पांच महीने बाद नेपाल लौटे पूर्व PM शेर बहादुर देउबा, मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बीच काठमांडू में स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा गुरुवार, 13 अगस्त को करीब पाँच महीने के विदेश प्रवास के बाद स्वदेश लौट आए। काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारों के साथ उनका स्वागत किया। उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है जब उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है और उनकी पार्टी गहरे आंतरिक संकट से गुज़र रही है।
विदेश से वापसी का सफर
देउबा 25 फरवरी को 'मेडिकल चेक-अप' का हवाला देकर सिंगापुर रवाना हुए थे। वे थाईलैंड के रास्ते काठमांडू पहुँचे। उनके साथ उनकी पत्नी — पूर्व विदेश मंत्री आरजू देउबा — और बेटा जयबीर नहीं लौटे हैं। आरजू देउबा को पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बुरी तरह पीटा था, और वे भी मेडिकल इलाज का हवाला देकर विदेश गई थीं।
रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान देउबा परिवार सिंगापुर से हांगकांग भी गया। हांगकांग में उनके घूमने के वीडियो समय-समय पर सोशल मीडिया पर सामने आए, हालाँकि दंपती ने कभी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया कि वे वहाँ थे।
मनी लॉन्ड्रिंग जांच और कानूनी पेचीदगियाँ
देउबा की लंबी अनुपस्थिति के पीछे कानूनी दबाव भी एक बड़ा कारण माना जाता है। पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान उनके घर पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था, जिसमें भारी मात्रा में नकदी जलाई गई थी। इस घटना के बाद से उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच चल रही है।
नेपाली अधिकारियों ने उनकी संपत्तियाँ और बैंक खाते फ्रीज कर दिए। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद, मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अनुरोध पर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। नेपाल सरकार ने इंटरपोल के ज़रिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की भी कोशिश की, जो सफल नहीं हो सकी।
अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मई को गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया। माना जाता है कि इसी फैसले के बाद देउबा ने स्वदेश लौटने का निर्णय लिया।
पार्टी में आंतरिक संकट
एयरपोर्ट पर स्वागत करने वालों में पार्टी के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का, कृष्ण प्रसाद सितौला, प्रकाश मान सिंह, बिमलेंद्र निधि और प्रकाश शरण महत जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे।
गौरतलब है कि जनवरी में एक विवादित विशेष आम अधिवेशन के ज़रिए देउबा को पार्टी नेतृत्व से हटा दिया गया था, और गगन थापा को नई केंद्रीय समिति का अध्यक्ष चुना गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अप्रैल को उस अधिवेशन को वैध ठहराया, जिससे थापा के नेतृत्व में पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति मिली। 5 मार्च के चुनावों में पार्टी को शर्मनाक हार झेलनी पड़ी, जिसके बाद देउबा गुट ने थापा के नेतृत्व की कड़ी आलोचना की।
देउबा गुट ने 17 अप्रैल के फैसले की समीक्षा याचिका दायर की थी। पिछले हफ्ते सर्वोच्च न्यायालय ने रिव्यू पिटीशन स्वीकार कर मामले को तीन जजों की बेंच के सामने नई सुनवाई के लिए भेज दिया। इस सुनवाई का नतीजा ही पार्टी का भविष्य तय करेगा।
आगे की राह
देउबा की वापसी के अगले दिन — शुक्रवार को — उनका गुट काठमांडू में कैडर की एक राष्ट्रीय सभा आयोजित करने की घोषणा कर चुका है। वहीं, पार्टी के पूर्व महासचिव शशांक कोइराला अलग बैठक करने की कोशिशों में जुटे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ जारी जांच में आगे क्या कदम उठाएगी।