योग थेरेपी: आयुष मंत्रालय की चेतावनी — हर किसी के लिए अलग है यह पद्धति, जानें भूमिका और सीमाएं
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को योग थेरेपी के सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संदेश जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यह एक व्यक्ति-केंद्रित चिकित्सा पद्धति है और इसे अपनाने से पहले योग्य विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य है। मंत्रालय ने चेताया है कि बिना मार्गदर्शन के, विशेषकर सोशल मीडिया वीडियो देखकर किया गया अभ्यास, गंभीर चोटों का कारण बन सकता है।
योग थेरेपी क्या है और यह सामान्य योग से कैसे अलग है
मंत्रालय के अनुसार, योग थेरेपी में एक ही अभ्यास-पद्धति सभी के लिए उपयुक्त नहीं होती। प्रत्येक व्यक्ति की शारीरिक संरचना, लचीलापन और आंतरिक स्वास्थ्य स्थिति भिन्न होती है, इसलिए अभ्यासों का चयन व्यक्ति की विशिष्ट शारीरिक, मानसिक और स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार ही होना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल प्लेटफार्मों पर बिना प्रमाणित निगरानी के योग सिखाने वाले वीडियो की बाढ़ आ गई है।
किन रोगियों के लिए सामान्य आसन भी हो सकते हैं जोखिम भरे
आयुष मंत्रालय ने योग थेरेपी की सीमाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि उच्च रक्तचाप, स्लिप डिस्क, हर्निया, हृदय रोग अथवा हालिया सर्जरी से गुजर चुके रोगियों के लिए सामान्य दिखने वाले योग आसन भी जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि योग थेरेपी तत्काल राहत देने वाला उपचार नहीं है और इसे चिकित्सा आपातस्थितियों में विकल्प के रूप में नहीं अपनाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि योग को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ-साथ इसके गलत उपयोग से होने वाली चोटों की संख्या भी बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना प्रशिक्षण के उन्नत आसन करना रीढ़ की हड्डी और जोड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है।
योग थेरेपी — चिकित्सा का पूरक, विकल्प नहीं
मंत्रालय ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि योग थेरेपी को चिकित्सा निदान या डॉक्टर द्वारा निर्धारित इलाज का विकल्प नहीं समझा जाना चाहिए। यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पूरक रूप में काम कर सकती है। इसका वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब अभ्यासकर्ता की विशिष्ट स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए योग्य योग चिकित्सक की निगरानी में अनुकूलित क्रियाएं निर्धारित की जाएं। नियमित अभ्यास, जीवनशैली में उचित बदलाव और निरंतर निगरानी इसकी प्रभावशीलता के लिए अनिवार्य हैं।
सोशल मीडिया से योग सीखने के खतरे
मंत्रालय ने डिजिटल युग में बढ़ती एक प्रवृत्ति पर चिंता जताई है — इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वीडियो देखकर बिना किसी प्रशिक्षित मार्गदर्शन के कठिन अभ्यास करना। ऐसे अभ्यास अक्सर शारीरिक चोटों का प्रमुख कारण बनते हैं। मंत्रालय का मत है कि योग की अधूरी जानकारी और अविवेकपूर्ण अभ्यास लाभ के बजाय गंभीर नुकसान का कारण बन सकते हैं।
आयुष मंत्रालय का 'जागरुकता के साथ योगाभ्यास' अभियान
मंत्रालय ने 'जागरुकता के साथ योगाभ्यास' अभियान के तहत नागरिकों से अपील की है कि वे योग को समझ-बूझकर और जिम्मेदारी के साथ अपनाएं। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ सुरक्षित तरीके से जोड़ना ही इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देना अनिवार्य बताया गया है। आने वाले समय में मंत्रालय इस जागरूकता अभियान को और व्यापक बनाने की दिशा में काम करेगा।