हूती हमले का दावा: अभा हवाई अड्डे और किंग खालिद एयरबेस पर मिसाइल-ड्रोन अटैक, सऊदी गठबंधन ने तीन ड्रोन इंटरसेप्ट किए
सारांश
मुख्य बातें
सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 4 नवंबर 2026 को तीन ड्रोनों को इंटरसेप्ट कर नष्ट करने की पुष्टि की, जबकि यमन के हूती समूह ने कथित तौर पर दावा किया कि उसने दक्षिण-पश्चिमी सऊदी अरब के असीर क्षेत्र में स्थित अभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और खमीस मुशैत के किंग खालिद एयर बेस पर ड्रोन व बैलिस्टिक मिसाइलों से हमले किए। इन हमलों में हुई क्षति और हताहतों के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
गठबंधन की प्रतिक्रिया और इंटरसेप्शन
गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि उनके बलों ने मक्का क्षेत्र के ऊपर एक ड्रोन को नष्ट किया। इसके बाद उन्होंने पुष्टि की कि दो और ड्रोन रोके गए — एक पूर्वी प्रांत में और दूसरा दक्षिणी क्षेत्र की दिशा में जा रहा था। अल-मलिकी ने इससे आगे कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया।
हूती सैन्य प्रवक्ता का दावा
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरिया ने एक्स पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि उनके समूह ने असीर क्षेत्र में दो लक्षित हमले किए। उनके अनुसार, एक ड्रोन को अभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भेजा गया, जिससे कथित तौर पर हवाई यातायात बाधित हुआ, और एक बैलिस्टिक मिसाइल सीधे किंग खालिद एयर बेस पर जा टकराई।
सरिया ने यह भी दावा किया कि यमन के भीतर, दक्षिणी प्रांत लाहज के रास अल-अराह और अल-मुदरबाह इलाकों में सरकारी बलों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं और इन हमलों में बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तरी प्रांत अल-जौफ के पूर्व में तैनात बलों को भी मिसाइलों से निशाना बनाया गया, जिसमें सैन्य वाहन नष्ट होने और बड़ी संख्या में सैनिकों के हताहत होने का दावा किया गया। गौरतलब है कि इन सभी दावों की स्वतंत्र सत्यापन अभी तक संभव नहीं हो पाया है।
अरामको को संभावित खतरे की चेतावनी
सना स्थित हूती-नियंत्रित 'सबा' समाचार एजेंसी के हवाले से एक हूती सैन्य सूत्र ने सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी अरामको के निवेशकों को संभावित वित्तीय और सुरक्षा जोखिमों के प्रति आगाह किया। सूत्र ने चेतावनी दी कि अरामको हूती बलों की 'पहुँच के दायरे' में है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच संवेदनशील बना हुआ है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन 2014 के अंत से ही गृहयुद्ध की चपेट में है। उस समय हूती विद्रोहियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया था। 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। एक दशक से अधिक समय बाद भी देश में जमीनी लड़ाई और हवाई हमले लगातार जारी हैं। ये ताज़ा घटनाक्रम यमन में संघर्ष के नए सिरे से तेज होने के संकेत देते हैं।
आगे की स्थिति
अभा हवाई अड्डे पर हवाई यातायात की स्थिति और किंग खालिद एयर बेस को हुई वास्तविक क्षति का स्वतंत्र आकलन अभी बाकी है। गठबंधन की ओर से इन हमलों के जवाब में किसी नई कार्रवाई का संकेत फिलहाल नहीं दिया गया है, हालाँकि क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।