यूएनएचआरसी में पहलगाम आतंकी हमले की चर्चा, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील

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यूएनएचआरसी में पहलगाम आतंकी हमले की चर्चा, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील

सारांश

जिनेवा में चल रहे यूएनएचआरसी के सत्र में पहलगाम आतंकी हमले का मुद्दा उठाया गया। एक अंतरराष्ट्रीय समूह ने आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग की। इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या हुई थी, जिसे मानवता के खिलाफ गंभीर अपराध माना गया।

Key Takeaways

  • आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जिम्मेदारी
  • निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा
  • मानवाधिकारों की रक्षा
  • आतंकवादियों के खिलाफ कड़े कदम
  • अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तंत्र को मजबूत करना

पेरिस, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले का मुद्दा जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र में उठाया गया। एक अंतरराष्ट्रीय नागरिक समाज समूह ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जिम्मेदारी एवं दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

इस सत्र के दौरान इको फॉन सोसाइटी के प्रतिनिधि यासेर लारूसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के प्रति अपनी प्रतिक्रिया को और अधिक मजबूत करने और आम नागरिकों पर हमले करने वालों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया।

लारूसी ने पहलगाम के बैसरन घाटी में हुए हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए इसे मानवता के खिलाफ एक निर्दयी हमला बताया। उन्होंने कहा कि जानबूझकर नागरिकों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और मानवीय सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।

उन्होंने यूएनएचआरसी को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद अपने हर रूप में जीवन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा जैसे सार्वभौमिक अधिकारों के लिए सीधा खतरा है और यह मानव गरिमा और सभ्य व्यवस्था के खिलाफ है।

लारूसी ने कहा, “किसी भी राजनीतिक, वैचारिक या रणनीतिक बहाने से निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा को कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता।”

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आतंकवादी संगठनों को सीमा पार से मिलने वाला समर्थन या उन्हें दी जाने वाली शरण अंतरराष्ट्रीय शांति और देशों की संप्रभुता के लिए खतरा बढ़ा सकती है।

लारूसी ने सदस्य देशों से अपील की कि आतंकवादियों को दंड से बचने न दिया जाए और जो लोग आतंकवादी संगठनों को शरण, वित्तीय मदद या अन्य सहायता देते हैं, उनके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस हस्तक्षेप के माध्यम से संगठन ने आतंकवाद के पीड़ितों की सुरक्षा, मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तंत्र को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हमला कर 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी। इसे 2008 के मुंबई हमले के बाद भारत में नागरिकों पर हुआ सबसे घातक हमला माना गया।

इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन माना जाता है और कई आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है।

Point of View

जिसमें निर्दोष नागरिकों की जान ली गई। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस हमले की कड़ी निंदा करनी चाहिए और ऐसे आतंकवादियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
NationPress
16/03/2026

Frequently Asked Questions

इस हमले में कितने लोग मारे गए?
इस हमले में 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या की गई थी।
आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी किसने ली?
इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली थी।
यूएनएचआरसी में इस हमले पर क्या चर्चा हुई?
यूएनएचआरसी में इस हमले पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।
यह हमला कब हुआ था?
यह हमला 22 अप्रैल 2025 को हुआ था।
इस हमले को कैसे देखा गया?
इस हमले को मानवता के खिलाफ एक गंभीर अपराध माना गया।
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