13 अगस्त 2026
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पांच महीने बाद नेपाल लौटे पूर्व PM शेर बहादुर देउबा, मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बीच काठमांडू में स्वागत

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पांच महीने बाद नेपाल लौटे पूर्व PM शेर बहादुर देउबा, मनी लॉन्ड्रिंग जांच के बीच काठमांडू में स्वागत

सारांश

पाँच महीने के विदेश प्रवास के बाद नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा काठमांडू लौट आए — मनी लॉन्ड्रिंग जांच, फ्रीज संपत्तियाँ और टूटती पार्टी के बीच। सर्वोच्च न्यायालय के वारंट रद्द करने के बाद की यह वापसी नेपाली राजनीति में एक निर्णायक मोड़ बन सकती है।

मुख्य बातें

पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा 13 अगस्त को पाँच महीने बाद काठमांडू लौटे; पत्नी आरजू देउबा और बेटा जयबीर अभी विदेश में हैं।
25 फरवरी को 'मेडिकल चेक-अप' के बहाने देश छोड़ा था; रिपोर्टों के अनुसार सिंगापुर और हांगकांग में रहे।
मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत उनकी संपत्तियाँ और बैंक खाते फ्रीज हैं; सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मई को गिरफ्तारी वारंट रद्द किया।
नेपाल सरकार की इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की कोशिश विफल रही।
गगन थापा के नेतृत्व वाले विशेष आम अधिवेशन को चुनौती देने वाली रिव्यू पिटीशन सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की बेंच को भेजी गई है।
देउबा गुट शुक्रवार को काठमांडू में राष्ट्रीय कैडर सभा करेगा; पार्टी में फूट का खतरा बरकरार।

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा गुरुवार, 13 अगस्त को करीब पाँच महीने के विदेश प्रवास के बाद स्वदेश लौट आए। काठमांडू के त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारों के साथ उनका स्वागत किया। उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है जब उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है और उनकी पार्टी गहरे आंतरिक संकट से गुज़र रही है।

विदेश से वापसी का सफर

देउबा 25 फरवरी को 'मेडिकल चेक-अप' का हवाला देकर सिंगापुर रवाना हुए थे। वे थाईलैंड के रास्ते काठमांडू पहुँचे। उनके साथ उनकी पत्नी — पूर्व विदेश मंत्री आरजू देउबा — और बेटा जयबीर नहीं लौटे हैं। आरजू देउबा को पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बुरी तरह पीटा था, और वे भी मेडिकल इलाज का हवाला देकर विदेश गई थीं।

रिपोर्टों के अनुसार, इस दौरान देउबा परिवार सिंगापुर से हांगकांग भी गया। हांगकांग में उनके घूमने के वीडियो समय-समय पर सोशल मीडिया पर सामने आए, हालाँकि दंपती ने कभी सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार नहीं किया कि वे वहाँ थे।

मनी लॉन्ड्रिंग जांच और कानूनी पेचीदगियाँ

देउबा की लंबी अनुपस्थिति के पीछे कानूनी दबाव भी एक बड़ा कारण माना जाता है। पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान उनके घर पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था, जिसमें भारी मात्रा में नकदी जलाई गई थी। इस घटना के बाद से उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच चल रही है।

नेपाली अधिकारियों ने उनकी संपत्तियाँ और बैंक खाते फ्रीज कर दिए। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के कुछ दिनों बाद, मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के अनुरोध पर देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। नेपाल सरकार ने इंटरपोल के ज़रिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की भी कोशिश की, जो सफल नहीं हो सकी।

अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मई को गिरफ्तारी वारंट रद्द कर दिया। माना जाता है कि इसी फैसले के बाद देउबा ने स्वदेश लौटने का निर्णय लिया।

पार्टी में आंतरिक संकट

एयरपोर्ट पर स्वागत करने वालों में पार्टी के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष पूर्ण बहादुर खड़का, कृष्ण प्रसाद सितौला, प्रकाश मान सिंह, बिमलेंद्र निधि और प्रकाश शरण महत जैसे वरिष्ठ नेता शामिल थे।

