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क्या गूगल और मेटा विवादित विज्ञापनों को हटाने में सहयोग करेंगे?

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क्या गूगल और मेटा विवादित विज्ञापनों को हटाने में सहयोग करेंगे?

सारांश

अमेरिकी सांसदों ने गूगल और मेटा पर आरोप लगाए हैं कि ये कंपनियां श्वेत राष्ट्रवादी विचारधारा वाले विज्ञापनों को बढ़ावा दे रही हैं। इस मुद्दे पर सांसदों ने डीएचएस और आईसीई के साथ साझेदारी समाप्त करने की मांग की है। क्या टेक कंपनियाँ अपनी नीतियों का पालन करेंगी?

मुख्य बातें

गूगल और मेटा को अपने विज्ञापनों की गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
सांसदों ने डीएचएस और आईसीई की साझेदारी समाप्त करने की मांग की है।
श्वेत राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रचार का गंभीर मुद्दा है।

वाशिंगटन, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के दो प्रमुख डेमोक्रेटिक सांसदों ने टेक दिग्गज कंपनियों मेटा और गूगल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) और उसकी एजेंसी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे विज्ञापन चला रही हैं, जिनमें श्वेत राष्ट्रवादी विचारधारा और भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी की उपाध्यक्ष बेका बैलिंट और इमिग्रेशन प्रवर्तन की निगरानी करने वाली उपसमिति की प्रमुख, भारतीय मूल की सांसद प्रमिला जयपाल ने मेटा और गूगल के सीईओ को अलग-अलग पत्र भेजे हैं। इन पत्रों में उन्होंने मांग की है कि डीएचएस के साथ डिजिटल विज्ञापन से जुड़ी सभी साझेदारियों को तुरंत समाप्त किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि कंपनियों के बीच समझौते का दायरा और समय क्या है।

सांसदों का कहना है कि आईसीई इन विज्ञापनों का उपयोग बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान के लिए कर रही है। इसके तहत मिनियापोलिस, शिकागो, पोर्टलैंड और न्यू ऑरलियन्स जैसे शहरों में हजारों नए अधिकारियों को तैनात करने की योजना है। आरोप है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए भर्ती मानकों में भी ढील दी गई है।

पत्रों में दावा किया गया है कि आईसीई ने ऐसे विज्ञापन चलाए हैं, जिनमें श्वेत राष्ट्रवादी प्रेरित प्रचार की झलक मिलती है। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ये विज्ञापन उन लोगों को दिखाए जा रहे हैं जो स्पेनिश भाषा, मैक्सिकन खाने या लैटिन संगीत में रुचि रखते हैं, ताकि उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके।

सांसदों के अनुसार, पिछले 90 दिनों में डीएचएस ने 'सेल्फ-डिपोर्टेशन', यानी खुद देश छोड़ने को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर 10 लाख डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं। इसके अलावा, गूगल और यूट्यूब पर स्पेनिश भाषा में ऐसे विज्ञापनों पर करीब 30 लाख डॉलर खर्च किए गए। बताया गया कि पिछले साल आईसीई ने मेटा और गूगल पर कुल मिलाकर लगभग 58 लाख डॉलर के विज्ञापन चलाए।

सांसदों ने एक इंस्टाग्राम विज्ञापन का उदाहरण भी दिया, जिसमें लिखा था, 'हमारा घर फिर से हमारा होगा।' उनका कहना है कि यह नारा अक्सर कट्टरपंथी और नव-नाजी समूहों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।

सांसदों ने यह भी आरोप लगाया कि आईसीई ने भर्ती के नियमों में ढील दी है, जैसे उम्र सीमा हटाना, 50,000 डॉलर तक का साइनिंग बोनस देना और नए भर्ती अधिकारियों को बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के मैदान में उतारना शामिल हैं।

सांसदों ने मेटा और गूगल से यह भी पूछा कि उनके प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापन कैसे चलने दिए गए, जबकि दोनों कंपनियों की नीतियां नफरत और भेदभावपूर्ण सामग्री के खिलाफ हैं। सांसदों ने मांग की कि कंपनियां यह स्पष्ट करें कि क्या इन विज्ञापनों का कंटेंट उनके आंतरिक मानकों के अनुरूप है और क्या उन्होंने डीएचएस से इस पर कोई बातचीत की थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि वैश्विक स्तर पर विचारधारा का प्रभाव पड़ता है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या गूगल और मेटा ने इन विज्ञापनों के लिए अपनी नीतियों का उल्लंघन किया है?
हाँ, सांसदों का आरोप है कि ये कंपनियां नफरत और भेदभावपूर्ण सामग्री के खिलाफ अपनी नीतियों का पालन नहीं कर रही हैं।
आईसीई द्वारा चलाए गए इन विज्ञापनों का उद्देश्य क्या है?
आईसीई इन विज्ञापनों का उपयोग भर्ती अभियान के लिए कर रही है, जिसमें श्वेत राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रचार किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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