क्या अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से नाता तोड़ लिया? कोविड विफलताओं का आरोप?

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क्या अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से नाता तोड़ लिया? कोविड विफलताओं का आरोप?

सारांश

अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से अपनी सदस्यता समाप्त करने का निर्णय लिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम कोविड-19 महामारी के दौरान संगठन की विफलताओं के जवाब में उठाया गया है। क्या यह अमेरिका के स्वास्थ्य हितों की रक्षा के लिए उचित है?

Key Takeaways

  • अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से सदस्यता समाप्त की।
  • यह निर्णय कोविड-19 की विफलताओं पर आधारित है।
  • ट्रंप प्रशासन ने इसे अपने वादे के अनुसार किया।
  • संगठन पर अमेरिकी हितों की अनदेखी का आरोप।
  • अब अमेरिका द्विपक्षीय साझेदारियों पर ध्यान केंद्रित करेगा।

वाशिंगटन, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका ने औपचारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अपनी सदस्यता समाप्त कर दी है। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पहले दिन किए गए वादे को पूरा करने के तहत लिया गया है।

विदेश मंत्री मार्को रुबियो और स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री रॉबर्ट एफ केनेडी जूनियर ने एक संयुक्त बयान में बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से यह वापसी लागू की गई। इस निर्णय का उद्देश्य अमेरिका को डब्ल्यूएचओ की 'पाबंदियों' से मुक्त करना और कोविड-19 महामारी के दौरान हुई विफलताओं के कारण हुए नुकसान की भरपाई करना है।

बयान में कहा गया, "आज अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से खुद को अलग कर लिया है, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पहले दिन वादा किया था। यह कदम कोविड-19 के दौरान डब्ल्यूएचओ की नाकामियों के जवाब में उठाया गया है, जिनका खामियाजा अमेरिकी जनता को भुगतना पड़ा।"

प्रशासन ने डब्ल्यूएचओ पर अपने मूल उद्देश्य से भटकने और अमेरिकी हितों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि अमेरिका डब्ल्यूएचओ का संस्थापक सदस्य और सबसे बड़ा वित्तीय योगदानकर्ता रहा है, इसके बावजूद संगठन ने अमेरिका के हितों की अनदेखी की।

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि डब्ल्यूएचओ ने राजनीतिक और नौकरशाही एजेंडे को अपनाया, जो उन देशों से प्रभावित था जो अमेरिका के विरोधी हैं। साथ ही, महामारी के दौरान समय पर और सटीक जानकारी साझा करने में संगठन असफल रहा।

बयान में यह भी कहा गया कि इन विफलताओं की वजह से अमेरिकी लोगों की जान जा सकती थी और बाद में इन गलतियों को 'जन स्वास्थ्य के हित' के नाम पर छिपाया गया।

प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के बाहर निकलने के फैसले के बाद डब्ल्यूएचओ का व्यवहार अपमानजनक रहा। कहा गया कि संगठन ने अपने मुख्यालय में लगा अमेरिकी झंडा सौंपने से इनकार कर दिया और यह दावा किया कि उसने अमेरिका की वापसी को मंजूरी नहीं दी है।

संयुक्त बयान में कहा गया, "हमारे संस्थापक सदस्य और सबसे बड़े समर्थक होने के बावजूद, अंतिम दिन तक अमेरिका का अपमान जारी रहा।"

अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया कि अब डब्ल्यूएचओ के साथ उसका संपर्क केवल वापसी की प्रक्रिया पूरी करने और अमेरिकी नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा तक सीमित रहेगा। डब्ल्यूएचओ से जुड़ी सभी अमेरिकी फंडिंग और स्टाफिंग तुरंत समाप्त कर दी गई है।

प्रशासन ने कहा कि अमेरिका अब वैश्विक स्वास्थ्य प्रयासों का नेतृत्व सीधे देशों के साथ द्विपक्षीय साझेदारी और भरोसेमंद स्वास्थ्य संस्थानों के जरिए करेगा। बयान में डब्ल्यूएचओ को भारी-भरकम और अक्षम नौकरशाही बताया गया।

ट्रंप प्रशासन ने कहा कि यह निर्णय उन अमेरिकियों को सम्मान देने के लिए लिया गया है जिन्होंने महामारी में अपनों को खोया, खासकर नर्सिंग होम में मरे बुजुर्गों और उन कारोबारियों को, जिन्हें कोविड प्रतिबंधों से भारी नुकसान हुआ।

बता दें कि अमेरिका 1948 में डब्ल्यूएचओ का संस्थापक सदस्य बना था और लंबे समय तक इसका सबसे बड़ा डोनर रहा है।

Point of View

जो वैश्विक स्वास्थ्य संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाता है। इससे अमेरिका के स्वास्थ्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में नया मोड़ आ सकता है।
NationPress
23/01/2026

Frequently Asked Questions

अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से अपनी सदस्यता क्यों समाप्त की?
अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से अपनी सदस्यता कोविड-19 महामारी के दौरान संगठन की विफलताओं के कारण समाप्त की।
ट्रंप प्रशासन का इसमें क्या कहना है?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा पहले दिन किए गए वादे को पूरा करने के तहत लिया गया है।
इससे अमेरिका को क्या लाभ होगा?
अमेरिका का यह कदम डब्ल्यूएचओ की पाबंदियों से मुक्त होने और स्वास्थ्य नीतियों में स्वायत्तता प्राप्त करने का प्रयास है।
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