क्या ट्रंप ने कनाडा को 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्यौता वापस ले लिया?
सारांश
Key Takeaways
- डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का न्यौता वापस लिया।
- यह कदम अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम है।
- कनाडा के प्रधानमंत्री ने ट्रंप के दावे को खारिज किया।
- बोर्ड में 60 देशों को निमंत्रण दिया गया था, जिनमें से कुछ ने स्वीकार किया।
- स्थायी सदस्यता के लिए 1 अरब डॉलर का भुगतान आवश्यक है।
वाशिंगटन, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा को अपने नवीनतम स्थापित बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का जो निमंत्रण दिया था, उसे वापस ले लिया है। यह कदम उत्तर अमेरिका के दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ती तकरार के संदर्भ में उठाया गया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी। उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को संबोधित करते हुए कहा कि पीस बोर्ड ने कनाडा को भेजा गया निमंत्रण वापस लेने का निर्णय लिया है।
हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने कनाडा को दिया गया यह निमंत्रण क्यों रद्द किया। उन्होंने इस निर्णय के पीछे का कोई कारण नहीं बताया।
बता दें कि बुधवार को, ट्रंप ने दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कहा था कि "कनाडा अमेरिका की वजह से ज़िंदा है।" कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि कनाडा अपने अस्तित्व के लिए अमेरिका पर निर्भर है।
कार्नी ने कहा, "कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका ने एक अद्भुत साझेदारी बनाई है। अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में, लेकिन कनाडा अमेरिका की वजह से जिंदा नहीं है। कनाडा इसलिए आगे बढ़ रहा है क्योंकि हम कनाडाई हैं।"
विश्व में शांति स्थापित करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की स्थापना की है। इसमें शामिल होने के लिए ट्रंप ने दुनिया के लगभग 60 देशों को निमंत्रण भेजा। इजरायली मीडिया के अनुसार, 60 में से दुनिया के 25 देशों ने ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है।
इस बोर्ड ऑफ पीस में अब तक इजरायल, बहरीन, मोरक्को, अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, बुल्गारिया, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, पराग्वे, कतर, सऊदी अरब, तुर्किए, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान, बेलारूस, मिस्र, वियतनाम और मंगोलिया शामिल हुए हैं।
आठ इस्लामिक देशों ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का निमंत्रण स्वीकार किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी गाजा में इजरायल-हमास सीजफायर समझौते के दूसरे चरण के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए बुलाया था। हालांकि, भारत की ओर से अभी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि इस पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन, जर्मनी, स्वीडन, नार्वे और कई अन्य बड़े देशों ने इस साइनिंग समारोह में भाग नहीं लिया। इसके साथ ही जर्मनी, इटली, पैराग्वे, रूस, स्लोवेनिया, तुर्किए और यूक्रेन जैसे कई देशों ने इस निमंत्रण पर कोई वादा नहीं किया है। बोर्ड में शामिल सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल तक सीमित होगा, और स्थायी सदस्यता प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर 1 अरब डॉलर का भुगतान करना होगा।