डिप्रेशन से राहत दिलाते हैं ये 6 योगासन, आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस से पहले बताए फायदे
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने 22 मई 2025 को विश्व योग दिवस से पूर्व अवसाद (डिप्रेशन) से मुक्ति दिलाने में सहायक प्रमुख योगासनों और प्राणायामों की सूची जारी की है। मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन को कम करता है, मन को स्थिर रखता है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। यह पहल भारत सरकार के 'योग युक्त, रोग मुक्त' अभियान का हिस्सा है।
डिप्रेशन और आधुनिक जीवन
योग विशेषज्ञों का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, कार्यस्थल का दबाव और व्यक्तिगत समस्याएँ मिलकर अवसाद को एक सामान्य समस्या बना चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं रखता, बल्कि भावनात्मक संतुलन बनाने और मन को शांत करने में भी उतना ही प्रभावी है। आयुष मंत्रालय नागरिकों से अपील कर रहा है कि वे प्रतिदिन सुबह कम से कम 15-20 मिनट इन आसनों का अभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ।
मुख्य योगासन और उनके लाभ
ध्यान (Meditation): रोज़ाना 10-15 मिनट ध्यान करने से मन की उलझनें कम होती हैं और भीतर से शांति का अनुभव होता है। यह मानसिक एकाग्रता बढ़ाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है।
पवनमुक्तासन: यह आसन पेट संबंधी समस्याओं के साथ-साथ मन की अशांति को भी दूर करने में सहायक है। मंत्रालय के अनुसार, इससे शरीर में संचित नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है।
भ्रामरी प्राणायाम: भौंरे की भाँति ध्वनि उत्पन्न करते हुए श्वास लेने की इस विधि से मस्तिष्क शांत होता है और तनाव व चिंता में उल्लेखनीय कमी आती है।
ताड़ासन: खड़े होकर किया जाने वाला यह आसन शरीर और मन दोनों को ऊर्जावान बनाता है। इसे नियमित करने से मुद्रा सुधरती है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
भुजंगासन: सर्प की मुद्रा में किया जाने वाला यह आसन रीढ़ की हड्डी को मज़बूत बनाता है और छाती की जकड़न कम करता है। मंत्रालय के अनुसार, इससे डिप्रेशन से जुड़ी नकारात्मक भावनाएँ कम होती हैं।
अनुलोम-विलोम प्राणायाम: नाक के एक छिद्र से श्वास लेकर दूसरे से छोड़ने की यह तकनीक मस्तिष्क के दोनों गोलार्धों को संतुलित करती है और मन को स्थिर रखती है।
आयुष मंत्रालय का संदेश
आयुष मंत्रालय का यह जागरूकता अभियान 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी के तहत चलाया जा रहा है। मंत्रालय का कहना है कि योग न केवल डिप्रेशन से लड़ने में मदद करता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। गौरतलब है कि भारत सरकार पिछले कई वर्षों से योग को मुख्यधारा की स्वास्थ्य नीति का हिस्सा बनाने की दिशा में काम कर रही है।
आगे क्या
विश्व योग दिवस के अवसर पर देशभर में सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाने की संभावना है। मंत्रालय द्वारा जारी यह सूची उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं और योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करना चाहते हैं।