश जैसे कई समझौतों को प्रभावित किया है।
इस संघर्ष का असर शिक्षा पर भी पड़ रहा है। लोग अध्ययन और रोजगार के लिए एक देश से दूसरे देश जाते हैं, लेकिन वर्तमान तनाव के चलते कई छात्र पढ़ाई छोड़कर अपने घर लौट रहे हैं। ईरान और मिडिल ईस्ट में हमलों के कारण स्कूलों और कॉलेजों को भी नुकसान पहुंच रहा है।