खाड़ी देशों की होर्मुज के विकल्पों पर जोर, बायपास योजनाओं में तेजी

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खाड़ी देशों की होर्मुज के विकल्पों पर जोर, बायपास योजनाओं में तेजी

सारांश

पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्षों के बीच, खाड़ी देश होर्मुज चोक प्वाइंट के विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। यह महत्वपूर्ण मार्ग प्रतिदिन 20 मिलियन बैरल तेल का परिवहन करता है। जानिए किस तरह से सऊदी अरब और यूएई नई योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

Key Takeaways

  • खाड़ी देशों ने होर्मुज चोक प्वाइंट के विकल्पों पर जोर दिया है।
  • सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का महत्व बढ़ा है।
  • यूएई की अबू धाबी पाइपलाइन होर्मुज को बाईपास करने में मदद कर रही है।
  • नए पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स पर विचार जारी है।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि ये विकल्प आवश्यक हैं।

नई दिल्ली, ५ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में संघर्ष अपने चरम पर पहुँच चुका है। वर्तमान परिस्थितियाँ नियंत्रण से बाहर हैं, जिससे होर्मुज चोक प्वाइंट के प्रति चिंता बढ़ती जा रही है। खाड़ी देशों को इस स्थिति से गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज के विकल्पों की योजना तैयार की जा रही है! यह एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहाँ से प्रतिदिन लगभग २० मिलियन बैरल तेल गुजरता है।

भूराजनीतिक जोखिमों में वृद्धि और हाल ही में जहाजों पर हुए हमलों ने पाइपलाइन और ओवरलैंड कॉरिडोर जैसे विकल्पों को लागू करने के लिए प्रेरित किया है।

फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब और यूनाइटेड अरब अमीरात जैसे देश पहले से ही मौजूदा ढांचे का उपयोग करके स्ट्रेट को थोड़ा बाईपास कर रहे हैं।

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जिसे पेट्रोलाइन भी कहा जाता है, इस संकट के दौरान एक महत्वपूर्ण संपत्ति बनकर उभरी है।

किंगडम के पूर्वी तेल क्षेत्र से लाल सागर के यानबू पोर्ट तक फैली इस पाइपलाइन की क्षमता लगभग ७ मिलियन बैरल प्रति दिन है और यह निर्यात प्रवाह बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

यूएई भी अपनी अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन का उपयोग कर रहा है, जो ऑनशोर हबशान क्षेत्र को ओमान की खाड़ी में फुजैराह पोर्ट से जोड़ती है। यह पाइपलाइन हर दिन १.८ मिलियन बैरल तक की क्षमता रखती है और होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करने में मदद करती है, हालाँकि इसका उपयोग अभी अपनी अधिकतम क्षमता से कम है।

विश्लेषकों का कहना है कि ये पाइपलाइन आवश्यक विकल्प हैं, लेकिन ये गल्फ ऑयल शिपमेंट में किसी भी बड़ी रुकावट को ठीक करने में सीमित हैं।

इन चुनौतियों का सामना करते हुए, दोनों देश अपनी निर्यात लचीलापन बढ़ाने के लिए विस्तार योजनाओं पर विचार कर रहे हैं।

खबरों के अनुसार, सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बढ़ाने या अन्य मार्ग बनाने पर विचार कर रहा है और अपने लाल सागर तट पर नए निर्यात टर्मिनल विकसित कर रहा है, जिसमें बड़ा नियोम प्रोजेक्ट भी शामिल है।

इस बीच, यूएई अपनी बाईपास क्षमता को और मजबूत करने के लिए फुजैराह तक दूसरी पाइपलाइन बनाने की संभावना देख रहा है।

इन विकल्पों को कठिन क्रॉस-बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की तुलना में अधिक प्रासंगिक और सही माना जा रहा है।

खाड़ी देश दीर्घकालिक स्थिरता को बढ़ाने के लिए बड़े क्षेत्रीय पाइपलाइन नेटवर्क पर भी विचार कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि पूरे क्षेत्र में आपस में जुड़े कॉरिडोर का एक नेटवर्क विभिन्न मार्गों की तुलना में अधिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग विशेषज्ञों ने कहा है कि वर्तमान संकट ने ऐसे प्रोजेक्ट्स पर विचार करने के लिए मजबूर किया है।

Point of View

NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

होर्मुज चोक प्वाइंट का महत्व क्या है?
होर्मुज चोक प्वाइंट एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जहाँ से प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल का परिवहन होता है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का क्या महत्व है?
यह पाइपलाइन सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्र से लाल सागर के यानबू तक फैली है और इसकी क्षमता 7 मिलियन बैरल प्रति दिन है।
यूएई की अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन किसे जोड़ती है?
यह पाइपलाइन ऑनशोर हबशान क्षेत्र को ओमान की खाड़ी में फुजैराह पोर्ट से जोड़ती है।
क्या खाड़ी देश होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास कर रहे हैं?
हाँ, सऊदी अरब और यूएई पहले से ही अपने मौजूदा ढांचे का इस्तेमाल करके होर्मुज स्ट्रेट को बाईपास करने की कोशिश कर रहे हैं।
खाड़ी देशों की भविष्य की योजनाएं क्या हैं?
खाड़ी देश अपनी निर्यात लचीलापन बढ़ाने और बाईपास क्षमता को मजबूत करने के लिए नए पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।
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