किताब खरीद 'घोटाले' पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद का AAP पर पलटवार: '₹28.61 में खरीदी, AAP के समय दोगुनी थी कीमत'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के शिक्षा व खेल मंत्री आशीष सूद ने 24 अक्टूबर 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा लगाए गए किताब-खरीद घोटाले के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये इल्जाम पूरी तरह झूठे और राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके शिक्षा विभाग ने किताबें ₹28.61 प्रति पुस्तक की दर से खरीदी हैं — जबकि एनसीईआरटी (NCERT) की खुदरा कीमत ₹65 है और AAP के शासनकाल में इन्हीं किताबों की खरीद दोगुनी दर पर हुई थी।
आरोपों का पूरा संदर्भ
AAP ने आरोप लगाया था कि दिल्ली के शिक्षा विभाग द्वारा खरीदी गई किताबों में 40 प्रतिशत की हेरफेर हुई है और किताबों के आकार व विनिर्देशों (specifications) में बदलाव किया गया। विशेष रूप से आरोप था कि एक विज्ञान पुस्तक का आकार (size) NCERT मानक से छोटा कर दिया गया।
मंत्री सूद ने इस दावे को नकारते हुए पत्रकारों के सामने खुद एक नापने का टेप (measuring tape) पेश किया और कहा, 'ऑर्डर की कॉपी का दूसरा पेज देखिए, जहाँ किताब का साइज़ A4 स्पष्ट रूप से लिखा है।' उन्होंने कहा कि सारे तथ्य पारदर्शी तरीके से रखे गए हैं और कोई भी स्वयं जाँच सकता है।
पुराने दस्तावेज़ों का हवाला
सूद ने आगे कहा कि AAP के शासनकाल के दस्तावेज़ भी उनके पास मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि तत्कालीन शिक्षा सचिव ने ही तत्कालीन शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री के दौर में खरीदी जा रही किताबों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने कहा, 'हमने किताबें उनके समय में दी गई कीमतों से आधी कीमत पर खरीदी हैं। उनके समय के डॉक्यूमेंट्स मौजूद हैं जो इसे साबित करते हैं।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था का तुलनात्मक मूल्यांकन एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
शिक्षा विभाग की उपलब्धियाँ गिनाईं
मंत्री सूद ने कहा कि शिक्षा विभाग में अनेक सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं — छात्रों को डिजिटल शिक्षा मिल रही है, नई पहलें शुरू हुई हैं और परीक्षा परिणामों में सुधार आया है। उन्होंने कहा, 'एजुकेशन डिपार्टमेंट धीरे-धीरे पटरी पर आ रहा है। यह उनकी सोच को चुनौती देता है क्योंकि वे दावा करते थे कि वे ही सबसे अच्छा काम कर रहे हैं।'
गौरतलब है कि AAP ने वर्षों तक दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को अपनी राजनीतिक पहचान का केंद्र बनाया था और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया था। वर्तमान सरकार का यह पलटवार उसी विरासत को सीधी चुनौती है।
राजनीतिक संदर्भ और तीखे बोल
मंत्री सूद ने अपनी भाषा में स्पष्ट व्यंग्य का इस्तेमाल करते हुए कहा कि 'बड़े-छोटों और छोटे-छोटों' के बीच यह आंतरिक प्रतिस्पर्धा है — यानी पार्टी में नए नेताओं के आने से पुराने नेता अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
उन्होंने 'हूट एंड शूट' राजनीति का भी उल्लेख किया — 'कुछ भी कहो और भाग जाओ' — और आरोप लगाया कि AAP मतदाता सूची से 13 करोड़ वोट हटाने का झूठा दावा कर रही है, जबकि वास्तव में 3 करोड़ मतदाताओं का निधन या स्थानांतरण हुआ है।
आगे क्या होगा
शिक्षा विभाग का कहना है कि किताबों की खरीद से संबंधित सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक हैं और किसी भी जाँच के लिए तैयार हैं। AAP ने अभी तक इस जवाब पर प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह विवाद दिल्ली में शिक्षा नीति को लेकर दोनों पार्टियों के बीच जारी राजनीतिक टकराव का हिस्सा बनता जा रहा है, और आने वाले दिनों में इस पर और बयानबाज़ी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।