हृदय स्वास्थ्य के लिए योगासन: आयुष मंत्रालय की सलाह, तनाव-ब्लड प्रेशर से मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस 2025 से पूर्व हृदय स्वास्थ्य को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें नियमित योगाभ्यास, ध्यान और प्राणायाम को दिल की सेहत के लिए अनिवार्य बताया गया है। मंत्रालय के अनुसार, आधुनिक भागदौड़ भरी जीवनशैली में लोग करियर और कमाई को प्राथमिकता देते हैं, जबकि हृदय की देखभाल पीछे छूट जाती है।
हृदय और योग का संबंध
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हृदय वह अंग है जो बिना विराम लिए जीवनभर कार्य करता रहता है, फिर भी उसकी देखभाल सबसे अधिक उपेक्षित रहती है। आयुष मंत्रालय का कहना है कि नियमित योगाभ्यास से रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) नियंत्रित रहता है, कोलेस्ट्रॉल स्तर संतुलित होता है और हृदय की मांसपेशियाँ मज़बूत बनती हैं। योग और ध्यान से मानसिक तनाव कम होता है, जो हृदय रोगों का एक प्रमुख कारण माना जाता है।
मुख्य योगासन और उनके लाभ
भुजंगासन में पेट के बल लेटकर शरीर के ऊपरी हिस्से को ऊपर उठाया जाता है। यह रीढ़ को मज़बूत बनाता है, पीठ दर्द में राहत देता है और छाती को खोलकर हृदय तक रक्त प्रवाह बेहतर करता है।
शवासन में पीठ के बल पूर्ण विश्राम की मुद्रा में लेटा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आसन मानसिक तनाव घटाने और तंत्रिका तंत्र को शांत करने में सर्वाधिक प्रभावी है।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम में एक नासिका से श्वास लेकर दूसरी से छोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है, ऑक्सीजन आपूर्ति सुधारती है और मन को शांत रखती है।
सूर्य नमस्कार 12 योग मुद्राओं का क्रमबद्ध अभ्यास है। यह समग्र शारीरिक व्यायाम है जिससे लचीलापन, शक्ति और ऊर्जा एक साथ बढ़ती है — और हृदय को नियमित एरोबिक गतिविधि का लाभ मिलता है।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि व्यस्त दिनचर्या में प्रतिदिन 30 से 45 मिनट का योगाभ्यास न केवल हृदय को स्वस्थ रखता है, बल्कि वृद्धावस्था में भी सक्रिय जीवन जीने में सहायक है। गहरी साँस लेने वाले व्यायाम, तनावपूर्ण विचारों से दूरी, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद — ये सभी हृदय स्वास्थ्य की आधारशिला हैं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में हृदय रोगों का बोझ तेज़ी से बढ़ रहा है और युवा आयु वर्ग भी इससे अछूता नहीं रहा। आयुष मंत्रालय की यह पहल विश्व योग दिवस (21 जून) से पहले जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई है, ताकि नागरिक योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बना सकें।
क्या होगा आगे
मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, 21 जून 2025 को देशभर में विश्व योग दिवस के आयोजनों में हृदय स्वास्थ्य पर विशेष सत्र आयोजित किए जाने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नागरिक इन सरल योगाभ्यासों को नियमित रूप से अपनाएँ, तो दीर्घकाल में हृदय रोगों की दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।