हंता वायरस: एमवी होंडियस के यात्रियों को लेकर अंतिम दो निकासी उड़ानें आइंडहोवन पहुंचीं
सारांश
मुख्य बातें
एमवी होंडियस क्रूज जहाज पर हंता वायरस संकट के बाद सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को लेकर अंतिम दो निकासी उड़ानें मंगलवार, 13 मई 2025 को नीदरलैंड के आइंडहोवन एयर बेस पर उतरीं। डच विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस निकासी अभियान के साथ जहाज पर सवार सभी यात्रियों और चालक दल को नीदरलैंड वापस लाया जा चुका है।
निकासी उड़ानों का विवरण
डच विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की ओर से भेजी गई पहली उड़ान में 6 यात्री सवार थे। दूसरी उड़ान का संचालन डच सरकार द्वारा किया गया, जो 22 चालक दल के सदस्यों को लेकर आई — इनमें एक डच नागरिक और 21 अन्य देशों के नागरिक शामिल थे।
पहला विमान स्थानीय समयानुसार लगभग रात 12:30 बजे (सोमवार को 2330 जीएमटी) उतरा, जबकि दूसरी डच उड़ान लगभग 15 मिनट बाद उतरी।
चिकित्सीय जांच और क्वारंटीन व्यवस्था
डच नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ एंड द एनवायरनमेंट ने रविवार को कहा कि सभी यात्रियों की गहन चिकित्सीय जांच की जाएगी। प्रयोगशाला परीक्षण के लिए हवाई अड्डे पर सभी के नमूने लिए जाएंगे।
संस्था के अनुसार, ऐसे चालक दल के सदस्यों और विदेशी यात्रियों के लिए क्वारंटीन होटल की व्यवस्था की गई है। नियमानुसार फिलहाल ये लोग अपने घर नहीं लौट सकते।
जहाज की वापसी यात्रा
एमवी होंडियस के डच संचालक ओशनवाइड एक्सपीडिशन्स ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि जहाज स्पेन के टेनेरिफ द्वीप से रवाना हो चुका है और नीदरलैंड्स के रॉटरडैम की ओर जा रहा है। जहाज को यह यात्रा पूरी करने में लगभग छह दिन लगने की उम्मीद है और इसके इस रविवार तक पहुंचने की संभावना है।
हंता वायरस क्या है और कैसे फैलता है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हंता वायरस जूनोटिक वायरस हैं, जो प्राकृतिक रूप से रोडेन्ट्स (चूहों आदि) को संक्रमित करते हैं और कभी-कभी इंसानों में भी फैल जाते हैं। यह वायरस संक्रमित कृन्तकों के दूषित मूत्र, मल या लार के संपर्क से मनुष्यों में फैलता है; कुछ मामलों में इन जीवों के काटने से भी संक्रमण हो सकता है, हालांकि ऐसा अपेक्षाकृत कम होता है।
अमेरिकी महाद्वीप में यह संक्रमण हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) का कारण बन सकता है, जो फेफड़ों और हृदय को तेज़ी से प्रभावित करता है। वहीं यूरोप और एशिया में यह हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) का कारण बनता है, जो मुख्य रूप से गुर्दों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है।
उपचार और बचाव
WHO के अनुसार, हंता वायरस रोगों का कोई विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है, लेकिन शुरुआती सहायक चिकित्सा देखभाल जीवित रहने की संभावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसमें श्वसन, हृदय और गुर्दे संबंधी जटिलताओं की करीबी निगरानी और प्रबंधन शामिल है। बचाव का मुख्य तरीका मनुष्यों और संक्रमित चूहों के बीच संपर्क को कम से कम करना है।
आने वाले दिनों में प्रयोगशाला परीक्षण के नतीजे आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि जहाज पर कितने लोग वास्तव में संक्रमित थे और आगे की स्वास्थ्य निगरानी किस दिशा में जाएगी।