भारत-नीदरलैंड्स कृषि साझेदारी का होगा विस्तार: बागवानी, बीज और कृषि तकनीक में बढ़ेगा सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पुष्टि की कि भारत और नीदरलैंड्स ने कृषि क्षेत्र में अपनी साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति जताई है। दोनों देश कृषि नवाचार, बागवानी और बीज क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करेंगे, जिससे तकनीक-आधारित खेती और कृषि उत्पादकता को नई दिशा मिलेगी।
द्विपक्षीय बैठक: मुख्य घटनाक्रम
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, शिवराज सिंह चौहान और नीदरलैंड्स के कृषि, मत्स्य पालन, खाद्य सुरक्षा एवं प्रकृति मंत्री सिल्वियो एरकेंस के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों के मध्य चल रहे सहयोग की गहन समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य तकनीक, नवाचार और ज्ञान साझाकरण के माध्यम से कृषि उत्पादकता को सुदृढ़ बनाना था।
नीदरलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल में महानिदेशक मार्टेन वान डेन बर्ग, भारत में नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा जेरार्ड्स और वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। भारतीय पक्ष की ओर से कृषि सचिव अतिश चंद्र और डीएआरई सचिव एम.एल. जाट सहित कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
उत्कृष्टता केंद्रों की प्रगति की समीक्षा
बैठक में भारत-नीदरलैंड्स साझेदारी के अंतर्गत कृषि और बागवानी क्षेत्रों में स्थापित 25 उत्कृष्टता केंद्रों की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। इन केंद्रों ने कई भारतीय राज्यों में आधुनिक कृषि तकनीकों, संरक्षित खेती और उन्नत बागवानी पद्धतियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।
गौरतलब है कि नीदरलैंड्स वैश्विक कृषि प्रौद्योगिकी और बागवानी में अग्रणी देशों में गिना जाता है, और भारत के साथ इसकी यह साझेदारी कई वर्षों से फलती-फूलती रही है।
बीज क्षेत्र में समर्पित कार्ययोजना
चर्चा के दौरान शिवराज सिंह चौहान और सिल्वियो एरकेंस ने बीज क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने इस दिशा में एक समर्पित कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति जताई। प्रस्तावित ढाँचा प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करेगा और संयुक्त पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार बीज प्रतिस्थापन दर बढ़ाने और प्रमाणित बीजों की किसानों तक पहुँच सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है।
कृषि नवाचार और टिकाऊ खेती पर जोर
बैठक में कृषि नवाचार को प्रमुख प्राथमिकता के रूप में रेखांकित किया गया। दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान, नई तकनीकों को अपनाने और नवाचार-आधारित खेती में हुई प्रगति पर अपने अनुभव साझा किए। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि टिकाऊ और तकनीक-आधारित कृषि विकास के लिए विशेषज्ञता और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान अनिवार्य है।
आम किसानों पर संभावित असर
इस साझेदारी के विस्तार से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने और कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कार्ययोजना के अंतिम रूप लेने के बाद इसका लाभ विभिन्न राज्यों के किसानों तक पहुँचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है।