6 जुलाई 2026
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चंद्रमा रेस: नासा प्रमुख आइजैकमैन बोले — अमेरिका-चीन का मुकाबला अब महीनों में तय होगा

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चंद्रमा रेस: नासा प्रमुख आइजैकमैन बोले — अमेरिका-चीन का मुकाबला अब महीनों में तय होगा

सारांश

चंद्रमा पर वापसी की रेस अब घड़ी की सुइयों पर टिकी है — सालों की नहीं, महीनों की बात है। नासा प्रमुख आइजैकमैन ने साफ़ कहा: चीन अपने टाइकोनॉट्स चाँद पर उतारेगा, सवाल सिर्फ यह है कि अमेरिका पहले पहुँचेगा या नहीं। आर्टेमिस III और IV की टाइमलाइन इसी दबाव की उपज है।

मुख्य बातें

नासा प्रशासक जैरेड आइजैकमैन ने 6 जुलाई 2026 को कहा कि अमेरिका-चीन चंद्रमा रेस अब महीनों में तय होगी, सालों में नहीं।
आर्टेमिस III अगले वर्ष और आर्टेमिस IV 2028 में नियोजित; चंद्रमा पर लैंडिंग का लक्ष्य 2028 के अंत तक।
चंद्र बेस का बुनियादी ढाँचा 2027 की शुरुआत में भेजा जाएगा; 2030 के दशक में चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति का लक्ष्य।
ट्रंप सरकार ने आर्टेमिस के लिए ऐतिहासिक निवेश की घोषणा की है।
ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन रॉकेट की लॉन्च विफलता से हुई देरी पर नासा ने चिंता जताई; जाँच जारी।

नासा के प्रशासक जैरेड आइजैकमैन ने 6 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा भेजने की होड़ में अमेरिका और चीन के बीच का मुकाबला अब सालों नहीं, बल्कि महीनों में तय होगा। अमेरिका की आज़ादी की 250वीं सालगिरह के अवसर पर सीबीएस के कार्यक्रम 'फेस द नेशन' में दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि दोनों देश पृथ्वी से परे मानव की स्थायी मौजूदगी स्थापित करने की अपनी योजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे हैं।

चीन की चुनौती और अमेरिका की प्रतिक्रिया

आइजैकमैन ने बिना किसी संशय के कहा, 'इसमें कोई शक नहीं है। हम अभी अंतरिक्ष की रेस में हैं और चीनी बहुत तेज़ रफ़्तार से आगे बढ़ रहे हैं। चीनी अपने टाइकोनॉट्स चाँद पर उतारेंगे। सवाल यह है कि क्या अमेरिका उनसे पहले वापस आएगा?' उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि बीजिंग का चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्री उतारने का इरादा पक्का है, इसलिए वाशिंगटन के लिए तत्काल कदम उठाना अनिवार्य है।

आर्टेमिस कार्यक्रम की टाइमलाइन

नासा प्रमुख ने बताया कि ट्रंप सरकार ने आर्टेमिस प्रोग्राम के लिए ऐतिहासिक निवेश देकर चंद्र अन्वेषण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया है। उनके अनुसार आर्टेमिस III अगले वर्ष के लिए नियोजित है, जबकि आर्टेमिस IV 2028 में होगा — जब अंतरिक्ष यात्री नए लैंडिंग सिस्टम की परीक्षण के बाद चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे। उन्होंने कहा, 'हम वापस जा रहे हैं। यह जबरदस्त होगा।'

चंद्र बेस और मंगल की तैयारी

आइजैकमैन के अनुसार चंद्रमा पर बेस के लिए बुनियादी ढाँचा 2027 की शुरुआत में पहुँचना शुरू हो जाएगा। 2028 तक अंतरिक्ष यात्रियों के लिए एक लूनर टेरेन व्हीकल और स्थायी अवसंरचना की शुरुआत पहले से मौजूद होनी चाहिए। उन्होंने कहा, '2030 के दशक की शुरुआत में चाँद अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन जैसा होगा — ऐसे क्रू होंगे जो काफ़ी लंबे समय तक वहाँ रहेंगे, क्योंकि हम उस माहौल में सीखते हैं और मंगल ग्रह के लिए तैयारी करते हैं।'

