हिटलर का 'ईगल्स नेस्ट' आग में जला, जर्मनी के बवेरिया में संदिग्ध हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
जर्मनी के बवेरिया राज्य में ओबरसाल्जबर्ग की पहाड़ी चोटी पर स्थित नाजी तानाशाह एडॉल्फ हिटलर की कुख्यात पहाड़ी आवास 'ईगल्स नेस्ट' (जर्मन में 'केहलस्टीनहॉस') में शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2026 की देर शाम भीषण आग लग गई। जर्मन पुलिस ने शनिवार को बताया कि इस मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है और आपराधिक एंगल से जाँच जारी है। आग में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
आग की शुरुआत और बचाव अभियान
शुक्रवार रात करीब 9:50 बजे (GMT 1950) इमारत में लगे स्मोक डिटेक्टर से अलार्म बजते ही अधिकारियों को सूचना मिली। जब दमकलकर्मी मौके पर पहुँचे, तब तक पूरी इमारत आग की चपेट में थी और लपटें काफी ऊँची उठ रही थीं। आग पर काबू पाने के लिए करीब 200 दमकलकर्मियों को तैनात करना पड़ा।
पुलिस प्रवक्ता लिसा मायर ने बताया कि इमारत 1,834 मीटर की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण बचाव कार्य अत्यंत कठिन रहा। दमकलकर्मियों को इमारत तक पहुँचने के लिए 'भारी श्वसन उपकरणों' का इस्तेमाल करना पड़ा।
संदिग्ध की गिरफ्तारी और आगजनी की आशंका
जर्मन टैब्लॉइड 'बिल्ड' की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने घटनास्थल की ओर जाते समय एक मोटरसाइकिल सवार को पकड़ा। पुलिस को आशंका है कि यह आग जानबूझकर लगाई गई, यानी यह आगजनी का मामला हो सकता है। फिलहाल पुलिस आपराधिक एंगल से जाँच कर रही है और संदिग्ध से पूछताछ जारी है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि आग में कोई हताहत नहीं हुआ है, जो इतनी भीषण आग को देखते हुए राहत की बात है।
ऐतिहासिक महत्व: नाजी काल की धरोहर
'ईगल्स नेस्ट' का निर्माण 1930 के दशक में हुआ था और इसे 1938 में नाजी अधिकारियों के लिए एक गेस्ट हाउस के तौर पर तैयार किया गया था। यह इमारत हिटलर के दौर की उन चुनिंदा संरचनाओं में से एक है जो द्वितीय विश्व युद्ध की मित्र देशों की बमबारी में पूरी तरह सुरक्षित बच गई थी।
गौरतलब है कि इस स्थान को हिटलर का बेहद सुरक्षित निजी आवास माना जाता था और ऐसी मान्यता है कि उसकी विवादास्पद किताब 'मीन कैम्फ' के कुछ अंश यहीं लिखे गए थे। आज यह इमारत जर्मनी के 20वीं सदी के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण निशानी और ऐतिहासिक स्मारक मानी जाती है, जहाँ एक लोकप्रिय रेस्तरां भी संचालित होता है।
जाँच की दिशा और आगे की स्थिति
बवेरियाई पुलिस ने पुष्टि की है कि आग लगने के कारणों की आपराधिक दृष्टिकोण से जाँच की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब जर्मनी में ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है। इमारत को हुए नुकसान की सटीक सीमा और आगजनी की पुष्टि अभी जाँच के दायरे में है, और आने वाले दिनों में अधिकारियों द्वारा विस्तृत बयान अपेक्षित है।