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डिप्रेशन से मुक्ति के लिए आयुष मंत्रालय के 6 प्रभावी योगासन, विश्व योग दिवस से पहले बड़ी पहल

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डिप्रेशन से मुक्ति के लिए आयुष मंत्रालय के 6 प्रभावी योगासन, विश्व योग दिवस से पहले बड़ी पहल

सारांश

विश्व योग दिवस से पहले आयुष मंत्रालय ने डिप्रेशन से मुक्ति के लिए 6 योगासनों और प्राणायामों की सूची जारी की। ध्यान, भुजंगासन, अनुलोम-विलोम समेत ये अभ्यास तनाव हार्मोन घटाने और मानसिक संतुलन बनाने में कारगर बताए गए हैं।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 22 मई 2026 को डिप्रेशन से राहत दिलाने वाले 6 योगासनों की सूची जारी की।
अनुशंसित अभ्यासों में ध्यान , पवनमुक्तासन , भ्रामरी प्राणायाम , ताड़ासन , भुजंगासन और अनुलोम-विलोम शामिल हैं।
मंत्रालय ने प्रतिदिन सुबह 15 से 20 मिनट से योगाभ्यास शुरू करने की सलाह दी।
यह पहल 21 जून 2026 के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पहले 'योग युक्त, रोग मुक्त' अभियान का हिस्सा है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योगाभ्यास तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन को कम करता है और भावनात्मक संतुलन बनाता है।

आयुष मंत्रालय ने 22 मई 2026 को विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर अवसाद यानी डिप्रेशन से मुक्ति दिलाने में सहायक 6 प्रमुख योगासनों और प्राणायामों की सूची जारी की। मंत्रालय के अनुसार, नियमित योगाभ्यास तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन को कम करता है, मन को स्थिर करता है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। यह पहल 'योग युक्त, रोग मुक्त' संदेश के तहत नागरिकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का हिस्सा है।

क्यों जरूरी है नियमित योगाभ्यास

योग विशेषज्ञों का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, कार्यस्थल का दबाव और व्यक्तिगत समस्याओं के कारण डिप्रेशन एक व्यापक समस्या बन चुकी है। योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने तक सीमित नहीं है — यह मन को शांत करने, तनाव घटाने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी उतना ही प्रभावी है। आयुष मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रतिदिन सुबह 15 से 20 मिनट इन आसनों का अभ्यास शुरू करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ।

मुख्य योगासन और उनके लाभ

ध्यान (Meditation): रोज़ाना 10 से 15 मिनट ध्यान करने से मन की उलझनें कम होती हैं और आंतरिक शांति मिलती है। यह मानसिक स्थिरता की नींव माना जाता है।

पवनमुक्तासन: यह आसन पेट की समस्याओं के साथ-साथ मन की अशांति को भी दूर करने में सहायक है। मंत्रालय के अनुसार, इससे शरीर में संचित नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकलती है।

भ्रामरी प्राणायाम: भौंरे की तरह गुनगुनाते हुए साँस लेने की इस विधि से मस्तिष्क शांत होता है और तनाव व चिंता में उल्लेखनीय कमी आती है।

ताड़ासन: खड़े होकर किया जाने वाला यह आसन शरीर और मन दोनों को ऊर्जा प्रदान करता है। यह मुद्रा सुधारने और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मददगार बताया गया है।

भुजंगासन: सर्प मुद्रा के नाम से जाना जाने वाला यह आसन रीढ़ की हड्डी को मज़बूत करता है और छाती की जकड़न कम करता है। मंत्रालय के अनुसार, इससे डिप्रेशन से जुड़ी नकारात्मक भावनाओं में कमी आती है।

अनुलोम-विलोम प्राणायाम: नाक के एक छिद्र से साँस लेने और दूसरे से छोड़ने की यह तकनीक मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित करती है और मन को शांत बनाए रखने में सहायक है।

आयुष मंत्रालय की व्यापक पहल

गौरतलब है कि विश्व योग दिवस (21 जून) से पहले आयुष मंत्रालय लगातार विभिन्न योगासनों और उनके स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी साझा कर रहा है। यह पहल शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंडे में प्रमुखता देने की दिशा में एक कदम है। मंत्रालय का 'योग युक्त, रोग मुक्त' अभियान इसी सोच का विस्तार है।

आम जनता पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारियों के लिए योग को पारंपरिक चिकित्सा के पूरक के रूप में अपनाया जा सकता है। हालाँकि, गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है। मंत्रालय की यह सलाह उन लोगों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है जो हल्के से मध्यम स्तर के तनाव और अवसाद से जूझ रहे हैं।

क्या होगा आगे

21 जून 2026 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय द्वारा देशभर में बड़े आयोजनों की तैयारी है। इस वर्ष का फोकस मानसिक स्वास्थ्य और योग के अंतर्संबंध पर रहने की संभावना है, जो वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे पूरी तस्वीर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से कहते आए हैं कि गंभीर अवसाद के लिए योग सहायक तो हो सकता है, पर यह नैदानिक उपचार का विकल्प नहीं है। मंत्रालय के संदेश में यह अंतर स्पष्ट रूप से नहीं उभरता, जिससे जनता में भ्रम की स्थिति बन सकती है। विश्व योग दिवस के इर्द-गिर्द इस तरह की जागरूकता मुहिम का स्वागत है, परंतु मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की देशव्यापी कमी को देखते हुए योग को 'समाधान' की जगह 'पूरक' के रूप में प्रस्तुत करना अधिक जिम्मेदाराना होगा।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुष मंत्रालय ने डिप्रेशन के लिए कौन-से योगासन बताए हैं?
आयुष मंत्रालय ने डिप्रेशन से राहत के लिए ध्यान, पवनमुक्तासन, भ्रामरी प्राणायाम, ताड़ासन, भुजंगासन और अनुलोम-विलोम प्राणायाम को प्रभावी बताया है। ये सभी अभ्यास तनाव कम करने, मस्तिष्क को शांत करने और भावनात्मक संतुलन बनाने में सहायक माने जाते हैं।
रोज़ाना कितने समय तक योग करना चाहिए?
आयुष मंत्रालय की सलाह है कि शुरुआत में प्रतिदिन सुबह 15 से 20 मिनट योगाभ्यास करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएँ। नियमितता को समय की अवधि से अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है।
क्या योग अकेले डिप्रेशन ठीक कर सकता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार नियमित योगाभ्यास डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं से निजात दिलाने में 'मदद कर सकता है'। गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है और योग को पारंपरिक चिकित्सा के पूरक के रूप में अपनाना उचित है।
विश्व योग दिवस कब मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रतिवर्ष 21 जून को मनाया जाता है। इस वर्ष 2026 में भी आयुष मंत्रालय देशभर में बड़े आयोजनों की तैयारी कर रहा है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य और योग के संबंध पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
भ्रामरी प्राणायाम कैसे करते हैं और इसके क्या फायदे हैं?
भ्रामरी प्राणायाम में भौंरे की तरह गुनगुनाते हुए साँस ली जाती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस प्राणायाम से मस्तिष्क शांत होता है और तनाव व चिंता में उल्लेखनीय कमी आती है, जो इसे डिप्रेशन प्रबंधन में विशेष रूप से उपयोगी बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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