जेट ईंधन 100% महंगा: अमेरिकी एयरलाइंस की उड़ानें रद्द, कांग्रेस में तीखी बहस
सारांश
Key Takeaways
वाशिंगटन, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव के चलते जेट ईंधन की कीमतें महज कुछ महीनों में दोगुनी हो गई हैं, जिससे अमेरिकी एयरलाइन उद्योग गंभीर संकट में आ गया है। उड़ानें रद्द हो रही हैं, टिकट महंगे हो रहे हैं और अमेरिकी सीनेट में सरकार की ऊर्जा नीति को लेकर जबरदस्त टकराव देखने को मिला।
ईंधन की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल
उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक, जेट ईंधन की कीमत पिछले वर्ष के अंत में लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल थी, जो इस महीने बढ़कर 200 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। हालांकि बाद में इसमें मामूली गिरावट आई, लेकिन यह वृद्धि एयरलाइन कंपनियों के लिए असहनीय बोझ बन गई है।
अलास्का एयरलाइंस को इस तिमाही में ईंधन पर सैकड़ों मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। कंपनी पहले ही अपने वसंत (स्प्रिंग) शेड्यूल में कटौती की घोषणा कर चुकी है। यह संकट केवल एक एयरलाइन तक सीमित नहीं — पूरा अमेरिकी विमानन क्षेत्र इस मार से जूझ रहा है।
सीनेट की सुनवाई में तीखा टकराव
सीनेटर मारिया कैंटवेल ने सीनेट की एक महत्वपूर्ण सुनवाई में ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट से सीधे सवाल किए। उन्होंने बढ़ती ईंधन कीमतों और टिकाऊ विमान ईंधन (सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल — SAF) के लिए मिलने वाली सरकारी सहायता में कटौती के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई।
कैंटवेल ने कहा, "सिएटल टाइम्स के पहले पन्ने पर खबर छपी है कि महंगे ईंधन की वजह से उड़ानें रद्द हो रही हैं।" उन्होंने SAF के लिए मिलने वाली टैक्स छूट में कटौती को एयरलाइन संकट का बड़ा कारण बताया और प्रशासन से मध्य-पूर्व के तेल पर निर्भरता घटाने की अपील की।
कैंटवेल के शब्दों में, "उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसे लगता हो कि अभी जो हो रहा है वह ठीक है — खासकर तब जब वे सुबह उठते हैं और देखते हैं कि ईंधन की ऊंची लागत के कारण उड़ानें रद्द की जा रही हैं।"
सरकार का बचाव और वैकल्पिक ईंधन की सीमाएं
ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने स्वीकार किया कि ऊंची कीमतें चिंताजनक हैं, लेकिन उन्होंने प्रशासन की नीतियों का बचाव करते हुए कहा, "ऊर्जा की कीमतें थोड़ी ऊंची देखना निराशाजनक है, फिर भी ये चार साल पहले की कीमतों की तुलना में काफी कम हैं।"
राइट ने यह भी तर्क दिया कि टिकाऊ विमान ईंधन अभी भी काफी महंगा है और इसके लिए आवश्यक आपूर्ति ढांचा (सप्लाई नेटवर्क) बेहद सीमित है। उनके अनुसार, SAF की ऊंची उत्पादन लागत और कमजोर वितरण तंत्र भी कीमतें बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं।
आम यात्रियों पर असर और व्यापक आर्थिक प्रभाव
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब डीजल और पेट्रोल समेत समूची अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ईंधन महंगा हो रहा है। यात्रा और परिवहन की लागत बढ़ने से आम नागरिकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।
एयरलाइंस अब बढ़ी हुई ईंधन लागत का बोझ टिकट की कीमतों और अन्य शुल्कों के जरिए यात्रियों पर डाल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं तो गर्मियों के व्यस्त यात्रा सीजन में और अधिक उड़ानें रद्द हो सकती हैं।
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका पहले से ही ट्रेड वॉर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। सीनेटर कैंटवेल का मानना है कि नई ऊर्जा तकनीकों के लिए सरकारी प्रोत्साहन घटाने से दीर्घकालिक नुकसान होगा और विमानन क्षेत्र में ऊर्जा विविधीकरण की प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी।
आने वाले हफ्तों में सीनेट में SAF टैक्स क्रेडिट और ऊर्जा नीति पर और बहसें होने की संभावना है। यदि सरकार ने नीतिगत बदलाव नहीं किए, तो अमेरिकी एयरलाइन उद्योग को 2025 की गर्मियों में और बड़े झटके झेलने पड़ सकते हैं।