2 अक्टूबर 2026
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भारत-नीदरलैंड्स कृषि साझेदारी का होगा विस्तार: बागवानी, बीज और कृषि तकनीक में बढ़ेगा सहयोग

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भारत-नीदरलैंड्स कृषि साझेदारी का होगा विस्तार: बागवानी, बीज और कृषि तकनीक में बढ़ेगा सहयोग

सारांश

भारत और नीदरलैंड्स ने कृषि साझेदारी को नई ऊँचाई देने का फैसला किया है। बागवानी, बीज और कृषि तकनीक में सहयोग बढ़ेगा, और बीज क्षेत्र के लिए समर्पित कार्ययोजना बनेगी। पहले से स्थापित 25 उत्कृष्टता केंद्रों की समीक्षा भी हुई।

मुख्य बातें

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2 अक्टूबर 2026 को नीदरलैंड्स के कृषि मंत्री सिल्वियो एरकेंस के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
भारत और नीदरलैंड्स ने कृषि नवाचार, बागवानी और बीज क्षेत्र में सहयोग विस्तार पर सहमति जताई।
दोनों देशों के बीच स्थापित 25 उत्कृष्टता केंद्रों की प्रगति की समीक्षा की गई।
बीज क्षेत्र में सहयोग के लिए समर्पित कार्ययोजना और रोडमैप तैयार करने पर सहमति बनी।
नीदरलैंड्स प्रतिनिधिमंडल में राजदूत मारिसा जेरार्ड्स और महानिदेशक मार्टेन वान डेन बर्ग भी शामिल रहे।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पुष्टि की कि भारत और नीदरलैंड्स ने कृषि क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति जताई है। दोनों देश कृषि नवाचार, बागवानी और बीज क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करेंगे, जिससे तकनीक-आधारित खेती और कृषि उत्पादकता को नई दिशा मिलेगी।

द्विपक्षीय बैठक: मुख्य घटनाक्रम

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान और नीदरलैंड्स के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा एवं प्रकृति मंत्री सिल्वियो एरकेंस के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के मध्य चल रहे सहयोग की गहन समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य तकनीक, नवाचार और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से कृषि उत्पादकता को सुदृढ़ बनाना था।

नीदरलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल में महानिदेशक मार्टेन वान डेन बर्ग, भारत में नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा जेरार्ड्स और वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। भारतीय पक्ष की ओर से कृषि सचिव अतिश चंद्र और डीएआरई सचिव एम.एल. जाट सहित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उत्कृष्टता केंद्रों की प्रगति की समीक्षा

बैठक में भारत-नीदरलैंड्स साझेदारी के अंतर्गत कृषि और बागवानी क्षेत्रों में स्थापित 25 उत्कृष्टता केंद्रों की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इन केंद्रों ने कई भारतीय राज्यों में आधुनिक कृषि तकनीकों, संरक्षित खेती और उन्नत बागवानी पद्धतियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।

गौरतलब है कि नीदरलैंड्स वैश्विक कृषि प्रौद्योगिकी और बागवानी में अग्रणी देशों में गिना जाता है, और भारत के साथ इसकी यह साझेदारी कई वर्षों से फलती-फूलती रही है।

बीज क्षेत्र में समर्पित कार्ययोजना

चर्चा के दौरान शिवराज सिंह चौहान और सिल्वियो एरकेंस ने बीज क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने इस दिशा में एक समर्पित कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति जताई। प्रस्तावित ढाँचा प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करेगा और संयुक्त पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने और प्रमाणित बीजों की किसानों तक पहुँच सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।

कृषि नवाचार और टिकाऊ खेती पर जोर

बैठक में कृषि नवाचार को प्रमुख प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया। दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान, नई तकनीकों को अपनाने और नवाचार-आधारित खेती में हुई प्रगति पर अपने अनुभव साझा किए। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि टिकाऊ और तकनीक-आधारित कृषि विकास के लिए विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान अनिवार्य है।

आम किसानों पर संभावित असर

इस साझेदारी के विस्तार से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कार्ययोजना के अंतिम रूप लेने के बाद इसका लाभ विभिन्न राज्यों के किसानों तक पहुँचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 25 उत्कृष्टता केंद्रों की उपलब्धियाँ ज़मीनी किसानों तक कितनी पहुँची हैं — और नई कार्ययोजना उस खाई को पाटने के लिए क्या अलग करेगी। नीदरलैंड्स की बागवानी तकनीक विश्वस्तरीय है, पर भारत की कृषि विविधता और छोटी जोत की चुनौतियों में उसका अनुकूलन एक जटिल काम है। बीज क्षेत्र में सहयोग की संभावना उत्साहजनक है, लेकिन यह तभी अर्थपूर्ण होगी जब यह केवल कॉर्पोरेट बीज व्यवसाय तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे किसानों के लिए प्रमाणित बीजों की सुलभता भी सुनिश्चित करे।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत और नीदरलैंड्स की कृषि साझेदारी में क्या नया हुआ है?
2 अक्टूबर 2026 को हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने कृषि नवाचार, बागवानी और बीज क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बीज क्षेत्र के लिए एक समर्पित कार्ययोजना और रोडमैप तैयार करने का भी निर्णय लिया गया।
भारत-नीदरलैंड्स कृषि उत्कृष्टता केंद्र क्या हैं?
ये दोनों देशों की साझेदारी के तहत स्थापित 25 केंद्र हैं जो कई भारतीय राज्यों में आधुनिक कृषि तकनीकों, संरक्षित खेती और उन्नत बागवानी पद्धतियों को बढ़ावा देते हैं। इन केंद्रों की प्रगति की समीक्षा 2 अक्टूबर 2026 की बैठक में की गई।
बीज क्षेत्र में भारत-नीदरलैंड्स सहयोग का क्या स्वरूप होगा?
दोनों पक्षों ने बीज क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समर्पित कार्ययोजना बनाने पर सहमति जताई है। यह ढाँचा प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करेगा और संयुक्त पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रोडमैप तैयार करेगा।
इस साझेदारी से भारतीय किसानों को क्या फायदा होगा?
इस विस्तारित साझेदारी से तकनीक-आधारित खेती, उन्नत बागवानी विधियाँ और बेहतर बीज उपलब्धता के ज़रिए किसानों की उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है। संसाधनों के बेहतर उपयोग और आधुनिक कृषि पद्धतियों से कृषि क्षेत्र की दीर्घकालिक क्षमता मजबूत होगी।
बैठक में नीदरलैंड्स का प्रतिनिधित्व किसने किया?
नीदरलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा एवं प्रकृति मंत्री सिल्वियो एरकेंस ने किया। उनके साथ महानिदेशक मार्टेन वान डेन बर्ग, भारत में नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा जेरार्ड्स और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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