क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा का एक और उदाहरण है हिंदू युवक की हत्या?
सारांश
Key Takeaways
- हिंदू युवक समीर दास की हत्या ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को उजागर किया।
- समीर का शव जगतपुर गांव के एक खेत से बरामद किया गया।
- पुलिस ने हत्या के मामले में विशेष अभियान शुरू किया है।
- यह घटना 24 दिनों में नौवीं वारदात है।
- भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की चिंता जताई है।
ढाका, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में एक अन्य हिंदू युवक की हत्या की खबर आई है। यह घटना फेनी जिले के डागनभुइयां उपजिले में घटी, जहाँ भीड़ ने हिंदू समीर दास की जान ले ली। 27 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक समीर दास का शव जगतपुर गांव के एक खेत से प्राप्त हुआ है।
परिवारिक सदस्यों और पुलिस के अनुसार, बांग्लादेश के एक स्थानीय अखबार डेली मनोबकंठा ने जानकारी दी है कि समीर रविवार शाम को अपने ऑटो-रिक्शा से घर के लिए निकला था। जब वह देर रात तक नहीं लौटा, तो उसके रिश्तेदारों ने उसकी खोज शुरू की। अंततः स्थानीय निवासियों ने उपजिला के सदर यूनियन के तहत जगतपुर गांव में एक खेत में समीर का शव पाया। पुलिस को सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और शव को बरामद किया।
रिपोर्टों में कहा गया है कि शव पर चाकू के कई निशान थे। प्रारंभिक पुलिस जांच से यह बात सामने आई है कि समीर को एक सुनसान स्थान पर ले जाकर उसकी हत्या की गई और उसके ऑटो-रिक्शा को चुराने का प्रयास किया गया।
डागनभुइयां पुलिस स्टेशन के अधिकारी मुहम्मद फैजुल अजीम नोमान ने पुष्टि की कि "शव बरामद कर लिया गया है और इसे फेनी जनरल अस्पताल के मुर्दाघर भेज दिया गया है। समीर का ऑटो-रिक्शा अभी तक नहीं मिला है। पुलिस ने हत्या में शामिल आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है।"
यह घटना 24 दिनों में नौवीं वारदात है, जो बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा का संकेत देती है।
9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे लगातार हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। भारत इस पड़ोसी देश में स्थिति पर नजर रखे हुए है। उम्मीद है कि सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं से सख्ती से निपटा जाएगा।