निजी कंपनियों की भूमिका और ब्लू ओरिजिन की देरी

नासा प्रमुख ने अमेरिका के अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी कंपनियों की बढ़ती भूमिका का बचाव किया और कहा कि व्यावसायिक लॉन्च प्रदाताओं ने अंतरिक्ष अन्वेषण की अर्थव्यवस्था को बदल दिया है। उन्होंने नासा के स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप को बचाने के प्रायोगिक मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि सस्ते व्यावसायिक लॉन्च उन वैज्ञानिक मिशनों की आयु बढ़ा सकते हैं जिनके लिए पहले महँगे प्रतिस्थापन की ज़रूरत पड़ती थी। हालाँकि, उन्होंने ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन रॉकेट के हालिया लॉन्च विफलता के बाद हुई देरी पर चिंता भी जताई और कहा कि नासा कंपनी की जाँच में सहायता कर रहा है तथा भविष्य के चंद्र मिशनों पर काम जारी रखने की कोशिश कर रहा है।

आर्टेमिस का दीर्घकालिक लक्ष्य

आर्टेमिस प्रोग्राम अपोलो युग के बाद पहली बार इंसानों को चंद्रमा पर वापस भेजने की नासा की सबसे बड़ी कोशिश है। अपोलो मिशनों के विपरीत, आर्टेमिस का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और व्यावसायिक अंतरिक्ष कंपनियों के माध्यम से चंद्रमा की सतह पर इंसानों की निरंतर उपस्थिति बनाना है — और अंततः अंतरिक्ष यात्रियों को मंगल ग्रह पर भेजना है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों महाशक्तियों के बीच अंतरिक्ष में वर्चस्व की होड़ नई ऊँचाइयों पर पहुँच रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ब्लू ओरिजिन की ताज़ा विफलता यह याद दिलाती है कि व्यावसायिक भागीदारी पर निर्भरता जोखिम-मुक्त नहीं है। चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम निस्संदेह तेज़ है, लेकिन 'रेस' की भाषा बजट और राजनीतिक समर्थन जुटाने का भी एक आज़माया हुआ तरीका है — जैसा शीत युद्ध के अपोलो दौर में हुआ था। असली सवाल यह है कि क्या इस बार की होड़ में वैज्ञानिक और मानवीय उद्देश्य केंद्र में रहेंगे, या केवल भू-राजनीतिक प्रतिष्ठा।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासा प्रमुख ने चंद्रमा रेस को 'महीनों में तय' क्यों कहा?
नासा प्रशासक जैरेड आइजैकमैन ने कहा कि अमेरिका और चीन दोनों अपने चंद्र मिशनों की तैयारी इतनी तेज़ी से कर रहे हैं कि अब यह प्रतिस्पर्धा सालों नहीं, बल्कि महीनों के अंतर पर निर्भर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन के टाइकोनॉट्स का चंद्रमा पर उतरना तय है; सवाल केवल यह है कि अमेरिका पहले पहुँचता है या नहीं।
आर्टेमिस III और आर्टेमिस IV कब होंगे?
आर्टेमिस III अगले वर्ष के लिए नियोजित है, जबकि आर्टेमिस IV 2028 में होगा — जिसमें अंतरिक्ष यात्री नए लैंडिंग सिस्टम की परीक्षण के बाद चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे। नासा प्रमुख के अनुसार 2028 के अंत तक लैंडिंग का लक्ष्य रखा गया है।
चंद्रमा पर स्थायी बेस कब तक बनेगा?
आइजैकमैन के अनुसार चंद्र बेस का बुनियादी ढाँचा 2027 की शुरुआत में भेजा जाएगा और 2030 के दशक की शुरुआत तक चंद्रमा पर अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन जैसी स्थायी मानव उपस्थिति का लक्ष्य है। यह बेस भविष्य के मंगल मिशनों के लिए एक प्रशिक्षण और आपूर्ति केंद्र का काम करेगा।
ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन रॉकेट की विफलता से आर्टेमिस पर क्या असर होगा?
ब्लू ओरिजिन के न्यू ग्लेन रॉकेट के हालिया लॉन्च फेलियर के बाद हुई देरी पर नासा ने चिंता जताई है। हालाँकि आइजैकमैन ने कहा कि नासा कंपनी की जाँच में सहायता कर रहा है और भविष्य के चंद्र मिशनों पर काम जारी रहेगा।
आर्टेमिस प्रोग्राम अपोलो मिशन से कैसे अलग है?
अपोलो मिशन केवल झंडा गाड़ने और वापस आने तक सीमित थे, जबकि आर्टेमिस का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय साझेदारी और व्यावसायिक कंपनियों के सहयोग से चंद्रमा पर इंसानों की निरंतर उपस्थिति बनाना है। इसका अंतिम लक्ष्य चंद्रमा को मंगल ग्रह के मिशनों के लिए एक स्थायी आधार के रूप में विकसित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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