गौरतलब है कि जनवरी में एक विवादित विशेष आम अधिवेशन के ज़रिए देउबा को पार्टी नेतृत्व से हटा दिया गया था, और गगन थापा को नई केंद्रीय समिति का अध्यक्ष चुना गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अप्रैल को उस अधिवेशन को वैध ठहराया, जिससे थापा के नेतृत्व में पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति मिली। 5 मार्च के चुनावों में पार्टी को शर्मनाक हार झेलनी पड़ी, जिसके बाद देउबा गुट ने थापा के नेतृत्व की कड़ी आलोचना की।

देउबा गुट ने 17 अप्रैल के फैसले की समीक्षा याचिका दायर की थी। पिछले हफ्ते सर्वोच्च न्यायालय ने रिव्यू पिटीशन स्वीकार कर मामले को तीन जजों की बेंच के सामने नई सुनवाई के लिए भेज दिया। इस सुनवाई का नतीजा ही पार्टी का भविष्य तय करेगा।

आगे की राह

देउबा की वापसी के अगले दिन — शुक्रवार को — उनका गुट काठमांडू में कैडर की एक राष्ट्रीय सभा आयोजित करने की घोषणा कर चुका है। वहीं, पार्टी के पूर्व महासचिव शशांक कोइराला अलग बैठक करने की कोशिशों में जुटे हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ जारी जांच में आगे क्या कदम उठाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि स्वास्थ्य। पाँच महीने की चुप्पी के दौरान उनकी पार्टी चुनाव हारी, नेतृत्व बदला और अदालती लड़ाई जारी रही — वे इस पूरे घटनाक्रम से बाहर रहे। अब जब वे लौटे हैं, तो असली सवाल यह है कि क्या उनकी उपस्थिति पार्टी को एकजुट कर सकती है या आंतरिक गुटबाज़ी को और गहरा करेगी। मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का निपटारा अभी बाकी है, और सरकार का अगला कदम नेपाल की राजनीतिक दिशा तय करेगा।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शेर बहादुर देउबा पाँच महीने विदेश में क्यों रहे?
देउबा 25 फरवरी को 'मेडिकल चेक-अप' के लिए सिंगापुर गए थे। रिपोर्टों के अनुसार, जेन-जी आंदोलन के दौरान उनके घर पर हमले और उसके बाद शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच भी उनकी लंबी अनुपस्थिति का कारण मानी जाती है। दंपती ने अपनी विदेश यात्राओं की जानकारी सार्वजनिक रूप से कभी नहीं दी।
देउबा के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच क्या है?
पिछले साल जेन-जी आंदोलन के दौरान देउबा के घर पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था, जिसमें भारी मात्रा में नकदी जलाई गई थी। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट ने जांच शुरू की, उनकी संपत्तियाँ और बैंक खाते फ्रीज किए गए और गिरफ्तारी वारंट जारी हुए। सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मई को वह वारंट रद्द कर दिया।
नेपाल सरकार ने इंटरपोल नोटिस क्यों जारी करने की कोशिश की?
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की सरकार ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत देउबा को विदेश से वापस लाने के लिए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का प्रयास किया था। हालाँकि यह कोशिश सफल नहीं हो सकी।
नेपाली कांग्रेस में देउबा और गगन थापा गुट के बीच विवाद क्या है?
जनवरी में एक विवादित विशेष आम अधिवेशन के ज़रिए देउबा को पार्टी नेतृत्व से हटाकर गगन थापा को अध्यक्ष चुना गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 17 अप्रैल को उस अधिवेशन को वैध माना, लेकिन देउबा गुट ने समीक्षा याचिका दायर की जो अब तीन जजों की बेंच के सामने है।
देउबा की वापसी के बाद नेपाल में राजनीतिक स्थिति क्या होगी?
देउबा गुट शुक्रवार को काठमांडू में राष्ट्रीय कैडर सभा करेगा, जबकि पूर्व महासचिव शशांक कोइराला अलग बैठक की कोशिश में हैं। सर्वोच्च न्यायालय की तीन जजों की बेंच का फैसला पार्टी का भविष्य तय करेगा। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग जांच में सरकार का अगला कदम भी अनिश्चित है।
राष्ट्र प्रेस
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