नूरिस्तान बाढ़: भारत ने अफगानिस्तान को भेजी राहत सामग्री, 20 की मौत, 100 से अधिक लापता
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने मंगलवार, 21 जुलाई को अफगानिस्तान के नूरिस्तान प्रांत में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री रवाना की। इस सहायता में खाद्य सामग्री और परिवारों के लिए टेंट शामिल हैं, जो अफगानिस्तान की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को सौंपी गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में अब तक कम से कम 20 लोगों की मौत हो चुकी है, 80 से अधिक घायल हैं और 100 से ज़्यादा लोग लापता हैं।
भारत की राहत पहल
विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, 'नूरिस्तान में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने राहत सामग्री — जिसमें खाद्य सामग्री और परिवारों के लिए टेंट शामिल हैं — अफगानिस्तान की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को भेजी है, ताकि प्रभावित लोगों की मदद की जा सके। इस मुश्किल समय में भारत अफगानिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है।' यह कदम भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत मानवीय सहायता की परंपरा को आगे बढ़ाता है।
आपदा का विस्तार और मुख्य घटनाक्रम
बाढ़ नूरिस्तान प्रांत के परून शहर और आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद आई। तालिबान प्रशासन द्वारा संचालित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बयान के अनुसार, तेज़ बाढ़ ने परून सहित नूरिस्तान के कई क्षेत्रों को चपेट में लिया, जिससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। अफगानिस्तान की समाचार एजेंसी खामा प्रेस ने तालिबान प्रशासन के हवाले से बताया कि 100 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
प्राधिकरण के सूचना एवं प्रकाशन विभाग के प्रमुख और प्रवक्ता हाफिज़ मोहम्मद यूसुफ हमद ने बताया कि हालात का जायजा लेने, लापता लोगों की तलाश और नुकसान के आकलन के लिए विशेषज्ञ टीमें तत्काल प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं। हमद ने स्पष्ट किया कि बचाव अभियान जारी रहने के कारण मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव संभव है।
आम जनता पर असर
बाढ़ के तेज़ बहाव में कई घर, कृषि भूमि और दुकानें या तो क्षतिग्रस्त हो गईं या पूरी तरह बह गईं, जिससे प्रभावित परिवारों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। 100 से अधिक लोगों के लापता होने के कारण अधिकारियों को आशंका है कि जैसे-जैसे खोज अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। बचाव दल उन लोगों की तलाश में जुटे हैं जो बाढ़ के तेज़ बहाव में बह गए हो सकते हैं।
राहत कार्य में चुनौतियाँ
नूरिस्तान का पहाड़ी भूगोल और सड़क संपर्क की सीमित सुविधा राहत एवं बचाव कार्यों में बड़ी बाधा बन रही है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान उन देशों में शामिल है जो मौसम-जनित प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील हैं — यहाँ भूस्खलन, सूखा और बाढ़ नियमित रूप से आती रहती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश पहले से ही आर्थिक संकट और मानवीय सहायता की कमी से जूझ रहा है।
क्या होगा आगे
बचाव और राहत अभियान जारी है। अधिकारियों के अनुसार, नुकसान का पूरा आकलन होने में अभी समय लगेगा। भारत की यह मानवीय सहायता ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अफगानिस्तान में अंतरराष्ट्रीय सहायता का प्रवाह पहले की तुलना में सीमित हो गया है। आने वाले दिनों में लापता लोगों की संख्या और क्षति के आँकड़े स्पष्ट होने की उम्मीद है।